यादों का बयान-हिन्दी शायरी

यादों में जो बसता है
उसका नाम जुबां से बयां कहां होता है।

दिलबर नजर से हो कितना भी दूर
उसके पास होने का हमेशा अहसास होता है

आंखों में बसा दिखता है यह पूरा जमाना
पर ख्याल में जो बसा, वही दिल के पास होता है।
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तंगदिल साथी के साथ
जिंदगी का यह सफर
तन्हाई में गुजरता जाता है।

शिकायतों का पुलिंदा ढोते हैं साथ
उम्मीद नहीं है, चाहे पास है उसका हाथ
शिकायतों का बोझ दिल में लिये
कारवां राह पर, खामोशी से गुजरता जाता है।

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यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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