फिल्मों में ही होता है चक दे इंडिया
सच में तो सब जगह है
एक ही नारा गूंजता है भग दे इंडिया
फिल्म में हाकी की काल्पनिका कहानी ने
देश में खूब नाम कमाया
ओलम्पिक से हाकी टीम का
‘नो एंट्री’ संदेश आया
कहें दीपक बापू
‘फिल्मों में नकली हीरो और
नकली कहानी पर फिदा होकर लोग
उसी राह पर चल रहे हैं
ख्वाबों ही देख रहे हैं तरक्की की सपना
पर सबका कर्म और भाग्य होता अपना
आखें से देखते नजर आते हैं
पर देख कहां पाते हैं
कानों से सुनते तो दिखते
पर कितना सुन पाते हैं
अपनी अक्ल रख दी है
नकली ख्वाबों की अलमारी में बंद
गुलामों की तरह दूसरे के
इशारे पर चले जाते हैं
पर्दे पर देखते जो जिंदगी
उसे ही सच करने के कोशिश में
बुझा देते हैं अपनी जिंदगी का दिया
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One Comment
उम्दा
निहित sarcasm दिल को छू गया