दूसरों के हंसने का भय
Posted on 12 by दीपक भारतदीप
जो दूसरे का दिल दुखाकर
अपने अपनी लिये सुख का अंबार
लगाते हैं
वही अपनी जिंदगी की नाव
दु:ख की मझधार में
फसी पाते हैं
———————-
दूसरों की पीड़ा और दर्द
पर हँसना जिनको
अच्छा लगता है
अपनी विपत्ति पर
टूटते हैं वही लोग
अपने दर्द और पीड़ा से नहीं
दूसरों के हंसने से
उन्हें भय लगता है
Filed under: Love, inglish, internet, media, online jurnalism, shayree, urdu, आचरण, आदमी, क्षणिका, चरित्र, दृष्टिकोण, बिंब-प्रतिबिंब, व्यंग्य, शायरी, शेर-ओ-शायरी, हिन्दी



