विविध और रोचक विषयों पर लिखे जाने पर पाठक आकर्षित होंगे-आलेख


उस दिन पड़ौस में दिल्ली से कोई दंपत्ति आये थे। संयोग से उनकी मेरी पत्नी से चर्चा हुई होगी। मेरी पत्नी को जब उसने बताया कि वह अपनी तीन बेटियों से अंतर्जाल पर चैट के माध्यम से बात करती है तो उनमें इसी विषय पर चर्चा प्रारंभ हो गयी। मेरी पत्नी ने उसे बताया कि ‘हमारे पति भी अंतर्जाल पर लिखते हैं।’
उसने पूछा-‘क्या और कहां लिखते हैं।’
मेरी पत्नी ने कहा-‘ब्लाग लिखते हैं।‘
उसने एक बड़े अभिनेता का नाम लेते हुए पूछा-‘वैसे ही न जैसे वह लिख रहा है।’
मेरी पत्नी ने कहा-‘हां, वैसे ही।
इस पर उसने पूछा-‘फिर तो उस पर लोग कमेंट लिखते होंगे। क्या लिखते हैं?
मेरी पत्नी ने कहा-‘हां, कुछ लोग लिखते हैं और यह भी उनको लिखकर आते है। वैसे इन्होंने उस अभिनेता के ब्लाग पर कमेंट भी लगायी थी। इनका नंबर था 294 यह स्वयं उन्होंने बताया।‘‘

बातें करते हुए मेरी पत्नी उस दंपत्ति को अपने घर के अंदर ले आयी क्योंकि अभी तक उनकी सड़क पर ही बातचीत हो रही थी। इधर मैं भी वहां पहुंच गया। उसे चूंकि मैं एक दो दिन से देख रहा था इसलिये उसके वहां होने से कोई आश्चर्य नहीं हो रहा था। मैंने अनुमान कर लिया कि पड़ौस में आने की वजह से यह परिचय हुआ होगा।
उन दंपत्ति ने मेरा अभिवादन किया। पति अब रिटायर हो चुके हैं और पत्नी भी पहले नौकरी करती थी पर अब उसने छोड़ दी है। कुछ देर बाद वह बोली-‘‘आप अभी आये हैं। थोड़ा आराम कर लीजिये फिर हम दोनों आपका ब्लाग देखकर ही जायेंगे। देखेंगे आप क्या लिखते हैं और कैसे कमेंट आते है।’
मुझे हैरानी हुई और मैंने पूछ लिया किया कि‘आप लोग ब्लाग के विषय में कैसे जानते हैं?’
मेरी पत्नी ने कहा‘-बड़े लोग ब्लाग बना रहे हैं न! इन्होंने भी सुन लिया होगा।’
वह बोली-‘नहीं हमारे एक परिचित प्रोफेसर हैं वह इन ब्लाग पर कमेंट लिखते हैं। वह बताते हैं और उनके यहां ही हमने कई ब्लाग देखते हैं। हालांकि पढ़े नहीं हैं पर दूर से उनको देखा है।’

उन्होंने जो नाम बताया तो मुझे लगा कि संभवतः उस उपनाम के एक टिप्पणीकर्ता मेरे ब्लाग पर आये थे। मैं उनके ब्लाग पर गया पर वह अंग्रेजी में था। एक पाठ हिंदी में था और मेरी स्मृति अगर ठीक है तो मैंने उनके ब्लाग पर मैंने विभिन्न फोरमों के ईमेल पते भी लिखे थे और वहां पंजीकरण की सलाह भी दी। इस बारे में दावे से कुछ नहीं कह सकता पर जिस तरह उन्होंने बताया उससे लगता है कि वह वही थे। उनके विज्ञान से संबद्ध होने की बात उस दंपत्ति ने बतायी और उस ब्लाग पर विज्ञान से संबंधित जानकारी के कारण ही मुझे ऐसा लग रहा है।

बहरहाल कुछ देर बाद मैने उनको अपने कंप्यूटर पर शब्दलेख सारथी और अंतर्जाल पत्रिका नाम वाले ब्लाग दिखाये-क्योंकि वह थोड़े सम्मानजनक लगते है बाकी तो हास्य कविताओं और व्यंग्यों से भरे हुए हैं तो यह सोचकर कि उसके लिये उनको पढ़कर अजीब न लगे इसलिये नहीं दिखाये। वह उनको देखकर बहुत खुश हुए। हां, एक जगह वह आपस में झगड़ा करते करते बचे। भृतहरि शतक की यह शिक्षा कि ‘बड़े भाई, पुत्र और पत्नी से विवाद करने से बचें‘ पति महाशय को नही हजम हो पायी।
वह बोले‘-एक बात बताओ साहब! क्या यह तीनों गलत बोलें तब भी उनको भी झेल जायें। क्या पत्नी हमेशा सही बोलती है।’

पत्नी बोली-‘देखों! अब लगे बहस करने। सच हजम नहीं होता।’
मैंने झगड़े से बचने के लिये कहा-‘यह मेरा ब्लाग अध्यात्मिक विषयों के लिये है। आप अगर फुरसत में आयें तो बाकी ब्लाग भी दिखा दूंगा।’

