नंबर १३६ चलेगा नहीं बल्कि दौड़ेगा-हास्य व्यंग्य


भारत का सबसे लोकप्रिय ब्लोग कौनसा है? किसी साईट में शायद कोई भारत के हिन्दी ब्लोगरों के अते-पते प्रकाशित हुए हैं उसके कर्णधारों को पता नहीं है और या छुपा रहे हैं कि भारत के हिन्दी ब्लोगों में सबसे लोकप्रिय ब्लोग किसी चौपाल पर पंजीकृत नहीं है. अब मैं व्यंग्य लिखना नही चाहता पर ब्लोग के मित्र हो या निजी, शरारत करने से बाज नहीं आते तो फिर मैं ही क्यों संयम दिखाऊँ. ठोक ही देता हूँ व्यंग्य.

निजी मित्र कहते हैं कि तुम और कुछ नहीं केवल चिंतन लिखो और यह भी कि केवल ब्लोगरों के लिए मत लिखो हमारी समझ में नहीं आता. ब्लोग मित्र भी साफ नहीं लिखते पर जहाँ महापुरुषों के साथ कहीं थोडा भी चिंतन होता है वहाँ कमेन्ट बडे उत्साह से लगाकर अप्रत्यक्ष संकेत दे जाते हैं कि कुछ अपना लिखा करो. अब मैंने सोचा था यही करेंगे और बेकार हैं व्यंग्यों पर अधिक मेहनत करना. इतने सारा लिखा पर नतीजा १३६ नंबर. चलो कोई बात नहीं पर तिस पर हमारे प्रिय श्री अनिल रघुराज जी जैसे मित्र चिट्ठी डाल गए जैसे कह रहे हों’आकर देखो अपना हाल.”

उनके ब्लोग पर गए अपने हाल देखे. फिर उस साईट पर गए जहाँ से कभी-कभी एकाध बार व्युज आया है और वह भी शायद तब जब वह लिंक कर रहे होंगे. आप नहीं जानते पर ब्लोग पर कुछ लोग जानते हैं कि सबसे लोकप्रिय ब्लोग कौनसा है. गाहे-बगाहे उसकी चर्चा हुई है. अब अधिक पोल मत खुलवाओ क्योंकि उसकी चर्चा अपने फोरमों पर हो चुकी और उसकी प्रसिद्धि खामख्वाह में बढ़ जायेगी. हाँ एक बात बता देता हूँ कि अपना भी कोई ब्लोग कभी शिखर पर आएगा. मैं भी अब नये प्रयोग कर रहा हूँ और इसमें कितनी सफलता मिलेगी यह अलग बात है. इशारों में बात है और कुछ लोग इसे समझेंगे ही. अंतर्जाल है कि इन्द्रजाल शीर्षक से लेख मैंने ऐसे प्रयोग से प्रभावित होकर ही लिखा था.

जैसे-जैसे आगे जा रहा हूँ नित नयी सूचनाएं आतीं हैं. मुझे ऐसा याद आ रहा है कि मैंने अपने किसी साथी ब्लोग की पोस्ट में पढा था कि अब कोई ऐसा टूल आ रहा है जिसमें किसी भी भाषा में पढ़ सकते हैं. मतलब अगर हम हिन्दी में लिख रहे हैं तो उस कोई अंग्रेज उस टूल से पढ़ सकता है. फिर उस दिन एक भारत का एक अंग्रेजी ब्लोगर कमेन्ट में लिख गया कि ”A language is not a problem for communication nowadays, There are various advanced tools available for removing the language barrier, the problem is different. Most of the people are either not aware of these tools or they don’t know how to use them.
Like the google transliteration features an embedded dictionary which accompanies the writer to write without flaws. With the increasing intelligence in the tools, I hope, it will be easier in upcoming days.”

मैंने उस ब्लोगर का नाम इसलिए नहीं दिया क्योंकि अभी एक अन्य अंग्रेजी ब्लोगर मित्र प्रीतम पी हंस जी की कमेन्ट को पोस्ट में डाला तो अब उन्होने भी अपना के हिन्दी ब्लोग शुरू कर दिया है. अब मैं किसी अंग्रेजी लेखक को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं बनाना चाहता. वैसे ही तो फ्लॉप हैं. अभी तो १३६ पर हैं कहीं १३७ पर पहुंच गए तो. इससे तो अच्छा है अंग्रेजी वाले को वहीं लिखने दें.

