वर्डप्रेस के डेशबोर्ड की अब नये ढंग से प्रस्तुति-आलेख
वर्डप्रेस के ब्लाग का डेशबोर्ड अब नई और आकर्षक साजसज्जा के साथ प्रस्तुत हुआ है। इस समय हिंदी के अधिकतर ब्लागर ब्लागस्पाट और वर्डप्रेस पर ही लिखते हैं। वर्डप्रेस के ब्लाग की थीम से अधिक आकर्षक तथा विज्ञापन की सुविधा होने के कारण अधिकतर ब्लागर ब्लागस्पाट पर लिखते हैं। एक वर्ष पूर्व तक अनेक प्रसिद्ध ब्लागर वर्डप्रेस के ब्लाग छोड़कर ब्लागस्पाट पर पहुंच गये। मेरे तो कुछ समझ में ही नही आ रहा था क्योंकि उस समय तक मेरा कोई भी ब्लाग नारद पर नहीं था इसलिये दोनो पर बराबर लिखता रहा।
ब्लागस्पाट के विज्ञापन पहले लगाये फिर हटाये और पुनः यह सोचकर कि देखें कुछ फायदा होता है उनका जोड दिया। इधर विज्ञापन डाले तो उधर कुछ वरिष्ठ ब्लागरों की गूगल के विज्ञापन खाते के संबंध मेंं निराशजनक जानकारी भी पढ़ी। तब मैने सोचा कि फिलहाल उन्हें बना रहने दो। असली बात यह है कि हिंदी के सामान्य ब्लागर के पास इस समय केवल उसी से ही आय का आसरा हो सकता है शायद इसलिये अनेक लोग उससे जुड़े।
इसके बावजूद कई एसे ब्लागर है जिनका वर्डप्रेस से मोह खत्म नहीं हुआ। इसके कुछ कारण हैं। ब्लागस्पाट में किसी भी पोस्ट पर लेबल के रूप में अंग्रेजी के 200 वर्ण से अधिक नहीं लिख सकते और अगर हिंदी में कुछ लेबल लगायें तो वह फिर अधिक से अधिक अंग्रेजी वर्ण होने के कारण वह सीमित संख्या में ही लग पाते हैं। वर्डप्रेस में इसकी कोई सीमा नहीं है। वहां चाहे जितनी श्रेणियां और टैग लगाये जा सकते हैं। इससे कोई भी पोस्ट अधिक से अधिक शब्दों के साथ सर्च इंजिन में आ जाती है। हालांकि यह अधिक महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि ब्लागस्पाट के शीर्षक भी सर्च इंजिन में आ जाते हैं पर अंग्रेजी में अधिक शब्दों के साथ उन्हें पकड़ा जा सकता है। यह बात सही है कि हम हिंदी में लिख रहे हैं पर देश के आम पाठक के दिमाग में अभी अंग्रेजी शब्दों से सर्च इंजिन में ढूंढने की प्रवृत्ति है और इसलिये वर्डप्रेस पर उनका इस्तेमाल व्यापक रूप से किया जा सकता है। इस कारण वहां पर पाठक अधिक आते दिखते हैं। मैं अंतर्जाल पर कोई दावा पक्के ढंग से नहीं करता क्योंकि हो सकता है कि मेरे से समझने में कहीं चूक हो रही हो इसकी संभावना को हमेशा मानता हूं। वर्डप्रैस पर पाठकों की लगातार आमद देख कर एक विश्वास बना रहता है कि आगे इनकी संख्या बढ़ सकती है। कई बार तो ऐसा होता है कि पोस्ट न लिखने के बावजूद भी डेशबोर्ड ब्लाग रेटिंग में ऊपर बना रहता है। इसलिये वहां लिखने वालों का मन लगा रहता है। यही कारण है कि वर्डप्रैस पर लिखने वाले कभी निराशाजनक बातें करते हुए नहीं दिखते। ब्लागस्पाट के ब्लाग पर भी पाठक आते दिखते हैं पर उनकी संख्या वहां के मुकाबले बहुत कम है और अगर पोस्ट न लिखने पा फोरमों से पाठक नहीं मिल पाते तब एक निराशा घर कर जाती है। यही कारण है कि ब्लागस्पाट के ब्लागर कभी-कभी निराशाजनक बातें कर जाते हैं।
