इसे ब्लाग के पाठ की चोरी कहें या चालाकी-आलेख

आज एक वरिष्ठ ब्लाग लेखक ने चिट्ठाकार समूह की चर्चा के सूचित किया कि एक ब्लाग चोर और नजर आया है। ऐसी चर्चाएं पहले भी होती रही हैं और जो मेरे सामने आया है उसे मैंने जाकर देखा है। आज जब देखने गया तो पता लगा कि मेरे ही ब्लाग से पाठ उठाकर वहां रखे गये हैं।
अब सवाल यह है कि इसे चोरी कहें या चालाकी! मेरे साथ विनय प्रजापति ‘नजर’ तथा एक अन्य ब्लाग लेखक के भी पाठ वहां रखे गये थे। यह बात इसलिये पता लगती है कि उसमें posted by से पता लग रहा था कि किसका ब्लाग है। विनय प्रजापति ‘नजर’ तो हर पोस्ट के नीचे अपना नाम रख देते हैं और आजकल मैं भी अपने पाठों के नीचे अपना नाम लिख देता हूं। इस तरह वहां मेरा नाम तो दिख रहा पर तारीखों की सैंटिंग इस तरह की गयी है कि posted by के बाद नाम पूरा नहीं दिखाई देता पर पाठों की कापी बड़ी चालाकी से की गयी है कि अगर कोई दावा करे तो कहा जायेगा कि हमने तो केवल कापी उठाई है और ऐसा तो बहुत लोग कर रहे हैं। वैसे इस संबंध में कानून है कि आप किसी से पूछे बगैर किसी का पाठ इस तरह कापी कर नहीं ले जा सकते पर संभवतः अगर ‘साभार’ कहकर उठाया जाता है तो उस पर कार्यवाही नहीं की जा सकती। फिर उस ब्लाग पर हमारा नाम है मतलब चोरी कहना कठिन होगा और उसकी शिकायत करने पर सकारात्मक परिणाम मिलेगा या नहीं यह अनुमान भी नहीं किया जा सकता है। यह अलग बात है कि नाम चालाकी तारीखों के पीछे छिपाये गये हैं।
मैंने अपने ब्लाग देखे। मेरे तीन ब्लाग ऐसे हैं जिन पर मैं अपनी पुराने पाठ ही रखता हूं और जो केवल नारद और चिट्ठाजगत पर दिखते हैं। मेरे 12 ब्लाग ऐसे है जो सभी फोरम पर दिखते हैं और उन पर मैं अपने नये पाठ रखता हूं। एक ब्लाग तो ऐसा था पर एक अन्य ब्लाग जिस पर ताजा पोस्ट थी और वह केवल नारद से देखा गया था वही दिखाई दे रही थी। इसका आशय यह है कि नारद से ऐसे ब्लाग उठाये गये हैं-यही प्रतीत होता है।
यह करतूत किसी बाहरी आदमी की नहीं प्रतीत होती और हमारे बीच में से ही ब्लाग लेखक की सक्रियता इसमें दिख रही है। आजकल डौमेन लेना सस्ता और सरल हो गया है और इसकी पूरी संभावना है कि ब्लाग के नशेड़ी ब्लाग लेखकों ने ऐसे कई डोमेन ले लिये होंगे पर लिखने से वह लाचार अपने को पाते हैं सो चमकने के लिये छद्म नाम से पहले ब्लाग बनाते थे अब डौमेन लेकर वेबसाइट बनाने लगे हैं। चालाकी इसमें यही की गयी है कि कल को कोई ब्लाग लेखक अपने पाठ के उपयोग पर आपत्ति कर कोई दावा करे तो यही जवाब मिलेगा कि आपका तो फ्री ब्लाग है और फिर हमने चोरी नहीं की है बस कापी की है और आपका नाम भी है।
वैसे मैंने चिट्ठाकार समूह में अपनी बात रखी है और मेरा अपने मित्र ब्लाग लेखकों से आग्रह है कि अपने स्तर पर वह ऐसी हरकतों को रोकें। मैं हवा में तीर नहीं छोड़ता और इसलिये यह बता दूं कि मैं ब्लाग जगत पर सक्रिय सभी ब्लाग लेखकों के स्वभाव और कार्यशैली से अवगत हो गया हूं। मुश्किल यही है कि यहां मित्र और आलोचक दोनों ही छद्म नाम से हो सकते हैं। जिस वेबसाइट पर मेरे यह पाठ हैं वह मुझे बहुत पढ़ने वाला आदमी लगता है। उसकी इस चालाकी से ही मैं समझ गया। मैंने इस चोरी के विषय पर कई बार लिखा है और वह जानता है कि इसे पढ़कर मैं शायद ही आक्रामकता दिखाऊं।

