ब्लोग पर हिट्स:कितने सच्चे और कितने फर्जी


मेरे लिए कोई भी हिन्दी ब्लोग का फोरम खास नहीं है और मुझे इनके किसी कर्णधार से कोई शिकायत भी नहीं है, पर हाँ पिछले कुछ दिनों से ब्लोग वाणी पर कुछ ब्लोगरों के अधिक हिट देखकर कुछ ब्लोगरों को विचलित होते देख मुझे लगा की आज अपनी बात कहनी चाहिए -क्योंकि मुझे भी इस फोरम से हिट मिलते हैं पर वह मेरे लिए अधिक मायने नहीं रखते.

बात हिन्दी ब्लोग दिखाने में पहल करने वाले नारद फोरम से ही शुरू करें. अपना ब्लोग शुरू करने के चार माह बाद मैं वहाँ पर आया था, वह भी कुछ ब्लोगरों के सन्देश मिलने के बाद. आप यकीन करिये जहाँ मैंने पहले खुद वहाँ पंजीकृत कराने के लिए असफल प्रयास किया था और बाद में जब कुछ मित्रों के कहने पर अपना ईमेल भेज रहा था तो अधिक खुश नहीं था पर समय बलवान है और वहाँ मित्र मिलते गए और अब ४ अप्रैल को इस सफत को एक वर्ष पूरा होना है. ब्लोगवाणी, चिट्ठाजगत और हिन्दी ब्लोग के बनने के बावजूद भी ब्लोगर नारद से कहीं और जाना नही चाहते थे. नारद खराब तो सबके मूड खराब. एक दिन नारद से परेशानी आई तो एक महिला ब्लोगर ने उसमें अपनी पोस्ट न दिखने की शिकायत की जबकि मैंने उसकी पोस्ट को ब्लोगवाणी पर देखा. नारद फोरम वाले नाराज न हों इसलिए मैंने एक पोस्ट लिखी”नाराद का मोह न छोड पर पर अन्य चौपालों पर भी जाएं”. इसका प्रभाव हुआ और ब्लोगर इधर-उधर फैले पर इसके लिए मैं कोई श्रेय नहीं लूगा क्योंकि वहाँ फिर दोष भी मुझे लेना पडेगा. नारद के कर्णधार चूंकि हिन्दी ब्लोग जगत में एक अच्छा माहौल बनाए रखना चाहते थे इसलिए उन्होने अपने यहाँ पोस्ट के हिट दिखाना बंद कर दिए और यह था ब्लोग वाणी के अभ्युदय का कारण. शायद कुछ इस पर सहमत न हों पर इसके अलावा और कोई तर्क नहीं हैं. अधिकतर ब्लोग पने हिट्स देखने के इरादे से ब्लोग वाणी पर आते हैं.

ब्लोगवाणी पर हिट्स दिखते हैं और कल यह कहीं अन्य फोरम ने शुरू कर दिए तो? नारद फिर चमक जायेगा और उनको ऐसा करना नहीं चाहिए. नारद के हिट्स पर चर्चा जरूरी है. हम तो वहाँ भी हिट नहीं थे. आजकल मेरे परम प्रिय मित्र परमजीत बाली बहुत अच्छा लिख रहे हैं पर उस समय उनकी चार लाईने नंबर वन पर चली जातीं थी. वह मुझे कमेन्ट देते पर जब मैं देने जाता तो लौट आता सोचता यार यह आदमी भी अजीब है और ब्लोगर भी अजीब हैं. मैं इतनी मेहनत से लिखता हूँ और पांच भी हिट्स नहीं मिलते. एक समय तो मैं चिढ गया कि यार बेकार अपना ब्लोग यहाँ दिखाने के लिए लाये. अंतर्जाल को फोरमों तक ही सिमटा मान लिया था. आज जो आप अनेक ब्लोग देख रहे हैं वह उसी समय की देन हैं. मेरे दो ब्लोग तो बिअना किसे चौपाल की सहायता से वर्डप्रेस में नंबर वन पर चले गए क्योंकि उसमें कवितायेँ और व्यंग्य थे जो मैंने चौपालों के ब्लोग पर कभी नहीं लिखे थे क्योंकि वहाँ इस तरह की पोस्ट के लिए आज भी अधिक हिट नहीं मिलते और जब मैं लिखता हूँ तो मेरा लक्ष्य आम पाठक होता है.

