हास्य कविता-भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन (hasya kavita-bhrashtachar ke khilaf andolan)


समाज सेवक की पत्नी ने कहा
‘तुम भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में
शामिल मत हो जाना,
वरना पड़ेगा पछताना।
बंद हो जायेगा मिलना कमीशन,
रद्द हो जायेगा बालक का
स्कूल में हुआ नया एडमीशन,
हमारे घर का काम
ऐसे ही लोगों से चलता है,
जिनका कुनबा दो नंबर के धन पर पलता है,
काले धन की बात भी
तुम नहीं उठाना,
मुश्किल हो जायेगा अपना ही खर्च जुटाना,
यह सच है जो मैंने तुम्हें बताया,
फिर न कहना पहले क्यों नहीं समझाया।’
सुनकर समाज सेवक हंसे
और बोले
‘‘मुझे समाज में अनुभवी कहा जाता है,
इसलिये हर कोई आंदोलन में बुलाता है,
अरे,
तुम्हें मालुम नहीं है
आजकल क्रिकेट हो या समाज सेवा
हर कोई अनुभवी आदमी से जोड़ता नाता है,
क्योंकि आंदोलन हो या खेल
परिणाम फिक्स करना उसी को आता है,
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में
मेरा जाना जरूरी है,
जिसकी ईमानदारी से बहुत दूरी है,
इसमें जाकर भाषण करूंगा,
अपने ही समर्थकों में नया जोशा भरूंगा,
अपने किसी दानदाता का नाम
कोई थोडे ही वहां लूंगा,
बस, हवा में ही खींचकर शब्द बम दूंगा,
इस आधुनिक लोकतंत्र में
मेरे जैसे ही लोग पलते हैं,
जो आंदोलन के पेशे में ढलते हैं,
भ्रष्टाचार का विरोध सुनकर
तुम क्यों घबड़ाती हो,
इस बार मॉल में शापिंग के समय
तुम्हारे पर्स मे ज्यादा रकम होगी
जो तुम साथ ले जाती हो,
इस देश में भ्रष्टाचार
बन गया है शिष्टाचार,
जैसे वह बढ़ेगा,
उसके विरोध के साथ ही
अपना कमीशन भी चढ़ेगा,
आधुनिक लोकतंत्र में
आंदोलन होते मैच की तरह
एक दूसरे को गिरायेगा,
दूसरा उसको हिलायेगा,
अपनी समाज सेवा का धंधा ऐसा है
जिस पर रहेगी हमेशा दौलत की छाया।’’
———–
कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,ग्वालियर 
poet writer and editor-Deepak Bharatdeep, Gwalior

http://dpkraj.blogspot.com

————————

दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • sandeepdsvv  On मई 7, 2011 at 14:15

