अंतर्जाल पर लिखने वाले एक
कविनुमा ब्लोगर को भी
आयोजकों ने कविसम्मेलन में बुलाया
जब वह भी पहुंचा मंच पर तो
कवियों को बहुत गुस्सा आया
एक बोला
”इसे उतारों यहाँ से
यह यहाँ क्यों आया
यह जमीनी कवियों का सम्मेलन में
अंतर्जाल पर लिखने वाला क्यों बुलाया”
आयोजक ने कहा
”अब साहित्य अंतर्जाल पर छा जायेगा
आप लोगों की रचनाएं यही वहाँ पहुंचा पाएगा
एक-दो कविता सुना लेने दो
कौन लोग याद रखेंगे
अखबारों में कल कवियों के रूप में
आप के ही नाम छपेंगे
बाद में यह हमारे कार्यक्रम की
खबर अपने ब्लोग पर लिखेगा
इसका नाम तो है छद्म और वह भी
ऐसी जगह पर जहाँ कोई नहीं पढेगा
इसके लेख में हमारा नाम ही दिखेगा
इसलिए इसे बुलवाया”
सुनकर ब्लोगर को गुस्सा आया
और चिल्लाकर बोला-
”इतना सस्ता समझ लिया है
एक कविता सुनाने के लिए यह सब
कैसे कर जाऊंगा
अरे, मैं तो लिखता हूँ वहाँ रोज नया
यह एक कविता लिखते हैं
उसे कई-कई बार अनेक जगह पर
सुनाते दिखते हैं
जब अंतर्जाल पर साहित्य छा जायेगा
तब मेरा नाम भी आएगा
नहीं छपेगी किताब मेरी तो क्या
मेरा लिखा आसमान में तो लहरायेगा
वैसे भी मैं यहाँ सुनाने नहीं सुनने आया
पर लगता है की अभी इनको कोई इल्म नही है
अंतर्जाल ने अपनी रचनाएं छपने के लिए
दूसरों के आगे झुकने से बचाया
दूसरी जगह जाकर भीड़ में
जाकर शब्दों का मेले लगाने से हटाया
कभी-कभी होते हैं साहित्य और कवि सम्मेलन
नारद, ब्लोगवाणी, चिट्ठाजगत और हिन्दी ब्लोग्स ने
हमें रोज साहित्यकारों से मिलने का मौका दिलाया
अब मैं जाता हूँ क्योंकि उससे कीमती वक्त
निकालकर यहाँ किसी तरह आया.”
नोट-यह हास्य कविता काल्पनिक है और किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है और अगर किसी से मेल खा जाये तो उसके लिए वही जिम्मेदार होगा.
One Comment
बन्धुवर… आप तो छा गए…..
आपकी यह कविता दिल को छो गई।…
हम सभी की कहानी को आपने शब्द दिए..इतना सुन्दर रूप दिया ….इस सब के लिए बहुत बहुत धन्यवाद….