शेयर बाजार के उतार-चढाव चलते रहेंगे-आलेख


सेंसेक्स का लुढ़कना कोई बड़ी खबर नहीं होती थी पर पिछले कुछ वर्षों से अनेक लोगों ने म्यूचल फंडों में पैसा लगाना शुरू किया है उसमें ब्याज भी बहुत अच्छा मिल जाता है। कुछ प्रतिष्ठित कंपनियों के शेयर भी लोग खरीद रहे हैं उनके लिए यह शेयरों के भाव गिरना चिंता की बात है।। आज मेरा एक मित्र मिला। वह चिंतित दिखा और मुझसे पूछने लगा”-यार, मैने कुछ दिन पहले एक कंपनी के शेयर खरीदे थे। उसके रेट गिर रहे हैं।”

उसकी बात सुनकर मुझे ताज्जुब हुआ और मैने कहा-“क्यों तुम तो अपना पैसा बाजार और लोगों में चलाते थे फिर अचानक इधर कहाँ मुड गए? और तुम तो पढे-लिखे होने के बावजूद इस लाइन में अधिक नहीं जानते फिर शेयर कब से खरीदना शुरू किये।किससे सलाह ली थी।”

वह बोला -”यार एक तुम्हारी तरह मेरा मित्र है और मेरे साथ ही काम करता है उसने जब पैसा लगाए तो मैने भी लगाय। कुछ तो म्यूचल फंड में लगाए और कुछ बड़ी कंपनियों में लगाये समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूँ?”

उसने जब कंपनियों के नाम बताए तो मैने कहा-”तुम अधिक मत सोचो और शेयर अपने पास रखे रहो। यह उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगे। इस बारे में मैं भी अधिक नहीं जानता पर शेयर बाजार गिरने के कई कारण हो सकते हैं। तुम तो अपने पैसे लगाते हो पर जो उधार लेकर यह काम करते हैं उनके लिए परेशानी होती है। तुम हाथी जैसी संपत्ति रखते हो और शेयर के डूबने से कोई तुम नहीं डूब रहे। ”

उसने पूछा -”मेरे पैसे डूबेंगे तो नहीं?”

मैने कहा-”मुझे तो नहीं लगता पर अगर तुम इसी तरह शेयर बाजार के उतार -चढाव में डूबे रहे तो मुझे तुम्हारे दिमागी रूप से डूबने के आशंका रहेगी। वैसे भी तुम ग़लत फँसे हो। वह शेयर तुम शायद ही बेच पाओ क्योंकि कम पर तो तुम उनको निकालोगे नहीं और अधिक रेट हुए तब भी यही सोचोगे हो सकता है कि शायद और अधिक दाम बढ़ जाएँ तुम्हारी बहियों और शेयरों से अब मुक्ति संभव नहीं है। सो उसे रख रहो।”

आज कई लोग इस बारे में चिंतित हैं। पिछले कई वर्षों से मध्यम वर्ग के कुछ लोग उच्च मध्यम वर्ग में शामिल हो गया है और उसकी रूचि बैंको में कम ब्याज पर रखने की बजाय अधिक ब्याज और लाभांश पर म्यूचल फंडों और शेयरों में विनियोजन करने के प्रति बढ़ी है। फिर इन लोगों का ध्यान लगाए रखना है तो कभीकभी बाजार का सूचकांक गिरेगा तो कभी बढेगा । इसके रोमांच का भी तो पता चलना चाहिए वरना लोग इसमें पैसा नहीं लगाएंगे।

आजकल तो कई बार ऐसा लगता है की कुछ खबरों की पटकथा लिखी जाती है और बाद में घटना होती है। प्रसंग वश ध्यान आयाकि कल कोई कोइ एक तथाकथित प्रतिष्ठावन ब्लॉगर के ब्लॉग को पढ़ रहा था। उसमें उसने एक अख़बार की कतरन छापी थी ”कीनिया में आज हिंसा का अंतिम दिन” फिर उसने लिखा था की इनको यहा भी मालूम है। वह इससे अधिक नहीं लिख पाए। लिखते कहाँ से हमारा लिखा पढ़ते तो कह पाते की यह भी फिक्सिंग हो सकती है, यह भी कि किसे तरह प्रचार का यह एक खेल है वगैरह वग़ैरह। दिलचस्प बात यह है की यह शख्स उस कतिपय सम्मान की निर्णायक कमेटी में था जिसने हमारे सबसे हल्के ब्लॉग को पाँच की रेटिंग दी और उसके प्रतिवाद स्वरूप हमने भी अपनी जोरदार प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। हम बहुत दिन से उसका हिन्दी के ब्लॉग फोरम पर उसके ब्लॉग का इंतजार कर रहे थे। आदमी तो ठीक लगा, पर कतरन पर उसका कोई विचार न देखकर हमने कमेंट लगा दिया की आप इस पर अपने विचार व्यक्त करते तो अच्छा था। पहले तो विचार आया के कड़ी कमेंट डालें फिर सोचा की नहीं इसने तो हमें एक ऐसा विषय उपलब्ध कराया है जिस पर हम बहुत समय तक लिख सकते हैं। यह आलेख भी वह नहीं पढ़ सकते क्योंकि अगर ऐसे पदकू होते तो कभी ऐसी ग़लती नहीं करते। आदमी हमसे अधिक प्रभा संपन्न दिख रहा था। उनके ब्लॉग परा उनका कोई प्रभावपूर्ण आलेख नहीं दिखा। पर इससे हमें क्या। हमने खबर पढ़ी और अपने विचारों के साथ लिख दी जो वह कर न सके। आख़िर सोना जैसे लिखने और पढ्ने वाले के मित्र हैं। हम यह बात बेखौफ़ होकर इसलिए लिख रहे हैं की यहाँ अपने फोरम पर अधिक लोग हैं नहीं पढ़ने वाले और पाठक वर्ग भी दूर-दूर तक फैलता जा रहा है तो उसे भी हिन्दी ब्लॉग पर चल रही गतिविधियों के बारे में जानकारी होती जाए।

पाठकों एक बात बता दें हम वहाँ फ्लॉप ब्लॉगरों में माने जाते हैं और इसलिए कई चीज़ें ऐसी लिखा जाते हैं जो वहाँ हिट होने की स्थिति में नहीं लिख पाते। ब्लॉगरों के बारे में तो आलेख के इतना नीचे लिखो की वह वहाँ पढ़ ही नहीं पाएँ और पाठक हमारे लेख का पूरा आनंद भी उठाएँ। हमें तो लिखने और पढ़ने के दोनों के मजे लेने हैं.

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