आलोचना किसी की, बिफरता कोई और है-आलेख


हिंदी ब्लाग जगत में नित नये अनुभव होते हैं। यह पता ही नहीं लगता कि कोई उसी बात पर नाराज हो रहा है जिस पर बता रहा है या कोई अन्य कारण है। कभी कभी तो लगता है कि कोई पुरानी बातों से त्रस्त होकर ऐसे विषय पर आलोचना ऐसे विषय पर तो नहीं कर रहा है जिससे उसका संबंध नहीं है। फिर अनाम या छद्म नाम हो तो संदेह और बढ़ जाता है कि कहीं वह ऐसे ही विषयों पर नजर रखने के लिए तो नहीं है।
सुरेश चिपलूनकर जी ने एक लेख लिखा जिसमें कुछ फिल्मी हीरो द्वारा प्रस्तुत किये जा रहे कार्यक्रमों की आलोचना थी। वह अपने तीखे शब्दों से अपनी आलोचना करने के लिए जाने जाते है और शायद अपने ब्लाग मित्रों में इसी कारण लोकप्रिय भी हैं। मैं समझता हूं कि वह हर विषय की निष्पक्ष विवेचना करते हैं। यह अलग बात है कि कुछ लोग जिन्हें केवल अपनी पंसद का ही सुहाता है वह उनसे चिढ़ जाते हैं। मुझे एक बार तो उनके आलोचकों पर हंसी आ गयी थी। उन्होंने क्षेत्रीय विवाद में बिल्कुल किसी का पक्ष न लेते हुए लिखा था पर उसमें दोनों पक्ष उन पर प्रहार कर रहे थे और मुझे नहीं लगता था कि वह लोग उसे समझ पाये।

आज भी कुछ ऐसा ही लगा उनके ब्लाग पर किसी ऐसे टिप्पणीकर्ता की टिप्पणी थी जो उनके आलेख को समझा ही नहीं और चिपलूनकर जी ने उसका जवाब अपने ब्लाग पर दिया जिसमें उस टिप्पणीकर्ता का ईमेल या ब्लाग का पता न होने पर गुस्सा भी जाहिर किया गया था। असहमत लोग जब अनाम या छद्म नाम से टिप्पणी लिखते हैं तो कई सवाल मेरे मस्तिष्क में आते हैं। कुछ मीडिया से जुड़े लोग हमारे ब्लाग पर निगाह रख रहे है। जिस तरह क्रिकेट और फिल्म मिल रहे हैं वैसे ही ब्लाग और फिल्म भी मिल रहे हैं-इसमें भी मेरे कुछ दार्शनिक ढंग के विचार हैं पर वह यहां नहीं रख सकता।

मैंने आज ही एक लेख में यह विषय उठाया था कि ब्लाग लिखवाने के पीछे कोई हिंदी के प्रति किसी का सौहार्द नहीं बल्कि उसके लिखे जाने के प्रचार का किसी को लाभ है वही उसके लिये प्रयास कर रहा है। ऐसे लोग यहां सक्रिय हैं। फिल्मी हीरो का ब्लाग बन गया उसकी खबर आखिर यहंा ब्लाग पर देने की क्या जरूरत हैं? फिर चाहते हैं कि अन्य लोग भी इस पर लिखें। यह जो फिल्म हीरो हैं इनमें एक के पास भी समय नहीं है कि वह अपना ब्लाग स्वयं लिखें-इसके लिए उनके सहायक ही बहुत हैं। उनको प्रचार की आवश्यकता नहीं पर वह उन कंपनियों से जुड़े हैं जो संचार माध्यमों की रीढ़ बनती जा रहीं है। उनको हिंदी मे ब्लाग नहीं बल्कि उनके लिखते रहने का प्रचार चाहिए ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर इंटरनेट कनेक्शन ले। उनके लोग यहां सक्रिय हैं। अगर नहीं तो जरा आज सुरेश चिपलूनकर का आलेख देखें और एक ब्लाग पर उसमें उल्लेखित हीरो के ब्लाग बनने का समाचार दूसरे ब्लाग पर है। इसलिये अब यहां किसी हीरो की आलोचना सहन नहीं की जा रही है।

क्रिकेट में खेल रहे अनेक खिलाड़ी और फिल्मों में काम कर रहे अभिनेता ब्लाग बनाते जायेंगे और उसका प्रचार होगा। इनमें से किसी का ब्लाग हिंदी में नहीं होगा। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ जब मैंने वह कमेंट देखी। कितनी बदतमीजी से लिखी गयी थी। मुझे लगता है कि हिंदी ब्लाग जगत अब नये रूप में आ रहा है जहां यह पता ही नहीं लग रहा है कि कौन किसके लिए काम कर रहा है? एक अभिनेता की आलोचना पर ऐसी टिप्पणी! मैं ऐसे लोगों को बता दूं कि भई, हम किसी के बंधुआ नहीं हैं। हर महीने छह सौ से साढ़े छह सौ रुपये भुगतान करते है। स्वतंत्र अभियक्ति का साधन है इसलिये हाथ घिसते हुए लिख रहे हैं। अगर तुम असहमत हो तो अपने ब्लाग पर लिखो। एसी वाहियात टिप्पणी वह भी अनाम और छद्म नाम से करते हो। अपने ईमेल का पता नहीं देते।

मैंने कहा था कि कुछ लोग हैं जो लिखने और पढ़ने के साथ टिप्पणियों के लिये कोई अन्य फायदे ले रहे हैं। हमारे ब्लोग लेखक मित्र पूरे पते के साथ बड़े प्रेम से टिप्पणी लिखते हैं तो प्रसन्नता होती है पर अगर कोई अनाम या छद्म नाम रखता है तो हम मान लेते हैं कि उसे कोई फायदा है। मेरा अनुमान सही था इस ब्लाग जगत पर नजर रखी जा रही है और बढ़ती पाठक संख्या केवल उसी का ही परिणाम है कि कुछ लोगों को ब्लाग लेखकों को प्रोत्साहित करने के साथ उन पर नजर रखने के लिऐ नियुक्त किया गया है। ऐसा नहीं है कि आम पाठक यहां नहीं है पर उसकी संख्या कम हैं। मेरे एक आलेख में कुछ फिल्मी हीरो के नाम थे और सभी का नाम डालकर उसे पढ़ा गया। इसी आधार पर मैंने अपना आज का लेख लिखा था और लगता है कि वाकई यही बात है। कंपनियों के लिए माडलिंग करने वाले फिल्मी अभिनेताओं की यहां आलोचना इसलिये सहन नहीं की जा रहीं-यह आलोचना भी कोई ऐसी नहीं है बल्कि इस तरह की समाचार पत्रों में आये दिन होती रहती है। आखिर कुछ ऐसा है जो हम ब्लाग लेखक समझ नहीं पा रहे पर धीरे-धीरे सब स्पष्ट होता जायेगा। जहां तक मेरा विचार है जो हिंदी भाषा के ब्लाग लेखक हैं उनमें एक भी मुझे इस प्रवृत्ति का नहीं है और अब यहां बाहर से ऐसे लोग सक्रिय हो रहे हैं जो यहां अपना नियंत्रण बनाना चाहते है। आखिर सवाल यह है कि आलोचना किसी की हो रही है और बिफरता कोई अन्य है तब यह सवाल तो उठेगा ही ।

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