अपनी मूल भाषा में लिखने से पाठ में आती है स्वाभाविक मौलिकता-आलेख(2)


किसी भी राष्ट्र, भाषा, जाति, धर्म और और समाज की बौद्धिक शक्ति का केंद्र बिंदू सदैव ही मध्यम वर्ग रहा है। धनाढ्य वर्ग अपने धनार्जन और विपन्न वर्ग अपने अभावों क विरुद्ध संघर्ष से ही समय नहीं पाता और ऐसे में मध्यम वर्ग के लोग ही समय निकालकर समाज के लिये नये विचारों. सिद्धांतों और भौतिक अविष्कारों का सृजन करते हैं। अगर हम हिंदी के आधुनिक स्वरूप की बात करें तो इसी मध्यम वर्ग के लोगों के कारण ही हम उसे इस स्थिति में देख रहे हैं। कोई भी भाषा अपने लेखकों और विद्वानों की रचनाओं से ही विकास करती हैं-और वह आय की दृष्टि से मध्यम वर्ग के ही होते है हालांकि यह जरूरी भी नहीं क्योंकि निम्न आय वर्ग श्रेणी के भी लोग हैं जो मान सम्मान का मोह छोड़कर साहित्य सृजन करते है। आधुनिक हिंदी के जितने भी लेखक हैं वह इन्हीं मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग से हैं। एक समय था जब देश की आजादी और बाद में नये समाज की अभिलाषा से लेखकों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनको शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया और विद्याार्थियों ने उसे पढ़कर हिंदी भाषा का आत्मसात कर लिया। शनैः हिंदी को वह स्परूप मिला जिसमें आज हम लिख रहे हैं।

अधिकतर पुराने लोग बताते हैं कि आजादी के बाद तो यह स्थिति यह हो गयी थी कि पांचवीं से आठवीं पास लोगों को नौकरी लग गयी। ऐसे में लोगों का रुझान शिक्षा की तरफ बढ़ना स्वाभाविक था-आराम और अधिकार से रोटी कमाने का मोह लोगों में बढ़ा। इसी कारण अनेक ऐसे लोग जो रूढिवादी थे उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। फिर शुरू हुआ बेरोजगारी का अनंतकाल तक चलने वाला दौर जिसने धीरे-धीरे ऐसे भ्रामक विषयों का प्रतिपादन किया किया जिनका तर्कों से प्रतिवाद तो किया ही नहीं जा सकता। अंग्रेजों के समय चूंकि अंग्रेजी वालों को ही बड़े ओहदे मिले थे और सरकारी कामकाज में हिंदी को धीरे-धीरे ही स्थान मिला उसकी वजह से लोगों का अंग्रेजी की तरफ झुकाव भी हुआ। समय के साथ हिंदी में सरकारी कामकाज अधिक होता गया पर भ्रम का निराकरण करना फिर भी कठिन था।
फिर हिंदी केवल नारा भी रहा है। अंग्रेजी जानने वाले लोग 2 प्रतिशत भी नहीं रहे पर फिर भी उससे विकास की संभावना रखने वाले लोगों की संख्या अधिक है। मैं कभी भी रूढिवादिता से काम नहीं लेता। मैं तो लोगों से यही कहता हूं कि अगर अंग्रेजी से तुम्हें विकास का मार्ग मिलता है तो हिंदी पढ़ो ही नहीं। उस दिन मेरे एक मित्र ने कहा कि ‘वह अपनी लड़की के लिये अंग्रेजी माध्यम का विद्यालय ढूंढ रहा है अगर कोई हो तो बताओ’।‘

मैंने उससे कहा कि-‘बच्चे में सीखने की क्षमता बहुत होती है। उसे केवल अंग्रेजी में ही पढ़ने के लिये प्रेरित मत करो। आने वाला समय ऐसा भी हो सकता है कि हिंदी न आने की वजह से ही उसे कहीं शर्मिंदा होना पड़े। चूंकि हिंदी हमारी मात्भाषा है इसलिये उसको पढ़ने के साथ अंग्रेजी ज्ञान तो प्राप्त किया जा सकता है पर अंग्रेजी को मुख्य भाषा मानकर फिर हिंदी में विशेषज्ञता कठिन होती है।’