अब बात करें इस टूल की तो पता नहीं आया है क्या? पर कभी-कभी एकदम अंग्रेजी के नाम से सुशोभित कुछ कमेन्ट देखकर विचार उठता है कि क्या उन्होने मेरी रचनाएं पढी होंगी? उनके लिखे से ऐसा लगता है कि उन्होने पढा होगा. हो सकता है कि कुछ लोगों के पास ऐसा टूल हो और उसकी मुझे तो जरूरत नहीं है क्योंकि अभी में हिन्दी का ही पूरा नहीं पढ़ पाया तो अनुवाद कर क्या पढूंगा? मेरी रचनाएं चोरी भी नहीं होती कि अंग्रेजी वाले उसे उठाएंगे. हाँ जिनकी रचनाएं चोरी होतीं हैं उन्हें चेत जाना चाहिऐ.

आप बात करें लोकप्रियता की. हम जिस राह पर चल रहे हैं उसका अनुमान किसी को नहीं है कि वहाँ कहाँ जाती है. लोकप्रियता का कोई पैमाना नहीं है. कोई नंबर वन पर नहीं होगा और होंगे तो उनकी संख्या कम से कम १०८ होगी. मेरा शब्द्लेख सारथी ब्लोग मेरा सबसे लोकप्रिय ब्लोग हैं और उसके बाद आता हैं अनंत शब्द योग का. यह ऐसे दो ब्लोग हैं जिन पर मैं नियमित नहीं भी लिखू तो हिट्स आते हैं. इनसे ही मुझे समझ में आता है कि ब्लोग पर लिखी जाने वाली सामग्री का क्या महत्त्व है.

भारत के सबसे लोकप्रिय ब्लोग का नाम मैं इसलिए नहीं दे रहा क्योंकि अब जैसे-जैसे लिखते जा रहे हैं वह जल्दी अपनी आभा खो बैठेगा क्योंकि वह तब शुरू किया गया होगा जब हिन्दी में इतनी सामग्री नहीं होगी जितनी अब हैं. उस ब्लोग पर मैं एक अन्य ब्लोग पर लिखे पते से ही गया था. एक अन्य ब्लोग से जानकारी आई कि वह हिट क्यों है? एक भ्रम शायद ब्लोगरों को है कि केवल चौपाल पर ही हम लोग एक-दुसरे को पढ़ते हैं और आम पाठक कोई नहीं है. मैं अपनी पोस्टों में इसका उल्लेख करता आया हूँ कि जिन पोस्टों को फोरमों पर दस व्युज भी नहीं मिलते वह महीनों तक उससे अधिक तो आम पाठक द्वारा पढी जातीं है और उके लिए ब्लागरों से मिलने वाली तात्कालिक टिप्पणी का मोह छोड़ना जरूर होता है.

मैं अंतर्जाल पर हिन्दी के भविष्य को लेकर बिलकुल चिंतित नहीं हूँ इसलिए लिखता जा रहा हूँ और सबको भी यही सलाह देता हूँ कि तुम लिखते जाओ. बाकी उस वेब साईट के बारे में तो कई लोग लिख चुके हैं. अंतर्जाल और कौन किसको देख रहा है. कोई भी वेब साईट बना सकता है और हिन्दी के ब्लोग को अपने हिसाब से लिख सकता है. वैसे १३६ नंबर में १३ का अंक मुझे फलता नजर आ रहा है इसलिए लिख रहा हूँ कि कहीं हो सकता है कि नंबर सीधे १३ पर आ जाये. एक नंबर तो खैर क्या बनेगा. कम से कम एक बात की तो खुशी है कि श्री अनिल रघुराज जी नी अपनी पोस्ट में हमारे ब्लोग को सम्मान दिया. इससे अधिक हमें क्या चाहिऐ.

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टिप्पणियाँ

  • Pritam P Hans  On मार्च 5, 2008 at 09:37

    दीपक जी को ई शिकायत है की हम हिन्दी क्यों लिखते हैं|
    दीपक जी, एक बार पूजा भट्ट को एक साक्षात्कार मे कहते सुना की वो अंग्रेज़ी मैं सोचती हैं, हिन्दी मैं नहीं| और वो फिल्में बनाती हैं हिन्दी में| मैं काम तो अंग्रेज़ी मैं करता हूँ पर सोचता हिन्दी मैं हूँ| तो सोचा हिन्दी मैं भी लिखूं|

  • Pritam P Hans  On मार्च 5, 2008 at 19:11

    दीपक जी, तारीफ के लिए शुक्रिया| अच्छा तो नही पर ठीक-ठाक लिख लेता हूँ, वो भी आपलोगों की नक़ल करके|
    नारद पर मेरा ब्लॉग है, वहाँ से कुछ लोग आए थे| ब्लोग्वानी का कुछ पता नही|

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