रहीम के दोहे:सम्मान से जो मिले वही उचित
मांगे मुकरि न को गयो, केहि न त्यागियो साथ
मांगत आगे सुख लह्मो, ते रहीम रघुनाथ
कविवर रहीम कहते हैं कि याचक बनकर जाने से सब मुकर जाते हैं और पुराने संबंध भी तोड़ जाते है। ऐसे अगर मांगना हो तो केवल अपने प्रभु राम से ही मांगो इसी में आनंद की प्राप्ति होती है।
मान सहित विष खाय के संभु भय जगदीस
बिना मान अमृत पिये। राहु कटायो सीस
कविवर रहीम कहते हैं कि सम्मान की साथ शिव जी ने विष पीया तो भगवतस्वरूप हो गए और राहु ने बिना सम्मान के अमृत पीया तो सीस कट गया। इसलिए अगर कोई चीज सम्मान से मिलती है तो ठीक नहीं तो उसकी इच्छा ही नहीं करना चाहिऐ।
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