दूसरे आंदोलन के लिये नये अगुवा की तलाश


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स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ 
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                मैं अपने समस्त मित्रों,शुभ चिंतकों  और साथियों को स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए यह आशा करता हूँ की वह देश की दृढ़ता ,निष्ठा  और ईमानदारी  
दिखाते हुए ऐक सजग प्रहरी  के रूप में काम करते  रहेंगे।  
दीपक भारतदीप  

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कभी कालोनी में पानी की
लाइन डलवाने के लिये किया था  
उन्होने जबरदस्त आंदोलन  
बन गये थे सबके अगुवा 
उनकी ऐक आवाज  पर जूट
जाती थी लोगों की भीड़ 
कभी होता था रास्ता जाम 
तो कभी होता जंगी प्रदर्शन 
फिर भी बरसों तक लाइन डालने का
काम शुरू तक नहीं हुआ 
 
फिर भी उनकी राजनीति 
ऐसे चमकी वह बन गये 
उसी महकमे में अध्यक्ष 
अब लाइन डल जायेगी 
यह सोचकर कालोनी का हर 
आदमी खुश हुआ   
पहले अपने फुरसत के पल बिताने
अपनी राजनीतिक छबि चमकाने 
हर आम और खास के घर जाते थे 
पद के कार्यों ने इतना किया व्यस्त 
लोगों को उनका दर्शन भी दुर्लभ हुआ
 
लोग इंतजार करते रहे 
सबके बोरिंग सूखते  गये
कुछ लोगों ने मिलकर उनसे 
समय मांगा 
जो आदमी कल तक 
घर बिना बुलाये आता था
उससे मिलने के लिये बेलने पड़े पापड़
उसका सचिव भी उनके सामने
वी आई पी के तरह पेश हुआ 
 
नाराज लोगों ने कहा
‘बरसों तक हमें वर्षा और धूप में 
जिस पानी  के लिये दौड़ाया
अब तो पूरा महकमा ही आपके हाथ आया
 तीन बरस से काम
फिर भी नहीं शुरू हो पाया
आपके नेतृत्व में हमने 
किया था कभी आंदोलन   
आप तो हमें जुलूस में पैदल दौड़ लगवाते 
खुद भाषण देने कार में आते थे 
आपके कहने से हम अपना खून 
पसीने में बहाते थे 
हर गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर
हम चंदा कर कार्यक्रम  करते
आप तो मुख्य अतिथि की तरह 
आकर झंडा फहराते 
आपने  हर भाषण में 
पानी के लिये आंदोलन 
जारी रखने का किया था एलान 
अब क्या हो गया है आपको श्रीमान 
लाइन डालने का काम 
अभी तक नहीं शुरू हुआ
 
 अध्यक्ष जी बोले 
‘मैं अध्यक्ष तुम्हारी वजह से नहीं बना 
 फिर अकेली यह कालोनी नहीं है 
मुझे पूरा शहर देखना होता है
अगली बार लडना है चुनाव 
कालोनी के वोटों से क्या होता है
फिर तुम लोग जानते हो
सरकारी महकमों में काम 
किस तरह होता है
मैं अध्यक्ष क्या बना 
तुम लोगों ने  अपना 
आंदोलन ही बंद कर दिया
क्या समझ थे तुम लोग 
 मैने सारी कालोनी का ठेका ले लिया 
मुझसे ऊपर भी लोग हैं
 उनके कान  में जूँ तक नहीं रैन्ग  रही
तुम अपना आंदोलन आगे बढाओ 
 समझ लो  कि
मैं तो इस मामले से अलग हुआ’
 
उनके उत्तर से हतप्रभ लोग
वापस लौटे  और की ऐक बैठक 
  जिसमें  दूसरा आंदोलन  चलने का
प्रस्ताव पास हुआ
अब ढूंढते  हैं नया अगुवा
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