नारद पर एक दिन एक ब्लोग लेखक ने अपनी पोस्ट में अपनी हैरानी जताते हुए लिखा कि मुझे आधे घंटे में चालीस हिट्स मिल गए तो उस पोस्ट पर कुछ ब्लोगरों ने लिखा कि ‘हमारे चार गिन लेना’ और हमारे पांच गिन लेना”. तब मैंने समझ लिया कि यह हिट्स दोस्तों की कृपा से भी अधिक मिलते हैं. अगर जरूरत पडी तो माने उस ब्लोग और उस पर कमेन्ट लिखने के नाम भी बता सकता हूँ हालांकि वह सब मेरे मित्र हैं पर इस तरह हिट्स देने के लिए नहीं. लिखते अच्छा है और मेरे को आज भी कमेन्ट देते हैं.
इन सबसे मेरा उत्साह ख़त्म भी हो गया था और कम ही लिख रहा था पर धीरे-धीरे मुझे लगने लगा कि मैं तो आम पाठक के लिए लिखने आया हूँ और वह इन चौपालों पर नहीं आएगा बल्कि उसके आने के रास्ते और भी हैं. यह सोचकर फिर मैंने लिखना शुरू किया और आज इन चौपालों से जितने भी हिट्स आते हैं और उनसे मैं संतुष्ट हूँ और दूसरों से काम होने का मतलब यह नहीं है कि अपने को फ्लॉप समझ लूं. अगर आपके पास कमेन्ट कम है तो इसके लिए खुद जिम्मेदार हैं क्योंकि उसके लिए आपको भी पहल करनी होगी. मेरे को कुछ मेरे चुनींदा मित्र ही कमेन्ट देते हैं और वह अच्छा लिखते हैं. आप यकीन मानिए जिन परमजीत बाली से मैं चिढ़ता था पर अब उनके हिट्स अधिक देखूं तो मुझे हार्दिक प्रसन्नता होगी. वजह वही खुद लिखने के अलावा दूसरों को प्रेरित भी करते हैं. हाँ मैं अपने मित्रों से यह अपेक्षा कभी नहीं करता कि वह चार-पांच बार आनाव्श्यक रूप से ब्लोग खोलकर ब्लोग वाणी पर मेरे हिट बढाएं-क्योंकि इसमें मेरी दिलचस्पी न के बराबर हैं. अगर मेरे लिखे से स्वत: आयें तो मुझे अच्छा लगता है. अन्य लोग भी जो इन हिट्स को देखर कर राय बनाते हैं इस बात को समझ लें.

हिन्दी ब्लोग जगत में कई अच्छा लिख रहे हैं यह देखकर मुझे खुशी होती है और ब्लोग वाणी के हिट्स कोई अब अच्छे बुरे का प्रमाण नहीं हैं. ब्लोग या ब्लोगर के विषय पर लिखने तो खूब हिट्स आयेंगे. मैंने कई बार लिए हैं पर वह मेरी पोस्ट आम पाठक के लिए एक कोडी की भी नहीं होती. निजी मित्र नाराज होते हैं कि यार तुम कहाँ फालतू विषय पर लिखते हो और उनका कथन एक आम पाठक के मनोभाव का प्रतीक होता है. नारद पर जो पोस्टें औंधे मुहँ गिरीं वह आज तक पढी जा रहीं हैं. अधिक दूर क्यों जाएं. हाकी पर लिखी गयी पोस्ट पर चौपालों पर केवल एक व्युज था पर आज उस पर पांच हैं कल उस पर सात थे.

