ब्लाग के पाठों पर ही अपनी पहचान लिखनी होगी-आलेख


आज मैं एक ब्लाग लेखक का ब्लाग पड़ रहा था जिसमें ब्लाग चोरों के साथ कुछ सहानुभुति दिखाने का आग्रह था। आशय यह कि चोरी होगयी तो क्या बात है? आपका लिखा कोई तो पढ़ रहा है इस पर संतोष कर लो। मुझे ताज्जुब हुआ। हालांकि वहां अनेक ब्लाग लेखकों ने अपनी असहमति दर्ज करायी थी। मुझे ऐसे विचारों पर हैरानी होती है।

पिछले दिनों ब्लाग चोरी को लेकर हुई चर्चा में मुझे आज श्री अमित गुप्ता की सलाह पर यह विचार आया कि बजाय लड़ने भिड़ने के मैं अपने संपादकीय कौशल का उपयोग करूं। अपने पत्रकार गुरूजी की याद करते हुए मैंने तय किया कि न पीछे हटूंगा, न लड़ूंगा बल्कि अपने लिखने पर ही डटा रहूंगा।

मेरे वर्डप्रेस की अनेक पोस्टें एक ऐसे ब्लाग पर जा रही हैं जिसने मुझसे पूर्वानुमति नहीं ली। मुद्दा केवल यही नहीं है। मुझे हैरानी इस बात की है कि वहां केवल पाठ ही जाता है ब्लाग और उसके साइडबार वहां नहीं दिखते। वहां अगर कोई जाकर दस बार पड़े या हजार पर मेरे पास उसका व्यूज नहीं आयेगा। मेरा नाम पाठक पूरा नहीं पढ़ जायेगा। एक ब्लाग पर कितनी मेहनत होती है सब जानते हैं। मेरे को यहां एक धेला भी नहीं मिल रहा। अगर मैं यहां लिख रहा हूं तो अपने मित्र लेखक ब्लागरों की सतत प्रेरणा से और पाठकों की रुचि को देखकर। लोग छिपाते हैं पर मैं साफ कहता हूं कि मैं नाम का भूखा हूं पर इसके लिये कोई छलकपट नहीं करता। अपनी मेहनत और बुद्धि का उपयोग करता हूं। मेरे एक सहृदय मित्र ने मुझसे पूछा कि ब्लाग लिखने में परिश्रम कहां होता है तो मैंने उनको उत्तर दिया था कि स्वेटर बुनने वाली औरत क्या मेहनत नहीं करती? यहां केवल लिखना ही नहीं होता बल्कि अपने दोनों हाथों की उंगलियां नचानी पड़ती हैं और उस समय कुर्सी पर कोई आराम से बैठा नहीं होता। ऐसी में बैठकर नहीं लिखता। कई बार शरीर से पसीना भी आ जाता है। यानि ब्लाग लिखना बौद्धिक और शारीरिक दोनों प्रकार के श्रम से ही संभव है। मैंने अपने मित्रों के ब्लाग भी लिंक किये हुए हैं तो इसलिये कि उनके लिये भी पाठक आयें। यहां तो हर तरफ से मेरे लिये अलाभकर स्थिति है।
मगर यह मामला अभी थमा नहीं है। मैंने अमित गुप्ता जी के कहने पर यह निर्णय लिया है कि मेरा पाठ जहां वहां सीधा जा रहा है तो क्यों न उसमें अपने प्रचार की सामग्री डाल दूं। मैंने अपने एक पाठ में अपने ही दूसरों ब्लाग के लिंक दिये थे और वह वहां दिख रहे थे तब यही विचार आया था पर आज श्री अमित गुप्ता की सलाह के बाद मेरा विचार पुष्ट हो गया। इसलिये आज से वर्डप्रेस के ब्लाग पर पाठ के बीच या अंत में मेरा नाम और ब्लाग का पता तो रहेगा ही। उस ब्लाग लेखक से इतनी मेहनत नहीं होगी कि वह उसे काटता फिरे। वह केवल अपने साफ्टवेयर के भरोसे है।
इस मामले में यहां बता दूं कि उसके पास वर्डप्रेस की पांच अंग्रेजी की श्रेणियां हैं जिससे वहां ब्लाग का पाठ सीधा पहुंचता है-अगर इस पांच में कोई नहीं है तो वह ब्लाग वहां नहीं जायेगा यह मैंने प्रयोग कर दिख लिया है। फिर मुझे मामला लड़ने से अधिक इसे जारी रखने पर ही अधिक है। मेरे ब्लाग अंग्रेजी ब्लाग के बीच में कहीं चमकें इसमें इतना बुरा भी नहीं लगता।
हां, इस बात से एक सबक मैंने सीख लिया है कि यहां ऐसे काम नहीं चलेगा कि जैसे किसी अखबार में सामग्री भेजने के लिये उसके ऊपर ही अपना नाम लिख दिया। ऐसे ही तो मैं ब्लाग पर भी कर रहा था (वहां तो पहले से ही शीर्षक में ही नाम लिखा हुआ है) और कहीं बीच में नाम नहीं लिख रहा था। आज से सभी ब्लाग चाहे वह ब्लाग स्पाट के हों या वर्डप्रेस के उनमें कहीं न कहीं नाम जरूर लिखूंगा। वैसे अन्य ब्लाग लेखक भी चाहें तो इस पर विचार कर लें। कल मेरे दिमाग में श्रेणियों की जगह टैग से काम चलाने का विचार भी आया था पर आज तय किया कि मुझे अपने लिखने में ही कोई प्रयोग करना चाहिए। वैसे श्री अमित गुप्ता ने लिखा ‘ यदि एचटीएमएल (HTML) और जावास्क्रिप्ट (Javascript) की जानकारी रखते हैं तो और भी अधिक मज़ेदार पंगे ले सकते हैं!! ;)” पर मैंने अपने हिसाब से अपना विचार बना लिया। मेरी अंतर्जाल के सभी लेखकों -चाहे वह वेब साइट पर हो ब्लाग पर-को सलाह है कि आगे और भी ऐसे मामले आयेंगे इसलिये अपनी पहचान को अपने पाठों में ही स्थापित करते रहें क्योंकि वह आपका हथियार है जिस पर मित्रों और विरोधियों के साथ उसे उठाने वालों की भी नजर रहती है। फिलहाल मेरी दिलचस्पी इस मामले में अधिक नहीं है पर मुझे एक बात अच्छी लगी कि हिंदी ब्लाग जगत में सक्रिय ब्लागरों के प्रयास अनुकरणीय है और मुझे नहीं लगता कि किसी अन्य भाषा में ऐसा होगा। वरिष्ठ ब्लाग लेखक श्री रविशंकर श्रीवास्तव ने यह मुद्दा चिट्ठाकार समूह में भेजा था और मेरे विचार से उसके बाद जो मैंने आत्म मंथन किया उससे कुछ सीखा है। मैं उनका भी आभारी हूं।

नोट-यह इस ब्लाग “दीपकबापू कहिन” पर लिखी गयी मूल रचना है। इसे यदि कहीं अन्यत्र ब्लाग के शीर्षक और लेखक के नाम के बिना देखें तो यहां सूचित करें।
दीपक भारतदीप, लेखक एवं संपादक

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