मनुस्मृति: राजा को यमराज और पृथ्वी की तरह समान दृष्टि रखना चाहिए
Posted on 12 by दीपक भारतदीप
- राज्य प्रमुख को अपने राज्य की जनता के लिए आश्वासन रूपी पदार्थों की वर्षा ठीक उसी प्रकार करनी चाहिए, जिस प्रकार इंद्र देव चार महीने वर्षा करते हैं।
- राज्य प्रमुख को अपनी जनता से वैसे ही कर प्राप्त करना चाहिए, जिस प्रकार सूर्य आठ महीने अपनी किरणों के माध्यम से जल ग्रहण करता।
- उसे अपनी जनता की मनोवृत्ति की जानकारी उसी प्रकार रखनी चाहिए, जिस प्रकार हवा सभी जीवों में प्रविष्ट होकर घूमती है।
- अपराध करने वाले मित्रों और शत्रुओं दोनों को समान रुप से दंड देना चाहिऐ, ठीक उसी प्रकार जैसे यमराज समय आने पर प्रिय या अप्रिय सभी को ऐक समान अपना ग्रास बनाते हैं।
- राज्य प्रमुख को चाहिए कि पापियों को उसी प्रकार बंदी बनाकर रखे जिस प्रकार वरुण देव धर्म को भ्रष्ट करने वाले को अपने पाश में बाँध कर रखते हैं।
- जिस प्रकार पृथ्वी सभी प्राणियों को समान रुप से ग्रहण करती है उसी प्रकार राजा द्वारा अपनी प्रजा का समान रुप से पालन करना ‘पार्थिव व्रत’ कहलाता है।
Filed under: Blogroll, Books, Culture, Dashboard, E-patrika, Friends, Global Dashboard, Religion, arebic, bharat, blogging, bloging, education, hasya vyangy, hindi, hindi bharat, hindu, inglish, internet, media, online jurnalism, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran, web navbharat, web nayi duniya, web panjab kesari, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, धर्म, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब, मातृभाषा, समाज, हिन्दी | Tagged: राजनीति, आध्यात्म, धर्म, हिंदी, मनुस्मृति