पति-पत्नी और चोर-हास्य व्यंग्य कविता

blogvani
चिट्ठाजगतHindi Blogs. Com - हिन्दी चिट्ठों की जीवनधारा 

 रास्ते में पत्नी के गले से 
चैन निकाल कर भाग रहे 
चोर के पीछे पति भी भागा
और जोर-जोर से चिल्लाया
लोगों ने सुना तो उसे पकड़ लिया
और  पति के हाथ में थमाया 
पति ने चोर की पिटाई की 
वहाँ एकत्रित भीड  ने  भी   कर डाली
अपने हाथ की   सफाई

चोर पिटते-पिटते बेहाल हो गया
पीछे से धीरे-धीरे पत्नी 
दौडती आयी और बोली अपने पति से
‘मत मारो इसे चैन तो नकली सोने की थी 
भीड में सन्नाटा खिंच गया 
पति बहुत घबडाया और सहमे स्वर में बोला
इतना बड़ा राज पहले क्यों नहीं बताया
इस गरीब को को बेकार में पिटवाया 
 
पत्नी चिल्लाकर बोली
‘क्या खाक बताती 
तुम्हें अपनी अकल नहीं है 
शादी के दस सालों में कभी 
तुमने कभी सोने की चैन 
मुझे बनवा कर थी है जो पहनती 
कितनी बार कहा पर तुमने 
पैसे की कमी  का बहाना बनाया
दोनों पति-पत्नी  के बीच हो रही
 चिक-चिक ने वहाँ तमाशा लगाया   
 
इधर चोर भी संभल गया था
वह चीखा  जोर से 
तुम लोग आपस में 
अपना झगड़ा बाद में निपटाना 
यह जुर्म है
नकली सोने की चोरी के आरोप में
किसी गरीब आदमी को पिटवाना 
अब भरो मेरा जुर्माना 
पति-पत्नी ना-नुकर करने लगे
भीड में जुटे  लोग भी चोर का 
जोर-जोर से पक्ष लेने लगे 
ऐक आदमी ने धमकाया
‘अगर नहीं दिया तो जितने 
हाथ इस गरीब में में पडे हैं
उतने तुम पर भी पडेंगे
फिर मत कहना कि 
पहले नहीं समझाया 
 
पत्नी ने पति को समझाया
‘कुछ दे दो  तुमसे झगड़े का भय मुझे  नहीं है 
अगर खबर लग गयी रिश्तेदारों को 
यह  कि मैं नकली सोने की चैन 
पहनकर आती हूँ तो 
बदनाम हो जाऊँगी
तुम्हारे पिटाई तो भूल सकती हूँ 
पर अपनी बदनामी नहीं झेल पाऊन्गी 
पत्नी का समर्थन न  मिलने से हताश 
पति ने असली सोने की  चैन की  कीमत  
का ऐक तिहाई जुर्माना चोर को चुकाया
और अपना  पीछाछुडाया     
——————-    

One Comment

  1. Posted April 3, 2009 at 20:00 | Permalink

    ha ha ha ha ha ..


Post a Comment

You must be logged in to post a comment.