दिखावे के सिरमौर


अपने मुहँ से बढ़ाएं, अपनी बात का भाव
दुसरे को दें नसीहत, अपने मन में दुर्भाव

न वाणी में मिठास, न विचारों में शुद्धता
बगुला भगत का ढोंग है, सामजिक सदभाव

न कुछ पढा और न विचारा, बन गये विद्धान
दिखावे के सिरमौर, नही बदल सकते स्वभाव

ज्ञानियों में अज्ञानी थे जो , बने अज्ञानियों में ज्ञानी
बाजार से खरीदा मुकुट, पहनकर दिखाते हैं ताव

कहें दीपक बापू व्यर्थ है, उनसे सत्संग करना
जिनकी बुद्धि में भरा है कुटिलता का ही भाव

Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: