मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी


माशुका ने शायर से कहा
‘बहुत बुरा समय था जब मैंने
अपनी सहेलियों के सामने
किसी शायर से शादी करने की कसम खाई
तुमने मेरे इश्क में कितने शेर लिखे
पर किसी मुशायरे में तुम्हारे शामिल होने की
खबर अखबार में नहीं आई
सब सहेलियां शादी कर मां बन गयीं
पर मैं उदास बैठी देखती हूं
अब तो कोई मशहूर शायर
देखकर शादी करनी होगी
नहीं झेल सकती ज्यादा जगहंसाई’

शायर खुश होकर बोला
‘लिखता बहुत हूं
पर सुनने वाले कहते हैं कि
उसमें दर्द नहीं दिखता
भला ऐसा कैसे हो
जब मैं तुम्हारे प्यार में
श्रृंगार रस में डुबोकर शेर लिखता
अब तो मेरे शेरों में दर्द की
नदिया बहती दिखेगी
जब शराब मेरे सिर पर चढ़कर लिखेगी
अपने प्यार से तुम नहीं कर सकी मुझे रौशन
मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई’

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टिप्पणियाँ

  • vikash kumar babuganj  On अक्टूबर 14, 2013 at 09:46

    happy

  • yougi rathore  On मार्च 24, 2014 at 09:12

    भूखे इंसान के पास देश भक्ति कहां से
    आयेगी,
    रोटी की तलाश में भावना कब तक
    जिंदा रह पायेगी।
    पत्थर और लोहे से भरे शहर भले देश दिखलाते
    रहो
    महंगाई वह राक्षसी है
    जो देशभक्ति को कुचल जायेगी।
    ———-
    क्रिकेट और फिल्म में
    बहलाकर
    कब तक देश के भूखों की
    भावनाओं को दबाओगे।
    असली भारत का दर्द जब बढ़ जायेगा,
    तब तुम्हारा रोम रोम भी जल
    जायेगा,
    कब तक पर्दे पर
    नकली इंडिया सजाओगे।
    ————-

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