    aapne bharastachar per bahut achcha kavita likha hai

  • prateek  On जून 1, 2011 at 11:13

    समाज सेवक की पत्नी ने कहा
    ‘तुम भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में
    शामिल मत हो जाना,
    वरना पड़ेगा पछताना।
    बंद हो जायेगा मिलना कमीशन,
    रद्द हो जायेगा बालक का
    स्कूल में हुआ नया एडमीशन,
    हमारे घर का काम
    ऐसे ही लोगों से चलता है,
    जिनका कुनबा दो नंबर के धन पर पलता है,
    काले धन की बात भी
    तुम नहीं उठाना,
    मुश्किल हो जायेगा अपना ही खर्च जुटाना,
    यह सच है जो मैंने तुम्हें बताया,
    फिर न कहना पहले क्यों नहीं समझाया।’
    सुनकर समाज सेवक हंसे
    और बोले
    ‘‘मुझे समाज में अनुभवी कहा जाता है,
    इसलिये हर कोई आंदोलन में बुलाता है,
    अरे,
    तुम्हें मालुम नहीं है
    आजकल क्रिकेट हो या समाज सेवा
    हर कोई अनुभवी आदमी से जोड़ता नाता है,
    क्योंकि आंदोलन हो या खेल
    परिणाम फिक्स करना उसी को आता है,
    भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में
    मेरा जाना जरूरी है,
    जिसकी ईमानदारी से बहुत दूरी है,
    इसमें जाकर भाषण करूंगा,
    अपने ही समर्थकों में नया जोशा भरूंगा,
    अपने किसी दानदाता का नाम
    कोई थोडे ही वहां लूंगा,
    बस, हवा में ही खींचकर शब्द बम दूंगा,
    इस आधुनिक लोकतंत्र में
    मेरे जैसे ही लोग पलते हैं,
    जो आंदोलन के पेशे में ढलते हैं,
    भ्रष्टाचार का विरोध सुनकर
    तुम क्यों घबड़ाती हो,
    इस बार मॉल में शापिंग के समय
    तुम्हारे पर्स मे ज्यादा रकम होगी
    जो तुम साथ ले जाती हो,
    इस देश में भ्रष्टाचार
    बन गया है शिष्टाचार,
    जैसे वह बढ़ेगा,
    उसके विरोध के साथ ही
    अपना कमीशन भी चढ़ेगा,
    आधुनिक लोकतंत्र में
    आंदोलन होते मैच की तरह
    एक दूसरे को गिरायेगा,
    दूसरा उसको हिलायेगा,
    अपनी समाज सेवा का धंधा ऐसा है
    जिस पर रहेगी हमेशा दौलत की छाया।’’

  • abhishek  On जून 21, 2011 at 14:09

    its a very good poem

  • vanshita  On अगस्त 17, 2011 at 15:45

    very intersting……;)

  • Simartharm  On सितम्बर 12, 2011 at 19:01

    It’s very good.

  • Aisa Maharashtra  On सितम्बर 18, 2011 at 20:52

    very intersting

  • sanket  On अक्टूबर 16, 2011 at 14:26

    Very very beautiful poem

  • Sanjay Kumar  On अक्टूबर 19, 2011 at 11:03

    Excellent poem

  • Rahul  On नवम्बर 7, 2011 at 16:23

    suaad (taste) hi ageya

  • Tanu  On नवम्बर 9, 2011 at 04:58

    very nice poem!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

  • Rupesh S. Rathod  On दिसम्बर 17, 2011 at 13:35

    Very nice Poem !

    Aap ke bhrashtachar ke bizness main bahut prophit hai

  • dinesh dubey  On जनवरी 8, 2012 at 11:24

    nice one

  • anand dwivedi  On जनवरी 8, 2012 at 15:28

    Its extra ordinery & so excellent poem.

  • suman yadav  On जनवरी 9, 2012 at 20:00

    its nice poem

  • nav roop  On जनवरी 17, 2012 at 14:53

    very good n laughter poem

  • ratan kumar  On जनवरी 21, 2012 at 09:00

    very 2222 good

  • ratan kumar  On जनवरी 21, 2012 at 09:02

    thanks for nice poam……….

  • Amit Bhardwaj  On मार्च 5, 2012 at 19:51

    very nice

  • pratham gupta  On अगस्त 31, 2012 at 21:48

    thanx for the poem.I liked it.

  • vijay mande  On सितम्बर 23, 2012 at 10:49

    really a good poem, its all about the new samaaj sevak’s made & brought up by the corrupt politics and the corrupt govt official

  • chavi  On अक्टूबर 11, 2012 at 19:41

    a nice poem
    ….shows how people has started considering “corruption”as their source of income

  • ankit roshan  On नवम्बर 6, 2012 at 20:29

    veryyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy nice

  • narsingh pratap  On नवम्बर 25, 2012 at 16:19

    good

  • pratyush kumar  On अगस्त 20, 2013 at 18:12

    veryyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy comedyyyyyyyyyyyyyyyyyyy

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