आखिर उसने इस ब्लाग के पूर्व पाठ की कापी क्यों नहीं की-आलेख


उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आक्षेप किया गया था। इसका मतलब साफ है कि वह एक सक्रिय ब्लाग लेखक है। उसने मेरे पाठ की कापी अपने ब्लाग पर रखकर एक तरह से अपराधिक कृत्य किया है। वह शायद अनुमान नहीं कर सकता कि मैं उसे ढूंढ लूंगा। उसे कोई अधिकार नहीं है कि मुझे पैसे का भुगतान किये बिना अपनी वेबसाईट पर मेरे पाठ रखे।

उसने मेरे कल तीन ऐसे ब्लाग की पोस्टें कापी कीं जो हिंदी के ब्लाग एक जगह दिखाये जाने वाले फोरमों नारद, चिट्ठाजगत और हिंदी ब्लाग पर ही दिखते हैं ब्लागवाणी पर नहीं। इनके नाम हैं साहित्य पत्रिका, अभिव्यक्ति पत्रिका, और अनुभूति पत्रिका। इन तीनों के नाम मैं अक्सर बदलता रहता हूं और कल ही इनका यह नाम रखा था, पर वह इनसे पहले से ही पाठ उठा रहा है। इन पर मैं कभी कभी अपनी पुराने पाठ रखता हूं। जो 12 ब्लाग सभी फोरमों पर दिखते हैं उन पर अपनी नये पाठ रखता हूं। कल के व्यूज देखने से पता चलता है कि उसने नारद और चिट्ठाजगत से ही यह ब्लाग देखे हैं। वह इन्हीं फोरमों से यह कापी करता होगा क्योंकि ब्लागवाणी से उसे पकड़े जाने का भय भी है। ब्लागवाणी पर पसंद का बटन किसी भी कंप्यूटर से एक बार ही दबता है और यह संदेह पैदा करता है कि कहीं वहां उसकी पकड़ न हो। नारद और चिट्ठाजगत से उसे ऐसा भय नहीं है। मतलब वह पुराना आदमी है और यहां से पूरी तरह जानकार है।

सवाल यह है कि उसने विनय प्रजापति ‘नजर’ और मेरे ब्लाग से ही कापी इस क्यों की? इसका उत्तर यह है उसमें साहित्य जैसे विषय होते हैं जो कि आम पाठक के लिये एक अच्छी सामग्री होती है। उसका यह ब्लाग किसी फोरम पर नहीं है। उसने डोमेन लिया है और वह पैसे कमाना चाहता है। वह यहां भी सक्रिय है एक सभ्य ब्लागर के रूप में। उसकी कार्यशैली को मैं जानता हूं उसे इस पाठ के माध्यम से यही समझा रहा हूं।
इससे साहित्यक ब्लाग लेखक हताश होंगे। डोमेन के पैसे का भुगतान तो लोग कर रहे हैं पर हमारे पाठों को वह फ्री का माल नहीं समझ सकते। यह अपने ब्लाग लेखकों और मित्रों को बता दूं यहां डोमेन होना या फ्री ब्लाग होना कोई मायने नहीं रखता। यहां महत्व है लिखे गये विषय का! चुराने वाले तो वेब साइट से भी चुरा सकते हैं और ब्लाग से भी! वह मुझसे चिढ़ा हुआ है और फायदा भी उठाना चाहता है। उसने पेैसे खर्च कर डौमेन तो ले लिया पर लिखे क्या? ताउम्र छलकपट में निकाल दी। लिखने के लिये सरल हृदय होना आवश्यक है। उसने ब्लाग बनाया पर लिखता क्या होगा? उसने विनय प्रजापति ‘नजर’, अचेत, रेवा स्मृति तथा मेरे साहित्यक पाठों की कापी अपने यहां रखी क्योंकि वह ऐसा नहीं लिख सकता।
वह अपने कमाने के लिये मेरा मुफ्त में उपयोग नहीं कर सकता है। मेरे एक पाठ की कीमत है 2500 रु.। उसे अधिक लग सकती है। वह कह सकता है कि यह तो फालतू पड़ी थी। नहीं, उसे यह बात समझनी होगी कि शोरुम में सोने के अनेक कीमती गहने पड़े रहते हैंं पर उससे उनकी कीमत कम नहीं हो जाती। मेरे उसने ढाई लाख रुपये से अधिक के पाठों की कापी की है और उसका भुगतान वह कर नहीं सकता। अगर कोई उस ब्लाग को देखेगा तो कहेगा कि यह तो दीपक भारतदीप का ब्लाग है। वह मेरे नाम को भी भुनाना चाहता है। भले ही फोरमों पर मुझे उस जैसे हिट नहीं मिलते पर आम पाठक की पहुंच मेरे ब्लाग पर बढ़ती जा रही है इसलिये वह मेरे नाम को भी लिख रहा है। यह उसकी चाल है। वह कथित रूप से इन फोरमों पर हिट ब्लागर ही हो सकता है। वह तकनीकी ब्लागर नहीं हैं पर प्रयोक्ता के रूप में वह इसका उपयोग अच्छी तरह जानता है।

