खुले बाजार का खेल

कभी ताज के लिये संदेश 
हवा में उड़ाकर  
सारी दुनिया में दिलाते सम्मान  
लोगों की बुद्धि  को घुमाने का
चलाते खुलेआम अभियान
कभी मोबाइल की बैटरी के
फटने  का भय टीवी में दिखाते
और अखबार में छपवाते 
अगले दिन खंडन  और
स्पष्टीकरण के विज्ञापन आते
कंपनियां  देती इस तरह 
अपनी ईमानदारी की पहचान 
 
अर्थशास्त्र के बहुत बडे ज्ञानी और 
कहलाये जो अति  बुद्धिमान 
बाजार और मीडिया के खेल में वह भी
फँस जाते  हैं बनकर अनजान 
मैनेजमेंट  का फंडा   है यह
अच्छे-खासे को बुद्धू बना दे 
खरे सोने के सिक्के को 
खरीद ले पीतल के भाव 
खोटे  सिक्के को चला दे
बाजार में सोने के भाव 
जौहरी को भुला दें 
असली-नकली हीरे की करना पहचान 
 
धीरे- -धीरे  ही समझ में आयेगा
यह खेल     खुले बाजार का
पहले अपने उत्पाद के खोटा होने 
 की बाजार  में अफवाह 
फिर दिलवाओ उसके खरे 
होने के बयान 
ताकि लोग भूले नही उसकी पहचान    

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