वर्डप्रेस ने आज मेरे ब्लाग पर ही तमाम तरह के नवीन दृश्य रखना शुरू कर दिये। सबसे अधिक हिट और सक्रिय पोस्ट के पाठकों की संख्या के साथ पाठकों की संख्या का विवरण भी दिखाना शुरू कर दिया और अब उसके लिये अब कहीं नहीं जाना। कमेंट भी अब सामने पढ़ी जा सकतीं है। पहले कमेंट पढ़ने के लिये उसके कमेंट कालम को क्लिक करना पड़ता था और शायद इसलिये कई ब्लागर उसे अपने पास रखे हुए थे। जिन लोगों ने माडरेशन का अधिकार नहीं रखा उनका तो देखना पड़ता था कि कोई कमेंट तो नहीं आया।
अब डेशबोर्ड आकर्षक और अधिक जानकारी प्रदान करने वाला हो गया है। इधर कुछ नये ब्लागर भी वहां अच्छा और जोरदार लिखने वाले आ गये हैं। कुछ पुराने और जोरदार ब्लागर अभी भी वहंा लिख रहे हैं। हम वर्डप्रैस के ब्लागर एक दूसरे को फोरमों पर ही पढ़ लेते हैं। सच तो यह है कि ब्लागस्पाट पर जब कोई पोस्ट रखता हूं तो मुझे ऐसा लगता है कि वह पाठकों की सीमित संख्या में पढ़ी जायेगी। बीच में वर्डप्रैस के ब्लाग और गूगल के विज्ञापन खाते को जोड़कर ब्लोग इन काम के बनाये ब्लोग की चर्चा मैंने की थी पर उस पर लिखने का विचार अभी तक नहीं बन पाया क्योंकि उसका खाता जब ब्लागस्पाट से ब्लाग पर ही अधिक उपयोगी नहीं है तो फिर दूसरी जगह कैसे रहेगा? ऐसे में ख्वामख्वाह में बदनामी लेते फिरो कि पैसे के लिये लिख रहा है।
बहरहाल वर्डप्रैस भी जिस तरह नित बदलाव कर रहा है उससे लग रहा है कि हो सकता है कि वह आगे कोई विज्ञापन का भी इंतजाम करे। आज ही मैंने एक ब्लाग में पढ़ा तो उससे पता लगा कि उन्हीं विज्ञापनों में फायदा है जो आनलाइन खरीददारी के लिये उपयोगी हों। इसका मतलब यह है कि अभी कुछ समय लगेगा। बहरहाल वर्डप्रैस वालों को इन नवीन परिवर्तनों के लिये बधाई। इस पर मिलने वाली दिलचस्प जानकारी है इसमें कोई संदेह नहीं है।
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अपन भी वर्डप्रेस.कॉम के ही दीवाने हैं, परन्तु एकाद कमियों के चलते महफिल और तकनीकी दस्तक को ब्लॉगर पर ले जाना पड़ा।
पहली कमी तो यह कि गाने नहीं बजाये जा सकते और दूसरी यह की HTML कोड उतनी आसानी से नहीं बता सकते जितनी की ब्लॉगर में।
बाकी वर्डप्रेस.कॉम का जवाब नहीं।
हाँ और वाकई नया रंग रूप तो बहुत बढ़िया लगा।
सागरचंद जी
आपने गानों की बात की तो मैं आपको बता दूं कि इस समय मेरे पीछे ही ऍफ़ एम चल रहा है।मैं अक्सर गाने सुनते ही लिखता हूँ। यहाँ ब्लोग पर सिर्फ शब्द पढ़ने और लिखने में ही मजा है। लोगों के पास अनेक साधन है और वह कभी हमारे ब्लोग पर इनके लिए नहीं आते। आपका लिखा ही मुझे भाता है। आप और उन्मुक्त वह दो लोग हैं जो मेरे लिखे को न पढ़ पाने के कारण ही मुझे यूनीकोड में लिखने के लिए प्रेरित किया था। मुझे आप दोनों ही लेखक के रूप में पसंद हैं। इसलिए अगर वर्डप्रेस पर गाने सुनने की सुविधा नहीं है तो कोई बात नहीं है। गानों से ब्लोगरों में तो वाह-वाह मिल जाती हैं पर आम पाठक के लिए उसका कोई मतलबनहीं हैं। आप लिखते हैं तो उससे मैं सीखता हूँ और कोई भी बात कहते हुए मुझे संकोच नहीं होता।
दीपक भारतदीप