इश्क और मशीन-हास्य कविता (hasya kavita)


माशुका को उसकी सहेली ने समझाया
‘आजकल खुल गयी है
सच बोलने वाली मशीन की दुकानें
उसमें ले जाकर अपने आशिक को आजमाओ।
कहीं बाद में शादी ा पछताना न पड़े
इसलिये चुपके से उसे वहां ले जाओ
उसके दिल में क्या है पता लगाओ।’

माशुका को आ गया ताव
भूल गयी इश्क का असली भाव
उसने आशिक को लेकर
सच बोलने वाली मशीन की दुकान के
सामने खड़ा कर दिया
और बोली
‘चलो अंदर
करो सच का सामना
फिर करना मेरी कामना
मशीन के सामने तुम बैठना
मैं बाहर टीवी पर देखूंगी
तुम सच्चे आशिक हो कि झूठे
पत लग जायेगा
सच की वजह से हमारा प्यार
मजबूत हो जायेगा
अब तुम अंदर जाओ।’

आशिक पहले घबड़ाया
फिर उसे भी ताव आया
और बोला
‘तुम्हारा और मेरा प्यार सच्चा है
पर फिर भी कहीं न कहीं कच्चा है
मैं अंदर जाकर सच का
सामना नहीं करूंगा
भले ही कुंआरा मरूंगा
मुझे सच बोलकर भला क्यों फंसना है
तुम मुझे छोड़ भी जाओ तो क्या फर्क पड़ेगा
मुझे दूसरी माशुकाओं से भी बचना है
कोई परवाह नहीं
तुम यहां सच सुनकर छोड़ जाओ
मुश्किल तब होगी जब
यह सब बातें दूसरों को जाकर तुम बताओ
बाकी माशुकाओं को पता चला तो
मुसीबत आ जायेगी
अभी तो एक ही जायेगी
बाद में कोई साथ नहीं आयेगी
मैं जा रहा हूं तुम्हें छोड़कर
इसलिये अब तुम माफ करो मुझे
अब तुम भी घर जाओ।’

…………………….

दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
कवि एंव संपादक-दीपक भारतदीप
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लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

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टिप्पणियाँ

  • rohit sahu  On सितम्बर 1, 2010 at 17:18

    thanks

  • Reshma  On दिसम्बर 25, 2010 at 16:26

    Hi… Friend

  • shakil shaikh  On जनवरी 4, 2011 at 14:45

    ‘आजकल खुल गयी है
    सच बोलने वाली मशीन की दुकानें
    उसमें ले जाकर अपने आशिक को आजमाओ।
    कहीं बाद में शादी ा पछताना न पड़े
    इसलिये चुपके से उसे वहां ले जाओ
    उसके दिल में क्या है पता लगाओ।’

    माशुका को आ गया ताव
    भूल गयी इश्क का असली भाव
    उसने आशिक को लेकर
    सच बोलने वाली मशीन की दुकान के
    सामने खड़ा कर दिया
    और बोली
    ‘चलो अंदर
    करो सच का सामना
    फिर करना मेरी कामना
    मशीन के सामने तुम बैठना
    मैं बाहर टीवी पर देखूंगी
    तुम सच्चे आशिक हो कि झूठे
    पत लग जायेगा
    सच की वजह से हमारा प्यार
    मजबूत हो जायेगा
    अब तुम अंदर जाओ।’

    आशिक पहले घबड़ाया
    फिर उसे भी ताव आया
    और बोला
    ‘तुम्हारा और मेरा प्यार सच्चा है
    पर फिर भी कहीं न कहीं कच्चा है
    मैं अंदर जाकर सच का
    सामना नहीं करूंगा
    भले ही कुंआरा मरूंगा
    मुझे सच बोलकर भला क्यों फंसना है
    तुम मुझे छोड़ भी जाओ तो क्या फर्क पड़ेगा
    मुझे दूसरी माशुकाओं से भी बचना है
    कोई परवाह नहीं
    तुम यहां सच सुनकर छोड़ जाओ
    मुश्किल तब होगी जब
    यह सब बातें दूसरों को जाकर तुम बताओ
    बाकी माशुकाओं को पता चला तो
    मुसीबत आ जायेगी
    अभी तो एक ही जायेगी
    बाद में कोई साथ नहीं आयेगी
    मैं जा रहा हूं तुम्हें छोड़कर
    इसलिये अब तुम माफ करो मुझे
    अब तुम भी घर जाओ।’

  • UPENDRA KUMAR  On फ़रवरी 4, 2011 at 18:36

    wah kya bat hai

  • kajal patel  On मार्च 7, 2011 at 14:40

    wah kya bat ha
    logo ppar kabhi bhi vishvas nahi karnc chaiha

    • lokesh  On मई 30, 2011 at 23:02

      vishwas logo per nahi karna chahiye to kya janvaro per karna chahiye reply me

  • Mahendra Kumar  On मार्च 21, 2011 at 15:59

    pls send this poem on my id

  • vijay  On अप्रैल 17, 2011 at 00:24

    yes i like it me too write of my own intrested to send

  • संजय सिंह प्रेमी  On जून 17, 2011 at 22:22

    बहुत खूब कहा है जी !

  • shailesh kumar  On जुलाई 23, 2011 at 11:57

    maza aa gaya

  • vikash  On अक्टूबर 8, 2011 at 06:40

    really……………

  • kavita  On अक्टूबर 16, 2011 at 11:43

    kalyug ka “prem” yahi hai.

  • sandip  On अक्टूबर 22, 2011 at 00:11

    badhiya

  • vikash vardhan  On नवम्बर 30, 2011 at 02:40

    bahut sundar dost

  • abhishek mishra  On जनवरी 17, 2012 at 21:32

    kavita to aap best likhate hai but kavita me lay nahi hai kripya lay wali kavita post kare

  • balvan shakya  On जनवरी 19, 2012 at 23:27

    very good deepak babu

  • sandeep  On फ़रवरी 11, 2012 at 19:34

    hiiiiiiiiiii

  • shishpal  On मार्च 28, 2012 at 13:38

    Bhut acche deepak babu…

  • sohan singh  On फ़रवरी 22, 2013 at 20:10

    deepak saab kiya immotional atyachaar hai

  • Sameer Digrodiya  On फ़रवरी 12, 2014 at 14:52

    mujhe ek funny or thodi badi kabita chayie plz de doo

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