ब्लाग लिखने में शेयर बाजार जैसा ही मजा-व्यंग्य आलेख


ब्लाग/पत्रिका लिखने का मजा तभी है जब उसके साथ पाठकों के आने की सूचना देने वाला काउंटर हो। अगर बहुत सारे ब्लाग हों तो लिखने वाला कुछ अधिक ही मजा ले सकता है। कम से कम मुझे तो इसमें शेयर बाजार जैसा आनंद आता है। हालांकि अधिक ब्लाग संभालना भी कठिन है पर बन जायें तो क्या किया जाये?

ब्लाग स्पाट पर लिखने वाले अगर अपने ब्लाग पर काउंटर सैट कर लें तो प्रतिदिन अपने ब्लाग की आवाजाही का अवलोकन कर सकते हैं। वर्डप्रेस के ब्लाग पर तो वैसे भी सैट किया हुआ ब्लोग स्टेटस मिल जाता है। इनमें उतर-चढ़ाव वैसे ही आते है जैसे शेयर बाजार में आते हैं। हां, पर शेयर बाजार में मूल्यों के उतार चढ़ाव का आंकलन किया जा सकता है कि उनका मूल्य क्यों बढ़ा और कैसे कम हुआ? यहां ऐसा कोई पैमाना नहीं है पर ऐसा लगता है कि कभी कभी क्रिकेट मैच या कोई अन्य सनसनीखेज खबर टीवी पर होने का प्रभाव यहंा भी पढ़ता है। उस समय लोगों का ध्यान उस तरफ चला जाता है और पाठक संख्या एकदम कम हो जाती है। एक बात दिलचस्प है कि शनिवार और रविवार को पाठक संख्या एकदम कम हो जाती है इससे पता लगता है कि लोग काम की जगहों पर ही इसे अधिक देखते हैं। हो सकता है कि उनके पास घर पर इंटरनेट हो पर उनके लिये उसे देखने का समय केवल अपने कार्यस्थल पर ही मिल जाता है। शायद यही कारण है कि अवकाश के दिनों में संख्या एकदम आधी रह जाती है।

कभी कोई ब्लाग/पत्रिका पर अचानक ही पाठक संख्या अधिक दिखाती है और अगले दिन उसकी हालत शोचनीय हो जाती है। ऐसे में जब पाठक का लिंक का मिलता है तो पता लगता है कि किसने कहां क्यों और कब खोला और क्या पढ़ा। कभी कभी लिंक नहीं मिलता तब थोड़ा अजीब लगता है। इस तरह उनके अध्ययने से अपनी अनेक प्रकार की जिज्ञासा भी शांत होती है।

पाठक सूचकांक का अध्ययन करना कभी दिलचस्प रहता है। इस विषय पर मैं अनेक बार लिखता हूं। निष्कर्ष निकालना कठिन है पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि आम पाठक की पसंद साहित्य में बहुत है पर उसे अभी उसे टिप्पणी के बारे में अधिक नहीं मालुम। अखबारों में ब्लाग का प्रचार खूब हुआ है पर टिप्पणियों का नहीं। ऐसे में उसका खामोश समर्थन कभी कभार हास्य कविता, व्यंग्य,कहानी और चिंतन लिखने की प्रेरणा ही दे पाता है। उसमें निरंतरता तभी संभव है जब पाठक न केवल स्वयं टिप्पणी दे बल्कि अपने पंसदीदा ब्लाग की चर्चा अपने मित्रों में कर अन्य पाठक भी जुटाये। सच तो यह है कि आम ब्लाग लेखक को आम पाठक का सीधा समर्थन ही प्रेरित कर सकता है। आम ब्लाग लेखक को आम पाठक का समर्थन ही हिंदी को तेजी से अंतर्जाल पर बढ़ायेगा।

यहां यह भी स्पष्ट है कि साहित्य लिखने वाले तकनीकी के मामले में पैदल होते हैं फिर उनको लिखने के अलावा कुछ नहीं सूझता। ऐसे में डोमेन लेकर वह शायद ही लिखें और जो डोमेन लेकर वेबसाइट बनायेंगे वह शायद ही अधिक लिखना चाहें। ऐसे में ब्लाग लेखक ही हिंदी के ध्वज वाहक होंगे। वैसे अभी तक कमाऊ विज्ञापन डोमेन वालों के पास ही हैं क्योंकि उनका उद्देश्य कुछ और ही लगता है, पर लिखने वाले अपनी दम तो ब्लाग पर ही दिखायेंगे। मगर यहां मामला अभी लोग समझ नहीं रहे। उनको लगता है कि ब्लाग लेखक तो केवल एक मजदूर की तरह है। यह उनका वहम है। जब आम पाठक और आम ब्लाग लेखक सीधे संपर्क में आयेंगे तभी उनका भ्रम टूटेगा। अभी डोमेन वाले ही कमा रहे हैं या फिर वह ब्लाग लेखक जिनसे लिखवाया जा रहा है। शौकिया ब्लाग लेखकों के लिये आय का अर्जन अभी दूर की कौड़ी है।
मैं अपने ब्लाग/पत्रिकाओं के पाठकों के उतार-चढ़ाव का सूचकांक प्रतिदिन देखता हूं। उसमें छिपे संदेशों को पढ़ता हूं। अनेक टिप्पणियां मुझे इशारों में बहुत कुछ कह जाती हैं। पाठकों के सूचकांक में गिरावट से कभी दुखी और उठने से खुश नहीं होता क्योंकि मुझे पता है कि रास्ता अभी लंबा है। पाठकों तब पहुंचने के मार्ग और उनकी पसंद का अनुमान करते हुए ही मैंने इतने ब्लाग@पत्रिका बनाये हैं। अनुमान करें तो पौने दो लाख से अधिक पाठक मेरे ब्लाग@पत्रिकाओं पर आ चुके हैं। सबसे अधिक पाठक संख्या वर्डप्रेस पर है पर ब्लाग स्पाट पर भी अब धीरे धीरे बढ़ रहे हैं। बहरहाल अब तो पाठक सूचकांक देखकर भी मजे लेता हूं और यह जानने का प्रयास करता हूं कि उनकी दिलचस्पी किन विषयों पर है। वैसे कभी मुझे अपने ब्लाग से आय होगी यह आशा मैं तो नहीं करता पर हां एक समय ऐसा अवश्य आयेगा कि जब लिखने वालों की यह इज्जत बढ़ेगी और उन्हें अच्छी आय होगी यह आशा करता हूं भले ही उनमें मेरा नाम न शामिल हो। दूसरी बात यह है कि जो अपनी स्वतंत्रता के साथ लिखना चाहते हैं उनको बहुत धीरज रखना होगा। एक बार अगर गुलामों की तरह लिखना प्रारंभ किया तो फिर स्वतंत्रता पूर्वक लिखना कठिन है। इसलिये अपने स्वतंत्र रूप से लिखने की आदत बनाये रखना आवश्यक है भले ही प्रारंभ में पाठक संख्या अधिक न हो।
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यह आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • sameerlal  On जनवरी 5, 2010 at 20:22

    दीपक भाई

    आपका यह आलेख इस साइट पर बिना आपका संदर्भ दिये दिखा. आश्चर्य हुआ:

    http://hindireader.blogspot.com/2008/10/blog-post_481.html

    कृपया ध्यान दें. आपकी अन्य रचनाएँ भी वहाँ दिखाई पड़ रही हैं.

    • समीर लाल जी वह तो मेरी रचनाओं से भरा हुआ है । मैंने उसकी कई पोस्ट पर यह टिप्पणी लिखी है। आगे क्या कार्यवाही करें। यह तय करना होगा। महाशय आपने मेरी रचनायें अपने यहां प्रकाशित की हैं। प्रति रचना दो हजार रुपये भुगतान करना वांछित है। आपका फोन नंबर पता कर उस पर आपसे राशि मांगी जायेगी। उम्मीद है आप उसका भुगतान करेंगे। दीपक भारतदीप

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