पिछले वर्ष होली पर लिखा अब पढें

पिछले वर्ष की होली पर मैं अपने ब्लोग बनाने से जूझ रहा था. उस समय मैंने सदा हिन्दी फॉण्ट में अपनी रचनाएं लिखी थीं और मान लिया था कि सब हो गया ठीक. उस समय नारद से न तो संपर्क था और न इरादा था कि वहाँ जाएं. बाद मैं अपनी कुछ पोस्ट यूनीकोड में लिखीं और वर्डप्रेस के डेशबोर्ड पर हिन्दी में दिखलाने के लिए इसका शीर्षक और पहला पैराग्राफ यूनीकोड में लिखता था ताकि वह हिन्दी में दिख सके और आगे तो लोग मेरी तरह इसे पढ़ लेंगे यह मान लिया. बाद में जब नारद पर आये तो लोगों ने कहा कि इन पोस्टों का इलाज करो, पर अब मैं इन्हें यूनीकोड पर लिख नहीं सकता. इसलिए अवसर आने पर इनको प्रस्तुत करूंगा क्योंकि उनके शीर्षक देखकर लोग काफी प्रभावित थे और पढ़ना चाहते थे.
(यह इसी ब्लोग पर २४ मार्च २००७ को लिख था)
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