कभी-कभी ऐसा भी होता है-आलेख


              अगर देखा जाये तो ब्लागवाणी फ्लाप ब्लागरों के लिये अपने प्रचार के लिये बिल्कुल उपयोगी नहीं है। अधिकतर ब्लागर ब्लागवाणी पर आते हैं तो  वह याद रखें कि उनसे कोई मिलने वाला घर मिलने आये तो उसे अपने ब्लाग दिखाते हैं तो उसके बाद  कोई फोरम दिखाना हो तो कभी ब्लागवाणी पर न ले जायें क्योंकि अगर किसी ने पूछ लिया कि यह पोस्ट के आगे अंक होने का क्या मतलब है और आपने सज्जनता  से बता दिया कि यह पढ़ने वालों की संख्या है तो आपका भांडा फूट जायेगा। भले ही आपने पूरी ईमानदारी बरती हो पर बाहर वह सबको बता देगा कि आप फ्लाप हैं-क्योंकि मेरे हिसाब से अधिकतर ब्लाग बहुत सहज और सरल भाव के हैं क्योंकि लिख तो वही सकता है जो ऐसा हो।

आज एक सज्जन आये थे शादी का कार्ड देने और मुझसे अपना कंप्यूटर दिखाने के लिये बोले तो मैं उनको वहां तक ले आया और जब उन्होंने इंटरनेट कनेक्शन देखा तो पूछा-‘‘इस पर क्या करते हो?

मैने कहा-‘‘ब्लाग लिखता हूं। तुम समझो तो अपनी निज पत्रिका प्रकाशित करता हूं।’’

ब्लाग से वह समझ नहीं पाते इसलिये मैने उनको निज पत्रिका कहा और उनके समझ में भी आ गया। फिर मैने उनको अपने ब्लाग दिखाये और अन्य फोरम दिखाता हुआ ब्लागवाणी की तरफ ले गया। मैने कहा कि इन एग्रीगेटरो को तुम एक अखबार भी कह सकते हो और हमारे ब्लाग यहां एक पृष्ठ की तरह हैं। वह देखते रहे और जब मैं अपने ब्लाग की तरफ आया और अपने व्यूज देखे तो वहां से तत्काल आगे कर्सर निकाल ले गया। बाद में उन सज्जन ने अपनी कुछ बेव साइट देखीं और विदा हो गये।

तब मैं सोच रहा था कि अगर यह मैं उनको बता देता कि यह  मेरे ब्लाग की पाठक संख्या है तो वह क्या सोचते? अब उसके लिये फिर उनको वर्डप्रेस या स्टेट काउंटर दिखाने पड़ते। कुल मिलाकर तब यह लगा कि ब्लागवाणी अपने लिये तो ठीक है पर हम किसी और को अपना ब्लाग वहां दिखायें यह हम फ्लाप श्रेणी के ब्लाग को नहीं करना चाहिए। हालांकि वहां हिट होना कोई मुश्किल काम नहीं है पर उसके लिये पोस्टें भी ऐसीं होना चाहिए जो ब्लागरों के मतलब की हों पर वह फिर आम पाठक को दिखाने के मतलब की नहीं होतीं।  हमारे जो दोस्त अंतर्जाल पर देखते हैं वह ऐसी पोस्टों पर नाराज होते हैं। मैने एक मित्र को बता दिया कि अगर ब्लागवाणी पर जाये तो वह पढ़ने वालों की संख्या कतई नहीं देखे नहीं तो उसे दुःख होगा। एक दिन वह ब्लागवाणी से घूमफिरकर आया और बोला-‘‘तुंम ठीक हो अपनी राह चलो। वहां जाने की बजाय तो मैं तुम्हारे  ब्लाग पर लिंकित ब्लाग ही पढ़ लिया करूंगा। हालांकि वहां  कुछ अच्छा लिखने वाले भी हैं और तुम उन सबको अपने उस ब्लाग पर लिंक कर दो जहां से हम दाखिल होते हैं।’

उसने जो वहां हिट पोस्टें देखीं तक उसमें एक-दो में अपठनीय शब्द था जिस कारण उसका मन भी खराब हुआ। हालांकि वह इन फोरमों को देखकर खुश होता है और कहता है कि हिंदी को अंतर्जाल पर पढ़ना ऐसे ही जैसे फाइव स्टार टाइप पढ़ना। एक बात याद रखना मैं कोइै शिकायत नहीं कर रहा न मुझे किसी बात पर एतराज है। एग्रीगेटरों की अपनी दुनियां हैं और मेरी अपनी। अंर्तजाल पर हिंदी लिखने के अभियान के तहत उनसे मेरा संपर्क हुआ है पर इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम लोग एक दूसरे पर अपनी बातें थोपें। एक जगह ब्लाग दिखने के जो फायदे हैं उन्हें नहीं भूलना चाहिए। इसके बावजूद यह तय है कि यह एक मंच है जिस पर हम ऐकत्रित हैं। हालांकि बाद में मुझे इस बात का अफसोस भी हुआ कि मैंने अपनी पाठक संख्या के बारे में उनको क्यों नहीं बताया? आप कह सकते हैं  यह भी वास्तविकता है कि आत्मविश्वास कभी साथ छोड़ जाता है या कभी आप अनावश्यक रूप से कोई बात बताना जरूरी नहीं होता। यह दोनों बातें मेरे मस्तिष्क में एक साथ मौजूद थीं।

मुझे आज अपनी पोस्टों पर लगायीं गयीं कमेंटों  का ध्यान आया जिसमें ब्लागवाणी के हिट्स पर प्रतिकूल टिप्पणियां की जातीं हैं। मैं उन पर ध्यान देता हूं पर कुछ लिखकर फिर भूल जाता हूं। कभी कभी मुझे लगता है कि कुछ ब्लागर इस बात से बहुत नाराज है कि वह वहां हिट्स नहीं ले पाते और मेरा ध्यान उनकी तरफ कभी नहीं जाता आज गया तो सोचा लिख डालूं एक पोस्ट कि भई अंतर्जाल की यह माया है कहीं हिट्स और फ्लाप की माया है। अभी प्रयोगात्मकता का दौर है जब उसके कुछ परिणाम दिखने लगेंगे  उस पर भी लिखेंगे। कौन हिट कौन फ्लाप का फैसला अभी बहुत दूर है शायद इसलिये कुछ ब्लागर लोगों को जाने अनजाने इसमें व्यस्त रखकर ब्लागरों से लिखवा रहे हैं। इस फिर कभी। 

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