संत कबीर वाणी:जिसने दर्शन पा लिया वह गाता नहीं
कबीर जब हम गावते, तब जाना गुरु नाहीं
अब गुरु दिल में देखिया, गावन को कछु नाहिं
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जब तक हम गाते रहे, तब तक हम गुरु को जान ही नहीं पाए, परन्तु अब हृदय में दर्शन पा लिया, तो गाने को कुछ नहीं रहा.
भावार्थ- संत कबीरदास जी के दोहों में बहुत बड़ा महत्वपूर्ण दर्शन मिलता है. समाज में कई ऐसे लोग हैं जो किन्हीं गुरु के पास या किसी मंदिर या किसी अन्य धार्मिक स्थान पर जाते है और फिर लोगों से वहाँ के महत्त्व का दर्शन बखान करते हैं. यह उनका ढोंग होता है. इसके अलावा कई गुरु ऐसे भी हैं जो धर्म ग्रंथों का बखान कर अपने ज्ञान तो बघारते हैं पर उस पर चलना तो दूर उस सत्य के मार्ग की तरफ झांकते तक नहीं है. ऐसे लोग भक्त नहीं होते बल्कि एक गायक की तरह होते हैं. जिसने भगवान् की भक्ति हृदय में धारण कर ली है तो उसे तत्वज्ञान मिल जाता है और वह इस तरह नहीं गाता. वह तो अपनी मस्ती में मस्त रहता है किसी के सामने अपने भक्ति का बखान नहीं करता.
Filed under: Art, Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, Friends, Religion, alekh, arebic, bharat, blogging, bloging, education, hindi bharat, hindi sahity, inglish, internet, kabir, life, media, online jurnalism, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran, web navbharat, web nayi duniya, web panjab kesari, web times, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, कबीर, कला, दीपक भारतदीप, समाज, सूचना, सेवा, हिंदी, हिन्दी