राम तो राजा थे


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कोई पूछता है
कि रामजी ने इंजीनियरिंग की डिग्री
किस विश्वविद्यालय से पायी
कोई जवाब देता है  कि
उन्होने विश्वामित्र के गुरुकुल
में ग्रहण की शिक्षा
लंका तक पुल बनाने में
जुटे थे वानर तब रामजी ने
सुपरवाईजर की भूमिका निभाई

कहैं दीपक बापू
राम पर जो सवाल उठाएं
उनसे बहस क्या करें
क्योंकि खत्म नहीं होगा
उनके निरर्थक सवालों का पिटारा
पश्चिमी संस्कृति ने
उनकी बुद्धि की राह भटकाई
नख से लेकर शिख तक अहंकार में
पूरी ज़िन्दगी उन्होने बिताई
पर आपति तो हमें रामजी को
सुपरवाईजर और इंजिनियर
कहने पर भी आयी
क्योंकि वह तो राजा थे
आज के राजपुत्र भी कौन इनीनियरिंग की
डिग्री लेकर कौंनसे सेतु बनाते हैं
सब ही राजनीतिक कुर्सी के तलाश में
जुट जाते हैं
फ़िर रामजी तो आज भी हैं घट-घटवासी
लिख गए तुलसी महाराज
‘होए वही जो राम रचि राखा’
इंजीनियर और सुपरवाईजर
न सेतु बनाए न बनवाएँ
वह तो केवल खींचे खाका
ले वेतन और कमीशन
पक्के होने का प्रमाण देते
ढह जाये तो भी उनका नहीं होता बाल बांका
पिता की आज्ञा पर राजपाट छोड़
गए वन को उन त्यागी रामजी से
उनकी क्या तुलना
जो करते हैं जीवन भर
छ्ल-कपट से माया की कमाई

त्रेता में अंग्रेजी डिग्री वाले
इंजीनियर नही बनते थे
पर फ़िर  भी पुलों  का होता था निर्माण
और वह कभी एसे नहीं ढहते थे
राम तो थे राजा
जो जनहित के लिए निर्माण का ठेका
देते हैं
इसलिये लड़ते रहे दोस्तो
किसीके कहने से रुकोगे तो नहीं
पर रामजी के नाम पर
हिंदी या अंग्रेजी में तुम्हारी ऎसी बात
 हम जैसे अल्पज्ञानी राम भक्तो की
समझ में बिल्कुल नहीं आयी
हम भी क्या करें न छोड़ सकते राम भक्ति
न यह कविताई
इसलिये सीधी सादी  भाषा में
कह दीं अपनी बात
इससे ज्यादा हम नही
दिखा सकते अपनी चतुराई
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