अंतर्जाल पर चालाकियों का मुकाबला तो करना ही होगा-आलेख


अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही अंतर्जाल लेखक ब्लागरों की शोषण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस काम में जुट रहे हैं वह ब्लाग लेखक जो इसकी तकनीकी विद्या में पारंगत है। अब यह मुद्दा नहीं है कि वह किस भाषा का है बल्कि उसके पाठ की श्रेणी के आधार पर ही उसका मूल्यांकन होगा। कल अपने पाठों की चोरी की चिंता मुझे इतनी नहीं थी जितनी यह जिज्ञासा यह जानने की थी कि यह हो कैसे रहा है? मेरे पाठ सीधे ऐसे कहीं और पहुंच रहे हैं जैसे यहां हिंदी फोरम में पहुंचते हैं। एक प्रायोगिक पोस्ट डाली और उसे वहां पहुंचने नहीं दिया।

अंग्रेजी का ब्लाग था और उसने मेरे पाठ की कापी नहीं की बल्कि सीधे वह ऐसे ही वहां पहुंच रहा था। उसका लक्ष्य मेरा ब्लाग नहीं बल्कि मेरी श्रेणियां थीं जो अंग्रेंजी में थी। मैं कहूं कि मेरा ब्लाग यहां कैसे आया तो वह कहेगा अपने आप! इसका मेरे पास कोई जवाब नहीं है सिवास इसके कि मैं उन श्रेणियों को बंद कर दूं जिनसे वह ब्लाग वहां जाता है। मगर अंग्रेजी के ब्लागर क्या करेंगे? उनमें से कई लोगों को पता नहीं है कि ऐसा भी हो रहा है। यह तो हिंदी के वरिष्ठ ब्लागर इधर उधर धूम रहे हैं तो बता दिया। उस ब्लागर को ढूंढना बेकार है क्योंकि उसने अपना साफ्टवेयर बना लिया है और उसका ब्लाग इसी कारण ही चल रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि अंतर्जाल पर मेहनत से लिखने वालों के लिये सफलता संदिग्ध है क्योंकि वह एक जगह लिखेंगे पर चालाक ब्लागर बीस ब्लागरों के ब्लागर को अपने यहां खींच लेंगे। इसका कोई उपाय नहीं है कि इसका प्रतिकार कैसे किया जाये।

जब यह अंग्रेजी वालों के हाल हैं तो हिंदी वालों के तो वैसे भी बुरे हैं। यहां तो लिखने वालों को एक मजदूर ही माना जाता है। वैसे शुरुआत में अपनी सदाशयता से मैं सभी को भला समझ रहा था और अधिकतर हैं भी पर चालाक लोगों की चमक अब दिखने लगी है। मैंने यह देख लिया है कि कई लोग वेबसाइट बनाकर हिंदी के ब्लाग लेखकों को ऐसे समझ रहे हैं जैसे कि डौमेन के पैसे उन्होंने यहां ब्लाग लेखकों को दिये हैं।

लगातार इधर उधर देखते हुए एक बात साफ लगी कि अब कहीं और लिखने के बजाय अपने ब्लाग पर ही लिखो। किसी अन्य को अपने लेख वगैरह भेजने की उदारता दिखाना बेकार ही लगता है। यह अंतर्जाल है यहां अगर कोई ब्लागर हिट हो गया तो यह वेबसाइट वाले उससे याचना करेंगे कि हमारे ब्लाग लिंक कर दो हमारा प्रचार हो जायेगा। यह तभी संभव है कि जब अपने ही ब्लाग पर लिखते रहेंगे। वैसे इन वेबसाईट वालों से संपर्क बनाये रखना ठीक रहेगा क्योंकि यह घूमते घामते बहुत हैं और चिट्ठाकार समूह की चर्चा में कई जानकारियां दे जाते हैं पर अब वह ब्लाग स्पाट और वर्डप्रेस के ब्लाग के स्वरूप का ज्ञान भूल चुके हैं। और अगर आप अपने ब्लाग लिखने में कोई परेशानी अनुभव कर रहे हैं तो आप अपने जैसे ब्लाग लेखक की मदद लें वेबसाइट वालों ने बहुत थोड़े दिन इन पर काम किया और फिर डोमेन लेकर अपना काम करने लगे। उसके बाद ब्लागस्पाट और वर्डप्रेस में बहुत बदलाव आयें हैं।