इस मामले में अपने सभी ब्लाग लेखक मित्रों के विचारों का मुझे इंतजार है। लोग ब्लाग लेखकों को मुफ्त का माल समझ रहे हैं या उन पर डौमेन खरीदने के लिये दबाव बनाना चाहते हैं यह भी एक विचारणीय विषय है क्योंकि मैंने देखा है कोई ऐसी परेशानी आने पर डौमेन खरीदने की सलाह भी दी जाती है। मेरे से खेलना आसान नहीं है यह बात उन लोगों का समझ लेना चाहिए। मेरे एक मित्र आज मुझसे कह रहा था कि वह यह पता कर सकता है कि उस वेबसाइट का ईमेल और फोन नंबर तक पता कर सकता है। मैंने उससे कहा कि देखना पड़ेगा कि कोई अपना मित्र तो नहीं है। सच बहुत कड़वा होता है पर कहना पड़ रहा है। मुझे जिस आदमी पर उसकी कार्यशैली पर संदेह है वह कुछ ऐसा ही है। यहां लोग इस तरह है कि अपना नाम अखबार में ब्लाग लेखक के रूप में प्रचारित करना चाहते हैं पर लिखने का उनमें माद्दा नहीं है और वह ऐसी वेबसाईटे बना रहे कि अगर वह चल निकले तो हम अपने असली नाम से वहां प्रकट हो जायें। कल ही एक ब्लाग लेखक ने लिखा था कि अखबारों में जिन प्रतिष्ठित ब्लाग लेखकों के नाम पढ़े थे वह तो यहां अधिक सक्रिय नहीं है और यहां तो कोई और ही लिख और दिख रहे हैं।

मेरा यह आलेख उसके पास जायेगा और मेरी उसे सलाह है कि वह मेरे ब्लाग का पता देते हुए उसे छापने के साथ मुझे उसकी सूचना मुझे प्रदान करे वरना मैं पता कर लूंगा कि वह कौन है? मैं अनुमान कर चुका हूं कि वह कौन है? क्योंकि उसकी कार्यशैली मेरे दिमाग में है। मैं चाहता हूं कि ब्लागर यहां कमायें और अगर मेरे पाठों से उनको मदद मिलती है तो अच्छी बात है पर इस तरह की चालाकियों का मुकाबला करना मेरे लिये कठिन नहीं है। वैसे मैंने तय किया है कि अपने व्यंग्यों और आलेखों में पैराग्राफों के बीच में ही अपना नाम डाल दूंगा ताकि कोई उसकी कापी करे तो वह वहां बने रहें। मेरे पाठों से छेड़छाड़ न कर जो सावधानी बरती गयी है यह उसका जवाब होगा। मैने उसकी वेबसाइट का नाम इसलिये नहीं दिया क्योंकि हो सकता है कि यह एक चाल हो कि दीपक भारतदीप गुस्से में आकर अपना संयम खो बैठेगा और वेबसाइट का लिंक देगा और वह मुफ्त में उसका प्रचार होगा। मैं भी तय कर चुका हूं कि या तो मैं अपने मित्रों के नाम दूंगा या उनके ब्लाग लिंक करूंगा। बाकी लोगों को प्रशंसा पानी हो या प्रचार के लिये आलोचना उनसे भुगतान लिये बिना उनका नाम नहीं दूंगा।

दीपक भारतदीप लेखक एवं संपादक


अभी अभी-मैं अभी देखकर आया तो उसने नारद और चिट्ठाजगत पर ही दिखने वाले दो ब्लाग के पाठ वहां फिर रखे हैं। उसने मेरे नाम छिपाने का कोई प्रयास नहीं किया। इसे चोरी तो नहीं पर चालाकी तो कहा जा सकता है। मेरे समझ में यह नहीं आ रहा कि क्या किया जाये?

3 Comments

  1. Posted July 20, 2008 at 05:36 | Permalink

    आपका नाम तो दिया गया है बन्धुवर..लेकिन मेरी एक कहानी”व्यथा-झोलाछाप डाक्टर की” को जस का तस उठा के “पुंगीबाज” नामक ब्लाग पे चिपका दिया गया\ सिर्फ मेरा नाम हटा दिया गया।मैँने तो वहाँ अपना कमैंट भी छोड़ा कि कम से कम मेरा नाम और मेरे ब्लाग का लिंक तो दो लेकिन कोई सुनवाई नहीं
    ऊपर से चालाकी ये कि जब मैँने उस ब्लाग के मालिक ई.मेल अदरैस खोजना चाह तो वो भी वहाँ से नदारद मिला ।

    उस चोर ब्लाग का पता है :

    ise hata liya gayaa hai

  2. Posted July 20, 2008 at 12:43 | Permalink

    ब्लागवाणी पर ब्लाग शामिल करते समय इस बात का ध्यान भी रखा जाता है.

    यदि किसी ब्लाग में इस तरह की सामग्री की शिकायत मिलती है तो उसे तुरन्त हटा दिया जाता है.

  3. Posted July 21, 2008 at 06:02 | Permalink

    कौन है क्या पता पर आपने उसका नाम न देकर उसकी चालाकी नाकाम कर दी वरना पूरा ब्लॉगजगत उसे अभी पढ़ रहा होता और उसे प्रचार मिल जाता. अच्छा हुआ आपने अपना विवेक नहीं खोया.


One Trackback

  1. [...]  ‘दीपक भारतदीप जी’ के आर्टिकल से मिली।इस कारण मैँ ‘पुंगीबाज’ महाश्य जी का और दीपक भारतदीप जी का दोनों का ही शुक्रगुज़ार हूँ।एक बार फिर तहेदिल से आप सभी का शुक्रिया [...]

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