लोहे लंगर से बनी ट्रक,बस, कार और
मोटर साइकिल के झुंड खडे
खरीदे थे जिन्होंने यह सब
सर्वशक्तिमान के दरबार के द्वार
पहले दीदार के लिए आकर टिकाये
नियमित रुप से आने वाले
सर्वशक्तिमान के दीदार करने वाले
होते परेशान अन्दर कैसे जाये
कहा ऐक भक्त ने
‘यार, इस लोहे लंगर के सामान को
ज़रा दूर खड़ा किया करो
पैदल आने वालों का भी ख़्याल किया करो
ताकि हर भक्त आराम से आयेऔर जाये ‘
उनके मलिक चिल्लाने लगे
‘हमारी मेहनत की कमाई से
खरीदे गये हैं यह सामान
दुआ देंगे इनको सर्वशक्तिमान
हम पर उनकी बहुत कृपा है
इसलिये मिली यह सवारी है
तुम हो ढोंगी इसलिये
तुम्हारी दुनिया अंधियारी है
जब नहीं होती तुम पर कृपा
तो क्यों पैदल चले आये’
भक्त ने कहा
‘कृपा है तभी तो अमन और चैन से
हम जीवन बिताते है
इसलिये तो अपने पाँव पर आते हैं
मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कब्ज जैसे
रोग हम से दूर ही नजर आते हैं
उस पर है पूरा भरोसा
हमारी रखेगा हर समय
उसका भरोसा कोई पैट्रोल नहीं है
जो लोहे लंगर के सामान मे भरवाते हैं
उसकी दरबार में है सब जीव समान हैं
अपने भक्तो पर मुक्त कंठ से हाथ रखते हैं
उनका दरबार कोई दुआओं की दुकान नहीं है
जो गारंटी कार्ड लेने आये’
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