जब आम पाठक ही तय करेंगे अपनी पसंद

इस दुनिया में लेखन एक ऐसा कार्य है जिसमें किसी गुरु की आवश्यकता नहीं होती और यह बिना पैसे का सम्मान दिलवाता है। मैं भी लिखता हूँ इसलिए अंतर्जाल हो या निजी जीवन उसमें अगर कुछ प्रशंसक हों तो आश्चर्य की बात नहीं है। आजकल अंतर्जाल के बाहर कुछ नहीं लिख रहा तो कुछ निजी प्रशंसक रोज टोकते हैं कि वहाँ लिखो तब हो सकता है कि अंतर्जाल पर भी कुछ लोग हों जो बार-बार प्रेरित करने के लिए नाम बदलकर पुरानी पोस्टों पर कमेन्ट लिखते हुए तारीफों के पुल बाँध देते हैं। उनका लिखा गया कमेन्ट ब्लोगरों की कमेन्ट से अलग होता है और चूंकि यहाँ तमाम तरह के ऐसे प्रयास हो सकते हैं जिनका परीक्षण करना मुश्किल है कि वह वास्तव में आम पाठक हैं या कोई मित्र ब्लोगर हैं।
यह भी संभव है कि अंतर्जाल पर मैं हिन्दी में कुछ भी लिखता रहूँ उसके लिए कुछ लोग-हो सकता है वह कहीं नौकरी करते हों जहाँ नियोक्ता की तरफ से अपने संभावित आर्थिक लाभ के लिए अन्य कामों साथ ब्लोगरों को प्रोत्साहित करने का काम भी उनको सौंपा गया हों- सक्रिय हों और मेरे साथ अन्य लोगों को भी सन्देश भेजते हों। अगर मैं बिलकुल निराशाजनक स्थिति की कल्पना करू तो यही लगता है-और यह कल्पना ही है।

अगर ऐसा नहीं है और उनमें वास्तविकता है तो मानना पडेगा कि हिन्दी ब्लोग जगत अब दिलचस्प दौर में पहुँचने वाला है और देश के करोडों हिन्दी भाषी ही- जिनके पास इंटरनेट कनेक्शन हैं- अब यह तय कर सकते हैं कि कौन अंतर्जाल पर उनके पसंदीदा ब्लोग लेखक है। आम पाठक अब हिन्दी की तरफ बढ़ रहा है। अगर कोई व्यवासायिक रूप से हमें गुमराह नहीं कर रहा हो तो गूगल से हिन्दी के शब्दों से भी तलाश हो रही है। हिन्दी साहित्य की हर विधा के शब्द-हिन्दी कविता, कहानी, हास्य व्यंग्य, आध्यात्म, रहीम, कबीर, चाणक्य, मनु स्मृति, विदुर नीति तथा अन्य अनेक शब्दों के रास्ते अपने सब ब्लोगों पर आम पाठकों को आते देखता हूँ। इसके अलावा असंख्य शब्द और भी हैं। इनको अंग्रेजी शब्दों से भी ढूंढते हैं। कभी कभी कुछ धार्मिक प्रुवृति के लोग भी तारीफ़ कर जाते है तो कुछ अपने नाम के आगे संत की पहचान वाले स्थापित कर आशीर्वाद दे जाते हैं।