उसकी सक्रियता का प्रमाण यह है कि कल उसने मेरे पाठ को अपने कापी कर अपने यहां चिपकाने का काम नहीं किया। आज मेरे कमेंट को माडरेट नहीं कर रहा है। शायद वह अपने उस ईमेल को भी नहीं खोलता होगा जिससे यह ब्लाग संबंद्ध है। वह देख चुका है कि इस पर बवाल मच रहा है। मैंने तकनीकी मित्रों से सलाह की है उनका कहना है कि उसे ढूंढना कोई मुश्किल काम नहीं है। मैं गुस्से में हूं पर अपना विवेक कभी नहीं खोता। यहां अनेक ब्लाग लेखकों ने मुझे कभी न कभी सहयोग और प्रेरणा दी है इसलिये नहीं चाहता कि किसी को इतना मानसिक अधिक आघात पहुंचा दूं कि फिर मुझे पैर वापस खींचने का अवसर ही न रहे। यहां अनेक ब्लाग लेखक है, और पिछले पौने दो वर्षों से अनेक ब्लाग लेखकों से मेरी मित्रता है और करीब करीब सभी सहृदय हैं। कई तो बहुत भोले हैं और मुझे उनके किसी की चाल में फंसने पर दुःख होता है। जिस ब्लाग लेखक पर संदेह है उसे पता नहीं क्यों मैं शुरू से संशय से देखता आया हूं। वह सक्रिय ब्लाग लेखकों है पर उसने टिप्पणी अधिक से अधिक तीन बार दी होगी और उसके प्रिय विषय देखकर मुझे यह समझते देर नहीं लगती कि बेकार की बातें भी कर सकता है।

किसी भी ब्लाग लेखक का पाठ कापी कर अपने ब्लाग पर रखना अपराधिक कृत्य है। इसके लिये उसकी पूर्व अनुमति आवश्यक है।
दीपक भारतदीप, लेखक और संपादक

आज मैं राजीव तनेजा जी की शिकायत पर उस ब्लाग पर गया जहां उनकी कहानी कापी कर रखी गयी थी। उसका भी मैंने विश्लेषण किया तो लगा कि अधिक से अधिक दो लोग ही ऐसे हैं जो ऐसा काम कर रहे हैं। उस पर जो देखकर आया उसे पर आगे लिखूंगा। हां, इतना तय है कि यह ब्लाग पर साहित्य लिखने वाले ब्लाग लेखकों को हतोत्साहित करने वाला कदम है। वैसे अगर नारद और चिट्ठा जगत के पास ऐसा कोई साफ्टवेयर हो कि पता चले कि कल मेरे इन तीन ब्लाग को किस ईमेल से देखा गया तो पता चला सकता है कि वह कौन है क्योंकि कुछ लोगों के पास ऐसे साफ्टवेयर हैं जिससे ईमेल से फोन नंबर पता किया जा सकता है-ऐसा । कल मेरे ब्लाग पर वहां से दो-दो व्यूज आये उनमें एक तो सहृदय ब्लाग लेखक अपनी टिप्पणी दे गये। इसका मतलब दूसरा देखने वाला ही संदेह के घेरे में हो सकता है। अधिक व्यूज होते तो मैं नहीं कहता। वैसे एक बात और है कि वर्डप्रेस के ब्लाग कम व्यूज ही बताते हैं इसलिये मैं इस पर दावे से कुछ नहीं कह सकता कि अन्य व्यूज नहीं होंगे। मै ऐसे ही किसी का नाम नहीं लूंगा जब तक मुझे कोई प्रमाण नहीं मिलेगा। बाकी अभी मैं उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं उसे रोकना तो होगा ही नहीं तो यहां मौलिक लेखक करना बेकार ही लगने लगेगा।

लेख प्रकाशित करने के चिट्ठकार समूह की चर्चा देखी तो पता चला कि आई डी तो ढूंढ निकाला है। नाम कुछ अंग्रेजी में है पर इससे क्या? वह हिंदी जानता है या कोई ऐसा उसका सहायक है। उसने कल मेरी पाठ की कापी नहीं की इसका आशय यह है कि उसका मतलब वह समझ गया है। वैसे जिस ब्लाग लेखक पर मेरा संदेह है वह न हो तो अच्छा ही है। कम से कम मुझे इस बात की प्रसन्नता होगी कि कि हमारे अपने लोगों पर कभी कोई ऐसा आक्षेप नहीं करेगा।

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