आईने में बदहवास दीपक बापू
(यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है)
अपने आईने में
हमारा शीर्ष दिखाकर
वह हिट हो जाते हैं
और हम इतनी बड़ी रचना की देह लेकर
फ्लॉप की भीड़ में बैठ जाते हैं
उनके आईने में दीपक बापू
बदहवास नजर आते हैं
कृपया पूरी रचना यहां पढे
आईने में बदहवास दीपक बापू
नारद के पाठकों के लिए सूचना- हमारा माउस ढंग से काम नहीं कर रहा है ,वह चूंकि हम गूगल ही इसे टाईप करते हैं तो उसे ले जाने के लिए माउस का इस्तेमाल का उपयोग करते हैं वह पूरी रचना नही ले रहा है इसीलिये दुसरे डमी ब्लोग को लिंक कर रहे हैं । आशा है सुधि पाठक इसे सहजता से लेंगे।
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