उन्होंने कमेंट भी पढ़े। मेरा नाम लिखा और बोले आपकी चर्चा प्रोफेसर साहब से करेंगे। मैंने उनको वह संस्मरण सुनाया और यही बताया कि यह बात वही प्रोफेसर हैं यह दावे से नहीं कह सकता।
उसके बाद मैंने उनको वह अपने सारे हथियार(टूल)दिखाये जिनका उपयोग करते हुए मैं प्रसिद्ध ब्लागर (ऐसा मुझसे कुछ ब्लाग लेखक कहते हैं इसलिये लिख रहा हूं)बन गया। इंडिक का हिंदी यूनिकोड, कृतिदेव का यूनिकोड, अरबी यूनिकोड टूल और अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद टूल का उपयोग कर दिखाया। इससे वह हैरान हो गये। पत्नी ने कहा-‘ आपके पास तो यह गजब के टूल हैं। यह तो अनुवाद तो ऐसे हो जाता है कि जैसे आपने लिखा हो।’
उसने इस बात की पुष्टि की कि हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद बहुत अच्छा हुआ है। वह इन टूलों के बारे में नहीं जानते थे। मैंने उससे पूछा कि क्या इन टूलों की चर्चा कभी उनके संपर्क में आने वाले अंतर्जाल प्रयोक्ता करते हैं। उन्होंने इंकार किया।
महिला वहां से जाते हुए कहा-‘आपके यह ब्लाग मैं पढ़ूंगी। बहुत मजेदार लिखा हुआ है। खासतौर से आपकी अपनी व्याख्यायें बहुत अच्छी लगीं। अब मैं आपके यह ब्लाग पढ़ूंगी।

उनके जाने के बाद मैं उन टूलों के बारे में सोच रहा था कि अगर उनका प्रचार अच्छी तरह हो जाये तो शायद लोगों की रुचि और बढ़ेगी। वैसे वह महिला मेरा ब्लाग पढ़ेगी इसमें मुझे संशय है। बाद में मेरी पत्नी से उसकी चर्चा हुई थी। मेरी पत्नी ने कहा-‘वह शायद इंटरनेट का उपयोग केवल अपने बेटियों यो रिश्तेदारों के चैट लिये करती हैं अन्य किसी कार्य के लिए नहीं। हां, उन प्रोफेसर साहब के यहां जाते हैं तो उनको ब्लाग पर काम करते देख ही उनको पता है कि कोई ब्लाग भी होता है। मुझे नहीं लगता कि वह आपका ब्लाग पढ़ेगी।’
इस देश में अंतर्जाल के प्रयोक्ताओं की संख्या देखते हुए हिंदी में ब्लाग पढ़ने वालों की संख्या बहुत कम हैं इसका कारण यह है कि यहां हर प्रचार में बड़े लोगों के नाम का सहारा लिया जाता है। इससे लोगों में यह मनोवृति हो जाती है कि यह तो बड़े लोगों का काम है और कोई छोटा व्यक्ति ब्लाग लिख रहा है तो वह महत्वहीन है। जब उस महिला ने मेरे सामने अभिनेता का नाम लिया था तो मैंने स्पष्ट रूप से कह दिया था-‘‘हां, उस जैसा ही ब्लाग लिखता हूं पर उसे पढ़ने वाले बहुत हैं और मेरे पास इतनी संख्या नहीं है।’
इसके अलावा अगर आप समाचार पत्र-पत्रिकाओं को देखेंं तो लिखकर कोई बड़ा लेखक नहीं बन रहा है। हां, जो बड़े हैं उनको लेखक बनाकर पेश किया जा रहा है। वह महिला पढ़ेगी या नहीं अगर मैं इस बात की परवाह करूंगा तो शायद लिख ही नहीं पाऊंगा। वैसे इसमें संशय नहीं है कि उसने मेरे ब्लाग देखने में जितनी दिलचस्पी दिखाई उतनी किसी अन्य मेहमान नहीं दिखाई। इसके लिये तो मैं उसकी प्रशंस करूंगा।

प्रसंगवश याद आया। हां, उस अभिनेता के ब्लाग पर मैंने 294 नंबर पर टिप्पणी लिखी थी। वहां वेबसाइट का पते के स्थान पर अपने ब्लाग/पत्रिका का पता डाला। जब टिप्पणी वहां दिखने लगी तो मैंने अपना ब्लाग/पत्रिका खोलकर देखा। वापस लौटकर अपना उसी ब्लाग पर अभिनेता के ब्लाग से देखे जाने की पुष्टि हो रही थी। कुछ घंटों बाद वह गायब हो गयी। मैंने अपने व्यूज की सूची देखी वहां भी नहीं दिखी। ऐसा क्यों हुआ मैं समझ नहीं पाया। इतना तय है कि ब्लाग लिखने वालों को अभी अपनी पहचान बनाने में समय लगेगा। इस समय तो हाल यह है कि अगर किसी ब्लाग लेखक के बार में किसी को बताया जाये तो सबसे पहला वह सवाल करेगा-‘वह है क्या? कोई नेता, अभिनेता या समाजसेवी जो ब्लाग लिखता है? नहीं है तो लिखने से क्या फायदा?’

हालांकि समाज में किसी भी उपलब्धि का पैमाना आर्थिक आधार ही है। इस समय तो ऐसे व्यक्ति को जो लिखने पढ़ने में रुचि नहीं लेता उसे यह बताना भी बेवकूफी लगता है कि मैं ब्लाग लिख रहा हूं। उसका सबसे बड़ा प्रश्न यह होता है कि ‘उससे क्या कमाई होती है। नहीं होती तो क्या भविष्य में संभावना है?’
अभी लोगों को यह पता नहीं है कि बहुद्देशीय उपयोग हो रहा है। जब लोगों को ब्लाग के बारे में जानकारी हो जायेगा तभी पाठको की संख्या बढ़ेगी। बहरहाल उन दंपत्ति से चर्चा कर यह तो लगा कि अब आम लोग भी ब्लाग के विषय में जानने लगे हैं और जब विविध रोचक विषयों वाले ब्लाग उनको उपलब्ध होंगे तब वह इस तरफ आकर्षित होंगें।

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