बर्बरता भी नहीं देखती धर्म, जात,भाषा और देश की सीमा


जिस तरह प्रेम की कोई जात, धर्म, भाषा और कोई नाम नहीं होता उसी तरह बर्बरता का भी कोई रुप नहीं होता। आज टीवी चैनलों पर तालिबानों द्वारा एक बच्चे के हाथ से एक व्यक्ति को मौत के घट उतारने की विडियो फुटेज दिखाए जा रहे हैं। १२ साल का बच्चा जिस तरह एक आदमी की गर्दन पर छुरी चलाकर उसे मार रहा है वह अत्यंत भयावह और दिल दहलाने वाला है। जब मैं इस द्रश्य देखा रहा था तब उन लोगों के बारे में ज्यादा सोच रहा था जो इसके निदेशक थे । उनका मकसद साफ है दुनियां में अपने आतंक के जरिये अपनी उपस्थिति का आभास कराना। यह प्रायोजित था । उन्हें अपना कार्यक्रम चलाने के लिए पैसा चाहिए और वह इन दृश्यों के द्वारा अपने धन्दाताओं को यह संदेश देना कि उन्हें अभी भी अपना धन देना जारी रखें वरना उनका भी यही हॉल होगा। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में चोरी-छिपे मादक पदार्थों का उत्पादन और उनकी तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय है और वह ऐसे आतंकवादी संगठनों को धन देते हैं और उनका काम चलता रहता है। यह इलाक़े सूखे मेवे के उत्पादन के लिए भी प्रसिध्द है और व्यापारियों को भी आख़िर अपना व्यापार करना होता है तो वह अपने व्यापार के लिए हफ्ता देते हैं जिनकी राशी इन आतंकवादियों के पास पहुँचती है । इन इलाकों में तमाम जरूरी जीवनोपयोगी चीजें बाहर से वहां जाती हैं। कुल मिलाकर स्थिति यह है एक और दो नम्बर का व्यापार वहां जारी रहता है और आतंकवाद का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है । पाकिस्तान बन जरूर गया है पर इन इलाक़ों में उसकी सरकार के नही बल्कि वहां के कबीलों के सरदारों के नियम चलते है। यह वह इलाक़े हैं वहां इन्सान को उसके व्यवहार से नहीं धन और अस्त्रों-शस्त्रों के आधार पर सम्मान मिलता है। मेरे कहने का आशय यह है यह आतंकवाद किसी धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक उद्देश्य की पूर्ती के लिए चलाने का दावा जरूर किया जाता है पर उनका नेतृत्व अपने धन और वैभव के लिए उन संगठनों का संचालन करते हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इन इलाकों में अशिक्षा, गरीबी और भुखमरी बडे पैमाने पर मौजूद है। आधुनिक सभ्यता के रंग में भी वही लोग रंगे हैं जीके पास धनबल और बाहुबल है और समाज में विकास लाकर वह अपने लिए नये प्रतिद्वंदी स्थापित नहीं करना चाहते । वहां के गरीबों को मजहब की घुट्टी पिलाकर उन्हें आत्नाक्वादी बनाते हैं। चूंकि गरीब चाहे कहीं भी अपनी तकलीफों की मुक्ति का सपना देखता है, और उसका इलाज यही निकाला गया है कि उसे जन्नत या स्वर्ग का सपना दिखाया जाता है। थोडा धन और मरकर सुख भोगने कि ख्वाहिश लिए गरीब आतंकवादी बन जाता है। १२ साल का बच्चा छुरी चलाकर किसी का भी कत्ल कर सकता है यह संदेश आतंकवादी अपनी ताकत दिखाने के लिए देना चाहते हैं पर मैं इसे उस रुप में नहीं लेता । यह दोहरा हत्याकांड है। एक उस आदमी का जीवन लेना और दूसरा उस मासूम की मासूमियत से परे ले जाना।
बर्बरता तो यह भी है हमारे ही देश में तीन साल के एक बच्चे का फिरौती न मिलने पर क़त्ल कर दिया गया। आख़िर एक तीन साल के बच्चे का केवल इसीलिये क़त्ल कर दिया जाता है कि उसने एक धनी परिवार में जन्म लिया है और वह पैसा नहीं दे रहा है तो उसकी जान ले लो-यह बर्बरता नही तो और क्या है? यानी बर्बरता कि भी कोई जात, धर्म , भाषा और देश नहीं होता -यह भी कि उनका मकसद केवल अपने लिए धन, वैभव और विलासिता के साधन जुटाना है। ऐसे में मेरा एक ही मत है भारत और उसके पड़ोसी देशो-खास्तोर पर पाकिस्तान के सज्जन लोग एक होकर इस बरबर्ता से लड़ने के लिए संकल्प लें , जब बर्बरता की प्रवृति देश, भाषा, धर्म और जात की सीमा का बन्धन नहीं देखती तो सज्जन लोग क्यों इन सीमाओं में फसते हैं।

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: