इस ब्लोगर मीट पर हास्य कविता मत लिखना


पहले ब्लागर का पता उसके मित्र ने ही दूसरे ब्लागर को दिया था और सख्त हिदायत थी कि किसी भी तरह उससे बहस अधिक मत करना-वह कभी कामेडियन लगता है तो कभी ऐकदम दार्शनिक हो जाता है।
दूसरा ब्लागर उसके पत्ते पर पहुंचा। उसने पहले ब्लागर को उसके मित्र का परिचय दिया। पहले ब्लोगर ने भी उसका स्वागत किया और पूछा-” आपको देखकर खुशी हुई पर मैने कभी आपका ब्लोग देखा ही नहीं है।’

जरूरत क्या-‘दूसरे ने कहा-‘मैंने उस पर लिखा ही क्या है जो आप पढ पाते। बस अपने आने की घोषणा करने वाली दो-चार लाइनें डालीं और हो गये ब्लोगर, पर मैं आपका लिखा पढता हूं।’

पहला ब्लोगर-‘क्या आपने कभी मेरे ब्लोग पर कमेंट दी है?’

दूसरा ब्लोगर्-”नहीं अब मैं आपका लिखा पढ्कर भूल जाता हूं कि कमेंट भी लिखा जाना चाहिये।’

पहला ब्लोगर-आपको बहुत पसंद आता है?’

दूसरा ब्लोगर-नही!आपका लिखा मेरे समझ से परे होता है, पर आप अच्छा लिखते हैं।’

पहला ब्लोगर-जब आपके समझ में नहीं आता तो कैसे कह सकते हैं कि अच्छा लिखता हूं?’

दूसरा ब्लोगर-मेरे समझ में नहीं आता इसलिये। खैर छोडिये इस बात को, काम की बात करें।’ पहला ब्लोगर्-‘आप मुझसे क्या चाह्ते हैं?’

दूसरा ब्लोगर-‘कुछ खास नहीं! बस ऐक ब्लोगर मीट कर लेते हैं। इतनी सारी ब्लोग मीट हो रहीं हैं पर कोई अपने को बुला ही नहीं रहा है, इसलिये आज हम लोग भी ऐक मीटिंग कर लेते हैं। आप उसकी रिपोर्ट लिख देना।’

पहला ब्लोगर-‘मैं क्यों लिखूं? आप क्यों नहीं लिखेंगे ?”

दूसरा ब्लोगर-मैं तो उस पर जबरदस्त कमेंट लिखूंगा।”

पहले ब्लोगर ने देखा कि वह लगातार अपने कंधे उचकाये जा रहा था-ऐसा लग रहा था कि वह कोई व्यायाम करने का आदी हो। पहले ब्लोगर ने कहा-‘आप अपने कंधे लगातार इस तरह घुमा क्यों रहे हैं। कोई व्यायाम कर रहे हैं या बचपन से ही ऐसी कोई आदत है। इस तरह आपके कंधे घूम रहे हैं या नाच रहे हैं पता ही नहीं लग रहा है।’

दूसरा बोला-‘आप ही देख लीजिये।’

पहला ब्लोगर-‘आप ऐसा कर क्यों रहे हैं?’

दूसरा बोला-‘और क्या करूं? कंप्युटर पर लिखते-लिखते ऐसी आदत हो गयी है। उस पर काम करते हुए भी टाइप करूं या नहीं ऐसे ही कंधे उचकाता रहता हूं ताकि मुझे यह याद रहे कि मैं ऐक ब्लोगर हूं।’

पहला ब्लोगर-हां, अभी आपने बताया था कि उस पर अपने आने की घोषणा करते हुए ऐक पोस्ट डाली थी। वैसे आप किस तरह और कौनसे विषयों पर लिखते हैं?’

दूसरा ब्लोगर्-‘मैंने आपको बताया था कि बस ऐक बार लिख है और वह मेरी जिंदगी की पहली और आखिरी रचना है।

पहला ब्लोगर्-‘कुछ तो लिखते ही होंगे।’

दूसरा ब्लोगर्-‘बस कुछ ज्यादा नहीं बस कमेंट लिखता हूं कभी-कभी। वैसे इस लाइन में आपसे सीनियर हूं। वैसे कमेंट लिखना भी कोई आसान काम नहीं है।’

पहला ब्लोगर-‘आपकी बात सही हैं, कमेंट लिखना भी कोई आसान काम नहीं है। पर आप बताईये हम दो लोग मिलकर कैसे ब्लोगर मीट कर सकते हैं? क्या आपके पास इसके कोई योजना है?’

दूसरा ब्लोगर्-‘मेरे पास दस ब्लोग हैं। आपके पास भी छह ब्लोग है। फ़िर चिंता की क्या बात है? किसी भी ब्लोगमीट में इतने सारे ब्लोग लिखने वाले लेखक नहीं शामिल हुए होंगे।’

वह अपने कंधे लगातार उचकाये जा रहा था। पहला ब्लोगर-‘आपकी बात सही हैं। पर हम लिखने वाले तो दो ही लोग हैं।’

दूसरा बोला-‘मेरे सभी ब्लोगों पर अलग-अलग नाम हैं। किसीपर मेरा असली नाम नहीं हैं। सभी नाम छ्द्म हैं, आपके भी छ्द्म नाम से कुछ् ब्लोग तो होंगे ही?’

पहला ब्लोगर-हां! ऐक धार्मिक ब्लोग है और उस पर केवल धार्मिक विषयों पर ही लिखता हूं।’

दूसरा ब्लोगर-‘तब तो मजा आ गया। हमारे मीट में धार्मिक ब्लोगर का होना चार चांद लगा देगा।’

पहला ब्लोगर-पर वह तो मैं ही हूं।’

दूसरा-पर यहां कौंन देखने आ रहा है। आप तो अपने छ्द्म नाम ही लिख देना। और हां मैने अपने अपनी बच्ची और पत्नी के नाम पर भी ब्लोग बनाये हैं पर उन पर कुछ लिखा नहीं है, मीट में उनकी उपस्थिति भी दिखा देना। इससे महिलाओं की उपस्थिति भी हो जायेगी। ‘
गृह्स्वामिनी चाय और नाश्ता ले आयी उनके जाने के बाद दूसरा ब्लोगर बोला-‘आपने भाभी जी से परिचय नहीं कराया?’

पहला-इसलिये कि आप और मैं आराम से चाय और नाश्ता उदरस्थ कर सकें।’

दूसरा-‘क्या ब्लोगिंग से चिढती हैं?”

पहला-‘नहीं, नफ़रत करती हैं।’

दूसरा-‘कोई बात नहीं है। मेरी पत्नी ने भी घर से निकाल दिया है। अब इधर्-उधर रिश्तेदारों के यहां रहकर गुजार लेता हूं। घर में दोबारा घुसने देने के लिये उसने ब्लोगिंग छोडने की शर्त रखी है।’

पहला-‘फ़िर आप ब्लोगिंग कैसे करते हैं?’

दूसरा-‘ऐक साइबर कैफ़े वाले को पटा रखा है।’

पहला-‘आप किस तरह के ब्लोग पर कमेंट रखते है।’

दूसरा-चाहे जिस पर भी। बस लेखक चिढ जाये या डरकर ब्लोगिंग छोड जाये। मुझे कोई डर भी नहीं लगता क्योंकि मेरा तो सब जगह छ्द्म नाम है, यहां तक कि घर परिवार के लोगों के नाम भी छ्द्म हैं। वह तो मैं खुद मानकर चलता हूं कि उनके नाम है।”

पहला-‘आपके ब्लोग का नाम क्या है?”

जैसे ही उसने अपने ब्लोग का नाम बताया पहला ब्लोगर उछल कर खडा हो गया और बोला-‘अच्छा तो वह तुम थे जो मेरे छ्द्म ब्लोग पर अभद्र कमेन्ट रख गये थे। तुमने मुझे विचाराधारा की लडाई लडने की चुनौती दी थी और मैने उसी वजह से उसे धर्म का ब्लोग बना दिया। उसके बाद तुम आये ही नहीं। आज आओ तो कर लें विचारधारा पर बहस!’

दूसरा-आप नाराज क्यों हो रहें है? आपने खुद ही कहा कि आपका छ्द्म नाम है, अगर आपक असली नाम होता तो आपका हक बनता शिकायत करने का । अच्छा अब आप ब्लोगर मीट पर रिपोर्ट लिख देना।’

पहला-कौनसी ब्लोगर मीट?’

दूसरा-‘यह जो अभी यहां हुई।’

पहला-‘यह ब्लोगर मीट थी?’

दूसरा-‘ और क्या थी? मुझे क्या बेवकूफ़ समझ रखा है जो इतने देर से बात कर रहा हूं। मैं केवल मीटिंग में ही बोलता हूं। मेरे पास फ़ालतु समय नहीं है। और हां, इस पर कोई हास्य कविता मत लिख देना। मुझे वह बिल्कुल पसंद नही है।फ़िर कमेंट नहीं लिखूंगा।’

वह चला गया। पहले ब्लोगर ने यह सोचकर चैन की सांस ली ऐक तो घर में यह किसी को पता नहीं लगा कि वह ब्लोगर था दूसरा उसने हास्य कविता के मनाही की थी हास्य आलेख की नहीं।

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