उसने सिर हिलाकर एकदम मेरी बात को खारिज कर दिया। जिस हिंदी को मध्यम वर्ग ने ऊपर उठाया वही आज उससे महत्वहीन समझ रहा है शायद यही कारण है कि हिंदी राजभाषा होते हुए भी तिरस्कृत है। भाषा का विवाद मध्यम वर्ग में ही अधिक है। एक पक्ष उसका पक्षधर है तो दूसरा विरोधी भी हैं। हिंदी भाषा में अंतर्जाल पर लिख रहे लोगों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है तो उसका कारण यह है कि उनको लग रहा है कि अब उनके दिन भी आ सकते हैं। वजह है अनुवाद टूल! जिसको लेकर अनेक ऐसे लोगों के चेहरे इस कारण उतरे हुए हैं क्योंकि वह अंग्रेजी से हिंदी में सही अनुवाद नहीं कर रहा है। अंतर्जाल के हिंदी लेखकों में आत्मविश्वास बढ़ने का कारण यह है कि हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद कुछ अच्छे ढंग से हो रहा है और उनको लगता है कि उनको अब विदेशी पाठक भी पढ़ सकेेंगे। विश्व में सबसे अधिक ब्लाग अंग्रेजी और चीनी में हैं और भाषा की दीवार के ढहने का आशय यह है कि हिंदी भी अब विश्व के मानचित्र पर वैसे ही होने वाली है जैसी अन्य भाषायें हैं।

मध्यम वर्ग में भी अंग्रेजी के प्रति वैसा ही आकर्षण है जैसा पहले था। सभी को लगता है कि अंग्रेजी से ही कहीं नौकरी आदि पायी जा सकती है या विदेश जाने का अवसर भी आ सकता है। सभी को न नौकरी मिलती है न विदेश जाने का अवसर आता है-ख्याली पुलाव में रहने वाले लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी के स्कूल में पढ़ाना शुरू कर यह मान लेते हैं कि अब सारा बोझ अंग्रेजी ही उठायेगी। लोग अंग्रेजी पढ़ लेते हैं पर नियमित अभ्यास न होने की वजह से उसे फिर भूल भी जाते हैं या याद रखते हैं तो अंग्रेजी में कुछ शब्द लिखना भी उनके बूते का नहीं रहता। अगर सारा ही बोझ अंग्रेजी उठाती तो फिर इस देश में बेरोजगारी नहीं फैलती। मैंने की हिंदी टाइपिंग की चर्चा की थी और कहा था कि लोगों को अब हिंदी टाईप अधिक सीखना चाहिए। इसे शायद ही लोग गंभीरता से लें क्योंेकि भ्रम का कोई इलाज नहीं होता। इस पर इस देश मध्यम वर्ग जितना बुद्धि से तीक्ष्ण है उतना ही भ्रमित हुआ भी लगता है। लोग भाषा के महत्व को नहीं समझते बल्कि रोटी वाली भाषा तलाशते हैं। ऐसे में वह दोनों तरफ के नहीं रहते। हम अंतर्जाल पर हिंदी में लिखने वाले लोगों की संख्या को देखकर कहते हैं कि बहुत लोग लिख रहे हैं पर अगर आप जमीन पर उतर कर देखें तो पायेंगे कि सभी अपने अपने इलाकों में उंगली पर गिनने लायक होंगे-हम यहां इस विषय पर चर्चा नहीं कर सकते कि उनके लिखने की सार्थकता कितना है।
मुख्य बात यह है कि मध्यम वर्ग इस समय अभी निरर्थक रूप से अंग्रेजी के मोह पाश में जकड़ा हुआ है जिसका परिणाम यह है कि उसके लोग न तो हिंदी में अच्छी तरह लिख पाते हैं और अंग्रेजी में लिखें तो उसे पढ़ेगा कौन?
फिर संवाद के तीव्र साधनों ने लिखकर अपनी बात कहने की परंपरा को समाप्त ही कर दिया है। मोबाइल पर घंटों बात हो जाती है पर एस.एम.एस तीन चार लाईन का ही होता है। उसमें भी कई बार कहीं से कापी किये गये अंग्रेजी में शुभकामना संदेश मिलते है। लिखने वाले का हिंदी और अंग्रेजी के अल्पज्ञान का अहसास होने के कारण उस टिप्पणी करने को भी मन नहीं करता।

किसी ने एक ब्लाग पर टिप्पणी की थी कि ‘हिंदी नयी भाषा है और वह एक दिन पूरे विश्व में परचम फहराएगी क्योंकि यह प्रकृति का भी नियम है।’ मैं उस टिप्पणीकर्ता का नाम भूल गया पर यह बात मेरे ध्यान में थी और उनकी बात से मैं सहमत था। जो लोग इस बात को समझेंगे वही आग लाभ दायक स्थिति में रहने वाले हैं। हिंदी केवल भारत में भारतीय बोलेंगे, पढ़ेंगे और समझेंगे अब यह कोई अनिवार्य बात नहीं रही! यह बात समझनी होगी और इस बात का ध्यान रखना होगा कि आने वाली पीढ़ी को हिंदी का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए। संभव है कि आगे ज्ञान की पुस्तकें पहले हिंदी में आये और बाद में उनका अन्य भाषाओं में उसका अनुवाद हो। देश की प्रतिभाओं पर अविश्वास करने कोई कारण नहीं है। ऐसे में अंग्रेजी मोह पालने वालों को हिंदी के भविष्य पर विचार करते हुए ही आगे बढ़ना चाहिए-जिसके बारे में अनेक लोग लिखते आ रहे है।।

Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: