आ गया सुबह एक फंदेबाज और बोला
”दीपक बापू मजा नहीं आ रहा
आपकी हास्य कवितायेँ
तीन चार दिन से रस नहीं दे रही हैं
क्या आपने शराब फिर शुरू कर दी है
या किसी ने आपका सम्मान बढाया”
धोती बांधते टोपी पहनते
और गुस्से में बोले दीपक बापू
”यार, क्या समझ रखा है
यहाँ ब्लोगर हैं कितने जो
रोज सम्मान बाँटेंगे
और रेटिंग में अपने नंबर घटेंगे
तुम ही कोई ब्लोग शुरू कर दो
और हमारी रेटिंग पांच से
पौने पांच कर तो कुछ मजा आये
एकाध और भी हमारा दोस्त ब्लोगर दिखाना
ताकि हमें गुस्सा आये
अपनी मजाक पर हमें गुस्सा नहीं आता
दूसरे का हमसे सहा नहीं जाता
पर अधिक रेटिंग मत गिराना
क्योंकि आगे भी बहुत मौके और हैं
इसलिए धीरे-धीरे ही गिराना
आज तो संडे है जा रहे
दूसरे ब्लोगर के घर
वही से कुछ सामग्री ले आयेंगे
वही एक चारा है जिसे
अब हास्य में सजाएंगे
हमें तो आगे बढ़ना है तसल्ली से
पर हाँ रेटिंग घटाने के सिलसिले में
अधिक तेजी न दिखाना
इस प्रसंग को आगे भी है बढाना
बढ़ी मुश्किल से हाथ आया
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नोट-यह एक काल्पनिक हास्य कविता है और किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई लेना देना नहीं है और अगर किसी की कारिस्तानी से में मेल खा जाये तो इसके लिए वही जिम्मेदार होगा.