असंतोष के सिंह तुम मांद में रहो-हास्य कविता
असंतोष के सिंह तुम मांद में रहो
तुम्हारे लिए किये इतने सारे इंतजाम
हम सुनाते हैं तुम सुनो
हम दिखाते हैं तुम देखो
पर तुम अपने होंठ सिलकर रहो
जो हम करते हैं वह सहो
टीवी पर तुम्हारे लिए किया हैं इंतजाम
करना नहीं हैं तुमको कोई काम
गीत और नृत्य देखते रहो
मनोरंजन के कार्यक्रम जंग की तरह सजाये हैं
हम जानते हैं देव-दानवों के द्वन्द्वों के
दृश्य हमेशा तुम्हारे मन को भाये हैं
घर में ही मैदान का मजा दिलाने के लिए
एसएमएस का किया है इंतजाम
सवाल कोई नहीं उठाना
हमारा उद्देश्य है कमाना
जवाब देना नहीं है हमारा काम
सब कुछ अच्छा है
यही हम सब जगह दिखा रहे हैं
खोये रहो तुम ख्वावों में
भयावह सच इसलिये छिपा रहे हैं
हम भी डरते हैं
इसलिये नकली को असली बता रहे हैं
तुम पैसा निकाल सकते हो
इसलिये सब तुम्हारे लिए सजा रहे हैं
जिनके पास नही है
उन्हें तुमसे दूर भगा रहे हैं
तुम नहीं खर्च कर सकते तो
तुम्हारा भी नहीं यहाँ काम
बेकारी, भुखमरी, भय और भ्रष्टाचार पर
चर्चा मत करो
उनसे मत डरो
उसे तुमसे दूर भगा रहे हैं
इसलिये कहीं नहीं दिखा रहे हैं
असंतोष के सिंह तुम मांद में रहो
गीत और नृत्य के कार्यक्रम देखते रहो
हम किये जा रहे अपना काम
तुम करो अपना काम
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