मैं यह सब देख रहा हूँ और जैसा कि पहले ही लिखा है कि संशय मेरे मन में रहता है, पर अगर उससे दूर हट कर देखता हूँ तो सोचता हूँ कि अब अच्छा लिखना शुरू करूं। व्यंग्य, कहानी और चिंतन लिखना शुरू करूं फिर बात वहीं आकर अटकती हैं कि इतनी मेहनत करने के बाद भी क्या मैं यह देख पाऊंगा कि आम पाठक उसे पढ़ रहा है कि नहीं।हर आम पाठक कमेन्ट नहीं लिख सकता और क्या वाकई वह हममें दिलचस्पी ले रहा है इसको समझ पाना मुशिकल है। इसके बावजूद मैंने अपने सभी निज-पत्रक(ब्लोग) दिखाने वाले फोरमों और वेब साईटों की हिट्स की परवाह किये बिना कई पोस्ट लिखीं हैं। मैंने फोरमों से अलग ब्लोगों पर भी अपनी पोस्टों पर लोग आते देखे हैं। एक संशय होता है कि क्या वह ब्लोग वाकई लोग देख रहे हैं। बीच-बीच में उन पर पोस्ट डाल देता हूँ और भुला देता पर जब उन पर व्युज देखता हूँ कि वह कोई कम नहीं होते। चौपालों और वेबसाईटों पर त्वरित पाठक मिलने से ध्यान बँटा रहता है इसलिए आम पाठक की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। चौपालों से अलग ब्लोग पर लोग आते हैं पर कब पता नहीं चलता। इसमें नीरसता का बोध होता है जबकि चौपालों पर मित्रों के ब्लोग पढ़ते हुए, उन पर कमेन्ट देते हुए और दूसरों को हिट और अपने को फ्लॉप देखने में जो आनंद आता है वह अवर्णनीय हैं पर इसके बावजूद नारद, ब्लोग वाणी, चिट्ठा जगत, और हिन्दी ब्लोग पर हम सब ब्लोगर किसी भी पोस्ट के निर्णायक नहीं है इस सत्य को स्वीकार कर लेना चाहिए। कल मैंने जो पोस्ट डाली थी उस पर कल और आज कुल ४२ हिट्स हैं, और उस ब्लोग पर दोनों दिन मिलाकर १३७ व्युज हैं-मतलब चौपालों से बाहर ९५ व्युज और भी हैं।

कहने का तात्पर्य यह है कि इन चौपालों का उपयोग केवल हम लोगों के आपसी मिलन के लिए है और यहाँ हिट्स और पसंद के चक्कर में पड़ने की बजाय करोडों हिन्दी भाषी पाठकों को लक्ष्य कर लिखने वाले ही स्थाई हिट्स ले सकते हैं। चौपाल पर कितने हिट्स मिल सकते हैं? शायद ही किसी को सौ से अधिक मिल सकते हैं और इतने बडे देश में उसके क्या मायने हो सकते हैं। बात तो तब बनेगी जब रेल, बस, हवाई जहाज और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चर्चा हो कि देखो हम अमुक ब्लोगर को पढ़ते हैं या अमुक ब्लोगर की वह पोस्ट अच्छी थी। कुछ ऐसे ब्लोगर मैंने देखें हैं जो आगे चलकर वाकई नाम करेंगे। इसलिए लिखो तो आम लोगों के पढ़ने के लिए लिखो। कविता, कहानी, व्यंग्य, और उपन्यास लिखो। एक बात जो इस माध्यम में होगी, वह यह कि लिखना छोटा ही है और न पूरा हो तो अगले दिन के लिए रख लो। जरूरी नहीं है कि एक दिन में सब पूरा हो। यहाँ पसंद और हिट का खेल तो चलता रहेगा इसे देखो और मजे लो इसलिए मैं कभी भी किसी भी फोरम द्वारा व्युज और हिट्स दिखाने का विरोध नहीं करता। मैं जब इन फोरमों पर आता हूँ तो कभी भी अपने हिट्स पर ध्यान ही नहीं देता बल्कि दूसरों के हिट्स देखकर खुश होता हूँ। मैं और मेरी पोस्ट अपनी स्थिति के अनुसार फ्लॉप हैं पर इन चौपालों से बाहर के खेल पर मेरी नजर रहती है और देखना है कि आगे क्या होता है? (क्रमश :)

One Response to “जब आम पाठक ही तय करेंगे अपनी पसंद”

  1. दीपक जी,आप पाठको की चिन्ता ना करें। आप जो आज लिख रहे हैं वह बरसों तक पढा जाता रहेगा।हिन्दी में लिखने से आनें वाले स मय में हिन्दी पाठकों को पढनें को बहुत कुछ मिल सकेगा।

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