आज तो लगभग मैंने मान ही लिया है कि ब्लागर का मतलब है बिना डोमेन लेकर लिखने वाला। गूगल और वर्डप्रेस अपने ब्लागों पर इसलिये ही अधिक सुविधायें ला रहे हैं क्योंकि वह जानते हैं कि असली लेखक यहीं मिलेंगे जो पैसा खर्च कर डोमेन नहीं लेंगे। मेरे ब्लाग को अपनी तरफ खींचने वाले वेबसाइट को मैंने देखा और समझ में आ गया कि यह सब चलता रहेगा। उसकी काट मैंने निकाल ली है। अब वर्डप्रेस की श्रंेणियों की बजाय टैगों का उपयोग करूंगा। श्रेणियां मुख बन जाती हैं और टैग पूंछ है। वैसे भी श्रेणियों से अब अधिक लाभ नहीं था। वह वेबसाइट इस तरह बनी है कि अनेक अंग्रेजी ब्लाग अपने आप ही वहां पहुंच रहे हैं। अब यह कहना कठिन है कि उसके पीछे इस देश का कोई आदमी है या बाहर का। बहरहाल मौलिक लेखकों को इससे विचलित नहीं होना चाहिए। अगर जिज्ञासा नहीं होती तो मैं अपना समय नष्ट नहीं करता पर मुझे लगा कि आखिर देखा जाये कि मामला क्या है? तब समझ में आया कि अंतर्जाल की चाालकियों का यह एक नमूना है अब इसका प्रतिकार कैसे हो सकता है यह देखा जायेगा।

इसी दौरान मुझे अपने हिंदी ब्लाग जगत में भी आगे ऐसे ही होने की संभावना भी लगी। हालांकि यह काम अभी बड़े प्यार के साथ हो रहा है कि आओ यार यहां लिखो, तो मजा आयेगा।’ कई लोग अपने लिंक पकड़ा देते हैं। नारा यह हिंदी को अंतर्जाल पर स्थापित करना है। यह उनके सब नाटक हैं वह हमसे लिखवाकर फिर अपने नाम इनामों और सम्मान के लिये भिजवायेंगे। यहां जिसके लिये लिखो वह अपना नाम संपादक या माडरेटर के रूप में प्रमुखता से प्रचारित करता है पर अपने साथ खड़े आदमी को वह ऐसा दिखाता है जैसा मजदूर हो। यहां हिंदी ब्लाग जगत में कुछ लोग तो केवल नाम और सम्मान के लिये चाालकियों से काम ले रहे हैं। ऐसे में बेहतर यही है कि यहां वहां लिखने की बजाय अपने ब्लाग पर ही ताकत लगायी जाये।

अपने मित्रों और पाठकों यह बताने के लिये यह मैं लिख रहा हूं कि इस मामले से परेशान होने की जरूरत नहीं है और अब मेरा ब्लाग वहां नहीं जा पायेगा और जो चले गये उनकी वापसी अब मुश्किल है और यही एक विचार का विषय है। जिस पर आगे देखा जायेगा। अगर इस पर कुछ किया जा सकता है तो वह गूगल या वर्डप्रेस पर शिकायत कर ही किया जा सकता है पर वहां अंग्रेजी में शिकायत भेजना मुझे आता नहीं है। किसी से लिखवा लाऊंगा और फिर टाईप कर भेज दूंगा। उसे मेरे ब्लाग रखने का हक नहीं है शायद गूगल और वर्डप्रेस इससे सहमत हों। वैसे मैं इसे चोरी नहीं बल्कि चालाकी कहता हूं अब यह पता नहीं है कि इसे अपराध की श्रेणी में रखना चाहिए कि नहीं।
बहरहाल एक बात साफ है कि मौलिक और साहित्यक ब्लागर अपने ब्लाग पर ही अधिक मेहनत करें क्योंकि अगर वह उसके दम पर पाठक अधिक जुटाने में सफल हुए तो अपने आप ही लोग उनके पीछे चक्कर लगायेंगे नहीं तो वह अपना लिखा लेकर दूसरों के चक्कर लगाते रह जायेंगें।
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दीपक भारतदीप
लेखक संपादक

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