सदैव हंसते रहो

मनुष्य के मुख पर मुसकान सौभाग्य का चिह्न है। हंसना मनुष्य की स्वाभाविक क्रिया है। विधाता के सृष्टि का कोइ दूसरा प्राणी हंसता हुआ नहीं दिखता। प्रसिद्ध चिंत्तक वायर ने ठीक लिखा है-’जब भी संभव हो हंसो, यह ऐक सस्ती दवा है, हंसना मानव-जीवन का ऐक उज्जवल पहलू है।’
पाश्चात्य तत्ववेत्ता स्टर्नने तो यहाँ तक कहा [...]

अपनी भाषा के लिये किसी का मोहताज न होना

हिन्दी दिवस पर कई लोग बोले
हिन्दी की दशा बहुत खराब
अंग्रेजी इलाकों एकदम शोचनीय
यह न बताया कि अपने इलाक़े में
कौनसी अंग्रेजी है पूज्यनीय
तुम उठो -बैठो अंग्रेजी के साथ
कौन करेगा हिन्दी में बात
कैसे हो सकती है हिन्दी वंदनीय
——————————
एक लेखक ने दूसरे से कहा
‘अंग्रेजी इलाक़े में हिन्दी की हालत
बहुत खराब है
चलो कुछ हिन्दी में पोस्टर
चिपकाये आते हैं
लोग आते [...]

खेल सिफारिश का

  

कहीं से भी अपने काम के लिए
मिल जाये किसी बडे जन्नत
की हमें भी सिफारिश
हर आदमी के दिल में यह
हमेशा होती है कशिश
सबके दिल की बातें
पूरी हो जातीं तो
हर जगह बस गयी होती जन्नत
सिफारिश से अगर
सारा जहाँ सज गया होता
तो जुह्न्नुम खाली पडा होता
गली-मुहल्लों में पडे कूड़े के ढ़ेर
मलेरिया और डेंगू के मच्छरों जैसे शेर
कभी के [...]