चजई -ब्लोगर व्यवसायिक मर्यादाओं का पालन करना सीख लें


समय के साथ बदलाव आते हैं और अंतर्जाल पर ब्लोग लेखन भी बढ़ता जा रहा है ऐसे में कुछ ब्लोगरों को यह समझना जरूरी है कि व्यवसाय और साहित्य की कुछ मर्यादाएं होती हैं और उनको इसका पालन तो करना ही होगा अन्यथा विवाद और बढेंगे. अगर आप व्यावसायिक ब्लोगर बनना चाहते हैं और चाहते हैं कि बाजार हमें गंभीरता से ले तो इन मर्यादाओं को भी समझना होगा.
ब्लोग जगत में कुछ लोग शौकिया लेखन कर रहे हैं तो कुछ इसमें व्यवसाय भी ढूंढ रहे हैं. मैं तो एक मिशन लेकर यहाँ आया हूँ और अपना लेखन लोगों तक पहुँचाना ही मेरा उद्देश्य है और मुझे इससे कहीं से एक भी पैसे की कोई आशा नहीं है पर इधर सुनने में आ रहा है कि बाजार भी इधर देख रहा है तो व्यवसाय के नियम तो पालन करने होंगे जैसे
१.आप अगर किसी के ब्लोग को अपनी पोस्ट पर लिंक दें तो ब्लोग का या ब्लोगर का नाम अवश्य दें, क्योंकि शीर्षक से लिखने वाले का कोई प्रचार नहीं होता और आप भले ही पैसा नहीं कमा रहे हैं पर नाम तो हो रहा है तो दूसरे की मेहनत पर उसको नाम भी न दिलवायें तो यह गलत है और व्यवासायिक मर्यादा के प्रतिकूल है.
२.आप अगर किसी ब्लोगर को पुरस्कार या सम्मानित करना चाहते हैं तो यह आपका अधिकार है और आप उसके समर्थन में चाहे जैसा लिखें और कहें पर किसी अन्य ब्लोग या उसके लेखक को प्रचार में कमतर दिखाकर यह काम नहीं कर सकते. आपने तमाम तरह के विज्ञापन देखें होंगे उसमें हर कोई अपने प्रोडक्ट का प्रचार तो करता है पर अपने प्रतिद्वंदी के प्रोडक्ट की निंदा नहीं कर सकता. यह नियम और कानून के खिलाफ है.

साहित्य को लेकर आप चाहे या न चाहें लिखने वाले यहाँ आयेंगे ही. आप समझ लीजिए इस देश के अनेक हिन्दी साहित्यकार अब यहाँ आने के लिए तैयार हो रहे हैं और कविता आपको पसंद हो या न हो पर उनको लेकर टिप्पणियाँ न करें तो अच्छा. क्योंकि हम तो लिखते हैं और हमने तो तय किया है कि ऊपर पोस्ट पर ही लिख देंगे कि कविता है या आलेख-जिसको पढ़ना पढे या न पढे. आप ताज्जुब करेंगे लोग चौपालों पर भी पढ़ते हैं.
इस विषय में मेरा इतना कहना ही है कि व्यावसायिक और साहित्यक मर्यादाओं का पालन करें. इसे आप मेरा घोषणा पत्र भी समझ लें क्योंकि अब इसके बाद किसी को नहीं समझाऊंगा. पिछले कुछ दिनों से मैं जो कह रहा था उस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा था और यह आखिरी बार समझा रहा हूँ ताकि लोग मेरे साथ ही नहीं बल्कि सब लोगों के साथ न्याय कर सकें. मैं साहित्यकार हूँ और मेरी दिलचस्पी इस बात में है कि कोई मेरा इस्तेमाल करे तो पैसे न दे दो नाम तो दे. इस आलेख को मैं केवल इसलिए लिख रहा हूँ कि हम सब लोग आपस में मित्र बने रहें. यहाँ सभी ब्लोगर सरल और सहज भाव के हैं पर थोडे गलती बहुत बडे तनाव को जन्म देती है और उससे बचा जा सकता है तो क्यों न बचा जाये. मेरे मन में केवल एक ही बात रहती है कि हिन्दी ब्लोगर भी कमायें ताकि और अच्छा लिख सकें और यह तभी संभव है जब हम एक दूसरे को सम्मान देते हुए आगे बढेंगे.मैंने यह लेख किसी खास एक प्रसंग में प्रस्तुत नहीं किया क्योंकि ऐसे कई बार अवसर आये हैं तब लगता है कि अपने लोगों से अपनी बात कहते रहना चाहिऐ.

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टिप्पणियाँ

  • mehhekk  On जनवरी 17, 2008 at 05:03

    oh yes,there r some rules for blogging and everbody should follow them,by thhat way there will be healthy enviornment.

  • vermamahesh7  On जनवरी 17, 2008 at 15:36

    आपका कहना बिल्कुल सही है, पर अभी तक मुझे यह पता नहीं चल पाया कि क्या हुआ जो आप इतने गुस्से में हो गए। कृपया जानकारी देने का कष्ट करेंगे।

    महेश
    http://popularindia.blogspot.कॉम
    E-mail ID : vermamahesh7@gmail.com

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