यूँ तो कई खूबसूरत महलों को खंडहर में तब्दील होते देखा है
मजबूत किलों के राजाओं को क़ैद में जिन्दगी बिताते देखा है।
इतिहास की तारीख को देखकर भी कोई अनदेखा करे
पर तारीख ने सबके कारनामे और अंजाम को देखा है।
उन लोगों को भी देखा, जमाने के लिए लगाए जिन्होंने गुलशन
जमाने ने खुद उजाडा उनको, तारीखों ने यह सब होते भी देखा है।
दिन में दिखाए कोई एक चेहरा, रात को बताये दूसरा
तारीख ने फरेबियों के नकाब को भी उतरते देखा है।
कहैं दीपक बापू जमीन पर पाँव और आसमान में दिमाग
ऐसे लोगों को जमीन पर ओंधे मुहँ गिरते तारीख ने देखा है।
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