ज़िंदगी का कारवां
बस यूं ही बढ़ता जाएगा,
रास्ते में आएंगे नए पड़ाव
साथी और हमसफरों के चेहरे भी
बदलते रहेंगे
कोई पीछे छूटेगा
कोई आगे निकाल जाएगा।
कहें दीपक बापू
महफिलों में मिलने वाले लोग
भले ही ताउम्र साथ चलने का वादा करें
मगर रात बीतते बीतते
उनके दावों का असर भी खत्म हो जाएगा,
सुबह फिर कोई नया चेहरा सामने आयेगा।
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak ‘Bharatdeep’,Gwalior
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