तन में तंत्र मन में मंत्र

blogvani
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तुम अपने मन की बात
स्वयं ही नहीं रख पाते 
कोई और तुम्हारे  राज की
बात क्यों रखेगा 
वह चार से कहेगा 
जिस दर्द और दाग को तुम 
छिपाना चाहते हो 
वह जमाने भर से कहेगा 
जब तुम्हे उसे अपने राज की 
बात कहकर  दिमाग का
बोझ हल्का लगने लगेगा
तब ही बदनामी से 
वह दर्द और बढेगा
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 तन में रहे तंत्र 
मन में रहे मन्त्र 
हाथों में ही है जिंदगी की 
सफलता का शक्तिशाली यंत्र 
फिर कहाँ ढूंढते हो 
साधु-संत, पीर-फकीर और 
सयानो के द्वार पर 
अपना मत्था टेकते  हो
ऐसे ही सयानो ने 
रचा है मायाजाल और
काले जादू का षडयंत्र 
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सांस चलने तक साथ  निभाने का
वादा कहने  और सुनने में 
बहुत अच्छा  लगता है
जब दायित्वों के बोझ तले 
फँसने लगती है सांस 
हर कोई  उसे भूलने लगता है
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