पत्रकारों के ब्लोग बढ़ना अंतर्जाल पर हिन्दी के लिए अच्छे संकेत-आलेख

ब्लॉग जगत में अब पत्रकार ब्लॉगर भी अब अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिए प्रतीत हो रहे हैं और मुझे लगता है की हिन्दी ब्लॉग जगत अब तेज़ी से अपने विकास पथ पर बढेगा। क्योंकि पत्रकार की जो भूमिका है वह हमेशा महत्वपूर्ण होती है और निश्चित रूप से हिन्दी ब्लोग जगत से उसको प्रचार मिलेगा.

मैने अपने जीवन की शुरुआत ही भारत के एक बड़े अख़बार समूह में फोटो कंपोजिंग ओपरेटर के रूप में की थी और तब मुझे यह आभास भी नहीं था की एक दिन मैं अपने लेख कंप्यूटर पर लिखकर इसमें खुद प्रकाशित करूँगा। उस समय विंडो नहीं था और प्रिटिंग मशीन से फिल्म निकालकर खुद धोते थे। और तब उससे प्लेट बनती थी। चूंकि मैं लेखक तो था ही इसलिए संपादकों ने मेरी रचनाएँ भी छापीं और मैं खुद भी संपादन से जुड़ा। मेरे पत्रकारिता के गुरु ही मेरे जीवन के गुरु भी हैं। मैने जिन लोगों के साथ काम किया उनमें से आज कई समाचार जगत में उच्च पदों पर हैं। कई मेरे साथ काम कर चुके लोग बड़े अख़बारों में काम करते हैं। पत्रकारों के काम और उनके अख़बारों के संगठनों की कार्यशैली का मुझे पता है और इसलिए मेरा मानना है की पत्रकार हिन्दी ब्लॉग जगत को देश में लोकप्रियता बनाने का धीरे-धीरे करते रहेंगे।

एक पत्रकार का जीवन उतना सरल और आकर्षक नहीं होता जितना आम लोग समझते हैं। उनको पल-पल वैसे ही संघर्ष करना पड़ता है जैसे कि आम आदमी करता है। चाहे कितने भी उच्च स्तर पर बैठा पत्रकार हो उसे अपना स्तर बनाए रखने के लिए नित नयी खोज और उसे प्रस्तुत करने के लिए लगातार जूझना पड़ता है। इसके अलावा उसे अपने सामाजिक दायित्व भी वैसे ही निभाने होते हैं जैसे आम आदमी को। ऐसे में कुछ पत्रकार अगर ब्लॉग लिख रहे हैं तो उनकी प्रशंसा की जाना चाहिए-ऐसे में उनसे यह अपेक्षा तो की ही जा सकती है कि वह इस विधा के प्रचार में सहायक होंगे।

अभी हिन्दी ब्लॉग जगत शैशवास्था में ही और पत्रकारिता के पेशे से जुड़े ब्लॉगरों की इसमें जो भूमिका बन सकती है वह यह कि वह समाचारों का यहाँ भी प्रकाशन करें। सभी समाचारों का प्रकाशन तो यहाँ संभव नहीं पर जो उन्हें लगता है की ब्लॉग लिखने वाले अन्य ब्लॉगरों को उसकी जानकारी होने के साथ उस पर अपनी राय लिखने का अवसर भी प्राप्त होगा,ज़रूर यहाँ रखें। इसके अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि अगर उनको लगता है की किसी ब्लॉग पर कोई ऐसी चर्चा है जो बाहर होना ज़रूरी है उसे लेकर अपने पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित करें। हालाँकि उनका पूरा समय अपने काम में निकल जाता है और उनसे ऐसा कहना अन्याय लगता है पर मैं जानता हूँ की आगे कुछ पत्रकार ब्लॉगर अवसर मिलने पर यही करने वाले हैं। इन ब्लॉग पर जो लिखने वाले हैं उनमें से कई ऐसे लेखक भी हैं जिन्होने पत्र-पत्रिकाओं में डाक खर्च कर अपनी रचनाएँ भेजीं पर उनको स्थान नहीं मिल तो यहाँ आ गये। ऐसे लेखकों के लिए वह हो सकता है वरदान सिद्ध हों। पत्रकारों से उनके यहाँ संपर्क होंगे तो सभी को इसका लाभ मिल सकता है.

अपने दफ़्तरों में काम करते हुए पत्रकारों पर तमाम दबाव होने के साथ सीमाएँ भी होतीं हैं और ब्लॉग पर वह लिखते हुए स्वतंत्र अनुभव करेंगे और ऐसे में हमें उनके ऐसे लिखे भी पढ़ने को मिलेंगे जो वह खुद छाप नहीं पाते, और ऐसे में वह ब्लॉग जगत को एक ऐसा प्रचार रुचिपूर्ण माध्यम भी बना सकते हैं। इतना ही नहीं अपने ब्लॉग जगत के ब्लॉगरों को कभी परेशानियों से उबारने का काम भी वह करेंगे, इसमें संशय नहीं है.

मैं बहुत समय से कुछ पत्रकारों के ब्लॉग देख रहा हूँ। मेरी पिछले दिनों ब्लोग लेखक श्री सुरेश चिपलूनकर जी से ग्वालियर में भेंट हुई थी तब उन्होने बताया था की कुछ ब्लॉग तो पत्रकारों द्वारा भी लिखे जा रहे हैं। उन्होने कुछ नाम बताये तो मैंने उन लोगों के ब्लॉग ध्यान से देखे तो वाकई उनका उत्साहवर्द्धक लेखन प्रभावित करने वाला था। ब्लॉग लिखने में कोई कम मेहनत नहीं होती और ऐसे में अपने कार्यों से निपटकर यह काम करना कभी-कभी थका देता है। पत्रकारों का तो काम और भी अधिक है क्योंकि उन्हें किसी अन्य आदमी की अपेक्षा घर-बाहर अधिक सतर्क और जागरूक रहना पड़ता है ताकि वह अपने पत्र-पत्रिकाओं के लिए सामग्री जुटा सकें। उनको पूरे हिन्दी ब्लॉग जगत को एकदम समझना कठिन है पर जब समय के साथ वह जैसे-जैसे इस पर सक्रियता बढ़ाएँगे तब और अधिक मह्त्व्पूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। ऐसा मेरा विश्वास है।
कहीं पत्रकार शब्द सुन या पढ़कर मुझे अपने पुराने दिन याद आते हैं. आज भी जब स्थानीय अखबारों के दफ्तर जाता हूँ तो अपने मित्रों को उच्च पद पर बैठा देखकर खुशी होती है.हालांकि में निजी जीवन में अब पत्रकार नहीं हूँ पुराने लोग आज भी मुझसे मिलते हैं और रचनाएं प्रकाशन के लिए मांगते हैं, अंतरजाल पर लिखने से पूर्व अन्य व्यस्तताओं की वजह से मैं अब वहाँ लिख नहीं पाता था और अब अंतर्जाल पर लिखने की वजह से अपने कागजों पर लिखता हूँ पर अखबारों में भेज नहीं पाता पर पुराने मित्र आज भी मुझसे निभाते है एक अच्छे दोस्त की तरह.

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