भाषा और अखबार-लघु हास्य व्यंग्य (bhasha aur akhabar-hindi short comic satire article)


‘पापा, यह कांफिडेंस क्या होता है।’ 14 साल के बच्चे ने अपने पास ही चाय पी रहे पिताजी से पूछा।’
उन्होंने जवाब दिया-‘बेटा, अंग्रेजी के कांफिडेंस शब्द का हिन्दी में मतलब होता है, आत्म विश्वास।’
बेटा बोला-‘ यह तो मुझे भी पता है पर हिन्दी में यह कांफिडेंस क्या होता है? आप देखो अखबार में लिखा है कि हर समय कांफिडेंस रखना चाहिये।’
पिताजी ने कहा-‘अरे, ऐसे ही लिख दिया होगा। आजकल हिन्दी में अखबार यही करने लगे हैं।
थोड़ी देर बात फिर बेटे ने पूछा-‘यह गुड लुक क्या होता है।’
पिताजी ने कहा-‘बेटा, यह भी अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसका मतलब है अच्छा दिखना।’
बेटा बोला-‘यह तो मुझे भी पता है पर यह हिन्दी में क्या होता है? इस अखबार में लिखा है कि हमेशा गुड लुक रहें।’
पिताजी ने कहा-‘ऐसे ही लिख दिया होगा।’
थोड़ी देर बाद फिर बेटे ने कहा-‘पापा, यह बी केअरफुल मस्ट ड्यूरिंग प्रिगनैंसी का क्या मतलब होता है।’
पिताजी ने कहा-‘बेटा आप अखबार में वही शब्द पढ़ो जो हिन्दी में समझ में आता हो, बाकी छोड़ दो।’
बेटा बोला-‘ठीक है पापा, अब मैं अखबार में वही पढ़ूंगा जो समझ में आये पर इसमें कोई भी ऐसा छपा नहीं मिल रहा है तो क्या करूं।
पिताजी ने कहा-‘तुम समाचार पढ़ो यह लेख मत पढ़ो।’
बेटा बोला-‘समाचारों में भी ऐसे ही शब्द लिखे हैं जो हिन्दी में न होने के कारण समझ में नहीं आते। मैं जब हिन्दी पढ़ता हूं तो हिन्दी याद रहती है और जब अंग्रेजी पढ़ता हूं तो वही याद रहती है।
पिताजी चुप हो गये।
थोड़ी देर बाद फिर बेटे ने पूछा-‘यह ‘सैक्सी सीन’ क्या होता है। इस अखबार एक समाचार में लिखा है कि इंटरनेट पर ‘सैक्सी सीन’ ज्यादा देखे जाते हैं।
पिताजी के समझ में कुछ नहीं आया तब वह बोले-‘बेटे, अगर अपनी हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक ही जैसे ‘स्ट्रांग’ रहना चाहते हो तो हिन्दी अखबार पढ़ना छोड़ दो। यह भी बता देता हू कि स्ट्रांग अंग्रेजी का शब्द है जिसका मतलब है ‘मजबूत’।
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कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • वन्दना  On अक्टूबर 24, 2010 at 15:59

    अब कहाँ जाऊँ

    मैं किधर जाऊँ

    बेबस हूँ लाचार हूँ

    हाथों की कठपुतली हूँ

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (25/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

  • रंजना  On अक्टूबर 25, 2010 at 17:52

    सही कहा…पर यह व्यंग्य कहाँ आज का सत्य है और बहुत दुखद स्थिति है यह…

    बहुत सटीक लिखा है आपने…आभार !!!

  • vishal krantikari  On मई 22, 2011 at 12:30

    nice ne

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