सौन्दर्य का बोध नज़रों से नहीं दिल से होता है


क्रीम और पाउडर से पुते चेहरे

सौंदर्य का बोध कराते

थोडा पसीना में ही नहाते

चेहरे की असलियत देखते ही

सौन्दर्य पारखी सहम जाते

चेहरे का ही सौन्दर्य अगर

वास्तविक सौन्दर्य होता तो

शिशु जब अपनी जननी को

देखकर गोदी में उठाने के लिए

अपने दोनों हाथ लहराता है

तब वह उसके रंग रुप की ओर नहीं

उसकी ममता में

सौन्दर्य का बोध कराता है

जब भाई अपनी बहिन की ओर

प्यार से निहारता है

तब उसके चेहरे में नहीं

उसके प्यार में सौंदर्य की

अनुभूति कराता है

जो ढूंढते है जिस्म में सौंदर्य

उन पर तरस आता है

—————————

सौंदर्य देखने की नहीं एक अनुभूति है

अगर अनुभूति नहीं कर सकते

तो देख नहीं सकोगे

और जिसे सुन्दर समझोगे

वह तुम्हारा भ्रम होगा

जब सच सामने आयेगा

तुम्हें अपने ठगे जाने का अहसास होगा

नजरों का प्यार होना

दिल मिलने का सबूत नहीं होता

अगर सौदर्य का बोध करना है तो

अपनी नीयत को सुन्दर करो

चारो ओर तुम्हें सौदर्य का

अहसास होगा

———————————

Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: