असली देवता घर में क्यों नहीं बसते


पोश कालोनी के उस
घर में साँप निकला तो
कोहराम मच गया
वह ऐक कोने में पडा था
अपने ही हाल से बेहाल था
पर घर के सभी सदस्य भय से
काँप रहे थे
महिलाएँ चिल्ला पड़ी
जाओ किसी साँप पकड़ने वाले को बुलाओ
घर का कोई सदस्य
इस तरह के किसी
आदमी को नहीं जानता था
जो उसे पकड़ कर बाहर निकाल सके
हल्ला इतना मचा कि
पड़ोसी भी वहां आ पहुँचे
ऐक पड़ोसी पास में रहने वाले
ऐक आदमी को बुला लाया
और उसने सांप के मूँह को
दबाकर उसे उठाया
और बाहर उस मारकर जलाया

उसी घर का बच्चा
नागपंचमी को अपनी दादी के
साथ नाग मंदिर में पहुँचा
जहाँ दादी ने उसे देवताओं के बारे
में बहुत कुछ बताया
उस बालक ने देखा
दादी ने पत्थर के नाग देवता
पर दूध और फूल चढ़ाए
और दीपक जलाया

घर लौट कर बालक ने
अपनी माँ से कहा
‘उस दिन घर में नाग निकला तो
दादी कितना डर रही थी
पर उस पर फूल और दूध चढ़ाये
और बडी खुशी से दीपक जलाया
फिर उस दिन क्यों इतना डर दिखाया
उसे पकड़ा कर क्यों जलाया’

माँ ने कहा
‘वह असली था डस लेता
मंदिर में तो नाग देवता की
जो मूर्ति है वह पत्थर की है
डसने का भय नहीं है
इसलिये लोग उसे पूजने जाते

जिज्ञासा वश बालक ने पूछा
सच के नाग क्यों देवता नहीं होते
लोग उनसे क्यों बहुत डरते
वह किसी के घर में क्यों नहीं बसते

माँ ने फीकी हँसी हँसते हुए कहा
आदमी का दिल इतना छोटा कि
आदमी की आदमी से ही घर में
अच्छी तरह नहीं निभती नहीं
पत्थर के देवता तो बोलते नहीं
इसलिये सब जगह पुजते
चलते-फिरते देवता कभी
नाराज भी हो सकते हैं
इसलिये लोगों के साथ घर में नहीं बसते

वह बालक सोचता रहा पर अभी भी कि
इंसान के घर में असली देवता
क्यों नहीं बसते

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