ऐसा क्या हुआ है यारों
ब्लोगर अब साहित्यकारों पर बरस रहे हैं
जो रूठ्ता है अपनी बिरादरी से
ब्लोगरों की लिस्ट में नाम न देखकर
क्रुद्ध होकर बरसता है कवियों पर
वह तो वैसे ही ब्लोगरों की
नजरें इनायत हों
इसके लिए तरस रहे हैं
कोई ललकार रहा है
कि साहित्यकार कभी
ब्लोगरों से आगे नहीं निकल सकते तो
कोई इनाम के लिए ललचाता बता रहा है
यार, साहित्यकार तो खामोश हैं
बडे ब्लोगर उन पर गरज रहे है
कहै दीपक बापू
हम भी ब्लोग लिखते हैं
पर भला कभी तुमसे
सम्मान की याचना करते दिखते हैं
फिर भी गलतफहमी में मत रहना
जब हो जायेगा हद से अधिक सहना
सीधे पर पैनी होगी कवियों की भाषा
हास्य के लिए शब्दों और भाषा को
कचड़ा कर रचना नहीं लिखेंगे
हमारे सीधे तीर भी तीखे दिखेंगे
अपनी रचना साहित्यिक भाषा में ही लिखेंगे
चाहे कितनी भी हो निराशा
ब्लोग पर तुम लिखते रहो
अखबारों की कतरनों में दिखते रहो
इनाम भी चाहे जितने बटोरो
पर अब आ रहे हैं कवि
फीकी पड़ जायेगी तुम्हारी छबि
बदल रहा हैं अंतर्जाल
कुएँ के मेंढक की तरह मत रहो
कुछ जोरदार लिखो
कई नये साहित्यकार ब्लोग पर
बडे बनने वाले हैं
हम चेता रहे हैं
कोई अरज नहीं कर रहे हैं
नोट-यह एक काल्पनिक हास्य रचना है और किसी व्यक्ति या घटना से कोई लेना-देना नहीं है और किसी की कारिस्तानी से मेल खा जाये तो वही उसके लिए जिम्मेदार होगा