अपने ख्यालों और ख्वाबों को दिल में रखो


अपने दिल की बात यूं
किसी से नहीं किया करते
चाहे लोग कितने भी अपने लगे
उनके दिल अपने नहीं हुआ करते
अपने ख्यालों और ख्वाबों को तुम
अपने ही दिल में सजाकर रखो
किसी को बांटने से वह
सच नहीं हुआ करते
जो तुम अपनी बात नहीं
रख सके दिल में
तब और कोई और क्यों
रख पाएगा
वह तो तुम्हारे
ख्यालों और ख़्वाबों पर
जमाने में शोर मचायेगा
तुम्हारे होंसलों पर
जंग लग जाएगा
याद रखना
मिलाने से दिल नहीं मिलते
जुबान से निकले अल्फाज़
वापस नही आया करते
—————-
तुम्हारे अलफ़ाज़
दिल से निकलें या दिमाग से
तुम्हारे ज़ज्बातों के बयां होते हैं
किसी का दिल तुम्हारी
तरह धड़कता हो यह जरूर नहीं
किसी का दिमाग
तुम्हारी तरह सोचता हो
यह भी तय नहीं
तुम्हारी जुबान के
सभी के कान आशिक़ हौं
यह तो होना भी नहीं है
इसीलिये अपने ज़ज्बातों पर
शोर इतना मचाया न करो
चिल्लाने से अलफ़ाज़ खो बैठे हैं
अपनी असलियत
भीड़ में ज़ज्बात के कोई
कद्रदान नहीं हुआ करते
यहां सबको इश्क हो
यह जरूरी नहीं
सबको आशिक मिलते नहीं
मह्फिलो में कितने भी जश्न मना लो
दोस्त मिलना वहां मुमकिन नहीं

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