अंतर्जाल एक बहुत बड़ा मायाजाल है. इन चौपालों का महत्व हमारे मनोबल बनाए रखने और आपस में मैत्री भाव रखने के लिए बहुत अच्छा है पर यह हमारी पोस्ट की भाग्य विधाता नहीं है और यहाँ के हिट्स मैं बता चुका हूँ कि अधिक भरोसे लायक नहीं हैं. कुछ ब्लोगर लेखक बहुत अच्छा लिखते हैं और उनको यहाँ के हिट्स के परवाह नहीं है इसलिए वह सदाबहार विषय पर लिखते हैं और उनका हिन्दी ब्लोग जगत में अपना मुकाम रहेगा चाहे भले ही इन चौपालों पर फ्लॉप हो. एक आम पाठक चाहता है कुछ पढ़ना और ब्लोगरों के प्रिय विषय उनके लिए महत्वहीन हैं. मैंने एक विषय पर दो लेख देखे थे. इसमें एक बहुत छोटा और अधिक प्रभावशाली भी नहीं था पर हिट्स और कमेंट अधिक थे और उसके मुकाबले एक लेख बहुत बड़ा और प्रभावशाली था उस पर उसके चौथाई भी नहीं थे. इसलिए नये और फ्लॉप ब्लोगर अपनी पोस्टों का मुहँ आम पाठक की तरफ खोलकर लिखें मतलब यह कि वह पंद्रह दिन बाद भी किसी पाठक के पास से गुजरे तो उसे ताजा लगे चाहे वह क्षणिकाएँ ही क्यों न हों?यहाँ जिन ब्लोगरों को अधिक हिट्स मिलते हैं उसके चार कारण है
१. वह अपने स्वभाव के कारण लोकप्रिय हैं
२.वह पुराने हैं और अच्छा लिखते हैं
३.वह खुद अधिक से अधिक कमेन्ट लिख कर दूसरों को प्रेरित करते हैं
४.वह खुद और उनके मित्र उनको हिट दिखाने के लिए मेहनत करते हैं
मगर यह सब वह हैं जो तबसे आपसे में जुडे हैं जब हिन्दी ब्लोग जगत में कम लोग थे और ऐसे में व्यक्तिगत संपर्क आसान से विकसित किये जा सकते हैं. अब यह क्षेत्र व्यापक हो गया है जो संपर्क संयोग से बन जाये वह ठीक है पर उसके लिए प्रयास करने का मतलब है अपने रचनाकर्म से परे होना और वह अंतर्जाल पर हिन्दी के बढ़ते क़दमों के साथ तुम्हारे कदम मिलाकर चलने से वह रोकेगा. इन हिट्स में कितना सच है और कितना फर्जीवाडा यह तो कहना मुश्किल है पर है जरूर! नहीं तो नारद ने यह हिट्स बंद कर ब्लोग वाणी को बढ़ने का अवसर क्यों दिया था.

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टिप्पणियाँ

  • mehhekk  On मार्च 18, 2008 at 06:07

    har alfaz se sehmat hai apke,bahut acha lekh.hits par post ki kamyabi nahi hoti,kabhi kabhi hum bhi padhte hai aur comment nahi kar pate,computer problem,samay ka abhav,may be the reason,but the writing always keeps its “chap”on mind,man mein hi tariff ho jati hai,wah gazab.

  • shubhashishpandey  On अप्रैल 15, 2008 at 17:41

    bilkul sahi dipak babu, hits se aap humesha ye andaza nahin laga sakte ki ye lekh achha hoga, humne to ye dekha hai ki log aise – aise shirshak(title) daal dete hain jinka us lekh se koi sambandh nahin hota lekin haan hits jarur badha jate hain.
    kuchh log blog is liye likhte hain ki unke kuchh maulik vichar hain jo vo logo ko pahuchana chahte hain to kuchh log blog sirf isliye likhte hain kyuki log likh rahe hain……. ab khir ye bahas bhi chhoti kahan ……..

  • shubhashishpandey  On अप्रैल 15, 2008 at 17:45

    bilkul sahi dipak babu, hits se aap humesha ye andaza nahin laga sakte ki ye lekh achha hoga, humne to ye dekha hai ki log aise – aise shirshak(title) daal dete hain jinka us lekh se koi sambandh nahin hota lekin haan hits jarur badha jate hain.
    kuchh log blog is liye likhte hain ki unke kuchh maulik vichar hain jo vo logo ko pahuchana chahte hain to kuchh log blog sirf isliye likhte hain kyuki log likh rahe hain. blogvani bhi to logo ko khush karne pe laga hua dikhayi deta hai kai baar wordpress kul milakar bhi uspost ke liye utne hits nahin dikhata jitne blogvani akele dikha raha hota hai :)…… ab khair ye bahas bhi chhoti kahan ……..

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