क्रिकेट का बाज़ार:कुछ नयापन लाओ


श्रीलंका की टीम विश्वकप क्रिकेट के फायनल में पहुंच गयी है। एशिया की कोइ टीम अगर फायनल में पहुंचे तो यह प्रसन्नता की बात होना ही चाहिए। श्रीलंका टीम भारतीय टीम की तरह ग्लैमरस नहीं है, और न उसमे कोइ तथाकथित रुप से महान खिलाड़ी हैं जो उसकी लुटिया डुबोने का कारण बने। जब तक क्रिकेट सीमित देशों में खेला जाता था तब तक हमें अपने टीम कि असलियत पता नहीं चलती थी, पर अब यह साफ लगने लगा है कि हमारे देश के समाचार पत्र-पत्रिकाएँ, टीवी चैनल और क्रिकेट विशेषज्ञ अपनी व्यवसायिक मजबूरियों के चलते कितना भी अपने देश के खिलाडियों का गुणगान करें पर जिस तरह विश्व कप में सभी टीमें खेलीं हैं उससे देखकर यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि टीम इन्डिया अनफिट खिलाड़ियों का जमावड़ा थी। इसमें न केवल खिलाड़ी शारीरिक रुप से अनफिट थे वरन मानसिक रुप से भी उनमें जीतने की ललक नहीं थी । उनके दिमाग पर विज्ञापनों से हुई कमाई का बोझ इस तरह था कि देश के सम्मान और अपनी छबि का विचार तक नहीं था। वह हारे क्योंकि उनमें जीतने के क़ाबलियत नहीं थी। अगर टीम इंडिया का सही आंकलन करें तो यह भी कहा जा सकता है कि वह एक तरह से विज्ञापनों में काम करने वाले ऐसे माडलों की टीम थी जिन्हें गेंद फेंकना और बल्ला घुमाना अच्छी तरह आता था-और वह खिलाड़ियों जैसे दिखते थे ।
अभी जिस ढंग से सब कुछ चल रहा है उसे देख कर नहीं लगता कि खेल की दृष्टि से भारत में क्रिकेट का भविष्य कोई उज्जवल है। व्यापार की दृष्टि से अभी कुछ दिन और चल सकता है। मतलब यह कि अभी पुराने विज्ञापनों के उपयोग करने की योजनाएं हो सकती है और कुछ खिलाडियों को इसी लिए टीम में रखना पड़ा सकता है क्योंकि वह जिन कम्पनियों के लिए वह माडलिंग कर रहे हैं वह भारतीय टीम से कहीं न कहीं जुडे हो सकती हैं। हालांकि इससे उनको कोई ज्यादा फायदा नहीं होने वाला क्योंकि बाज़ार का नियम है कि एक बार कोई वस्तु या उत्पाद बाज़ार में अपनी लोकप्रियता खो बैठता है तो दुबारा उसकी वापसी नहीं हो सकती जब तक वह नये रुप में सामने न आये । भले ही उत्पाद पुराना हो पर नया लेबल लगाना ही पड़ता है। टीम इंडिया बाज़ार के जिस रास्ते पर चली है उसके अनुसार तो सभी खिलाडियों को हटाकर नये लड़कों को लाना चाहिए । मैं अब क्रिकेट की बात करता हूँ तो खेल अलग मामला है और व्यापार अलग । टीम इंडिया में कयी महान खिलाड़ी हैं और हमारे देश के लोग महान लोगों का सम्मान करते है-उनकी पूजा भी करते हैं और वह उनसे साबुन और टूथपेस्ट बेचने की उम्मींद नहीं करते । जो बेचते हैं उन्हें महानता का दर्ज़ा नहीं मिल सकता-प्रचार माध्यमों में सक्रिय पढे-लिखे लोग पैसा कमाने को कितना जायज भी बताएं-मैं भी उसे जायज ही मानता हूँ-पर इस देश के लोगों ने त्यागी-तपस्वी और समाज के लिए निष्काम और निर्लिप्त लोगों को ही महान माना है ।
मैं क्रिकेट खेल की नहीं उसके बाज़ार की बात कर रहा हूँ । हमने इस बार जो क्रिकेट विश्व कप देखा उसमें दूसरी टीमों के आगे टीम इंडिया ओल्ड फैशन लगती है। अगर तुम्हें फिर भी क्रिकेट बेचना है तो अब एक दम फ्रेश नया कलेक्शन ले आओ, तुम्हारे सब मोडल पुराने हो गये हैं .

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: