बाबा रामदेव क्या चमत्कार कर पायेंगे-हिन्दी आलेख (swami ramdev ka bhrashtacha ke viruddhi andolan-hindi lekh)


बाबा रामदेव और किरणबेदी ने मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ लोग उनके प्रयासों पर निराश हैं तो कुछ आशंकित! इस समय देश के जो हालात हैं वह किसी से छिपे नहीं हैं क्योंकि भारत का आम आदमी अज़ीब किस्म की दुविधा में जी रहा है। स्थिति यह है कि लोग अपनी व्यथाऐं अभिव्यक्ति करने के लिये भी प्रयास नहीं कर पा रहे क्योंकि नित नये संघर्ष उनको अनवरत श्रम के लिये बाध्य कर देते हैं।
      बाबा रामदेव के आंदोलन में  चंदा लेने के अभियान पर उठेंगे सवाल-हिन्दी लेख (baba ramdev ka andolan aur chanda abhiyan-hindi lekh)
      अंततः बाबा रामदेव के निकटतम चेले ने अपनी हल्केपन का परिचय दे ही दिया जब वह दिल्ली में रामलीला मैदान में चल रहे आंदोलन के लिये पैसा उगाहने का काम करता सबके सामने दिखा। जब वह दिल्ली में आंदोलन कर रहे हैं तो न केवल उनको बल्कि उनके उस चेले को भी केवल आंदोलन के विषयों पर ही ध्यान केंद्रित करते दिखना था। यह चेला उनका पुराना साथी है और कहना चाहिए कि पर्दे के पीछे उसका बहुत बड़ा खेल है।
    उसके पैसे उगाही का कार्यक्रम टीवी पर दिखा। मंच के पीछे भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का पोस्टर लटकाकर लाखों रुपये का चंदा देने वालों से पैसा ले रहा था। वह कह रहा था कि ‘हमें और पैसा चाहिए। वैसे जितना मिल गया उतना ही बहुत है। मैं तो यहां आया ही इसलिये था। अब मैं जाकर बाबा से कहता हूं कि आप अपना काम करते रहिये इधर मैं संभाल लूंगा।’’
          आस्थावान लोगों को हिलाने के यह दृश्य बहुत दर्दनाक था। वैसे वह चेला उनके आश्रम का व्यवसायिक कार्यक्रम ही देखता है और इधर दिल्ली में उसके आने से यह बात साफ लगी कि वह यहां भी प्रबंध करने आया है मगर उसके यह पैसा बटोरने का काम कहीं से भी इन हालातों में उपयुक्त नहीं लगता। उसके चेहरे और वाणी से ऐसा लगा कि उसे अभियान के विषयों से कम पैसे उगाहने में अधिक दिलचस्पी है।
            जहां तक बाबा रामदेव का प्रश्न है तो वह योग शिक्षा के लिये जाने जाते हैं और अब तक उनका चेहरा ही टीवी पर दिखता रहा ठीक था पर जब ऐसे महत्वपूर्ण अभियान चलते हैं कि तब उनके साथ सहयोगियों का दिखना आवश्यक था। ऐसा लगने लगा कि कि बाबा रामदेव ने सारे अभियानों का ठेका अपने चेहरे के साथ ही चलाने का फैसला किया है ताकि उनके सहयोगी आसानी से पैसा बटोर सकें जबकि होना यह चाहिए कि इस समय उनके सहयोगियों को भी उनकी तरह प्रभावी व्यक्तित्व का स्वामी दिखना चाहिए था।
अब इस आंदोलन के दौरान पैसे की आवश्यकता और उसकी वसूली के औचित्य की की बात भी कर लें। बाबा रामदेव ने स्वयं बताया था कि उनको 10 करोड़ भक्तों ने 11 अरब रुपये प्रदान किये हैं। एक अनुमान के अनुसार दिल्ली आंदोलन में 18 करोड़ रुपये खर्च आयेगा। अगर बाबा रामदेव का अभियान एकदम नया होता या उनका संगठन उसको वहन करने की स्थिति में न होता तब इस तरह चंदा वसूली करना ठीक लगता पर जब बाबा स्वयं ही यह बता चुके है कि उनके पास भक्तों का धन है तब ऐसे समय में यह वसूली उनकी छवि खराब कर सकती है। राजा शांति के समय कर वसूलते हैं पर युद्ध के समय वह अपना पूरा ध्यान उधर ही लगाते हैं। इतने बड़े अभियान के दौरान बाबा रामदेव का एक महत्वपूर्ण और विश्वसीनय सहयोगी अगर आंदोलन छोड़कर चंदा बटोरने चला जाये और वहां चतुर मुनीम की भूमिका करता दिखे तो संभव है कि अनेक लोग अपने मन में संदेह पालने लगें।
            संभव है कि पैसे को लेकर उठ रहे बवाल को थामने के लिये इस तरह का आयोजन किया गया हो जैसे कि विरोधियों को लगे कि भक्त पैसा दे रहे हैं पर इसके आशय उल्टे भी लिये जा सकते हैं। यह चालाकी बाबा रामदेव के अभियान की छवि न खराब कर सकती है बल्कि धन की दृष्टि से कमजोर लोगों का उनसे दूर भी ले जा सकती है जबकि आंदोलनों और अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी ही सफलता दिलाती है। बहरहाल बाबा रामदेव के आंदोलन पर शायद बहुत कुछ लिखना पड़े क्योंकि जिस तरह के दृश्य सामने आ रहे हैं वह इसके लिये प्रेरित करते हैं। हम न तो आंदोलन के समर्थक हैं न विरोधी पर योग साधक होने के कारण इसमें दिलचस्पी है क्योंकि अंततः बाबा रामदेव का भारतीय अध्यात्म जगत में एक योगी के रूप में दर्ज हो गया है जो माया के बंधन में नहीं बंधते।
बाबा स्वामी रामदेव के हम शिष्य नहीं है पर एक योग साधक के नाते उनके अंतर्मन में चल रही साधना के साथ ही विचारक्रम का कुछ आभास है जिसे अभी पूरी तरह से लिखना संभव नहीं है। यहां एक बात बता दें कि आम बुद्धिजीवी चाहे भले ही उनके समर्थक हों इस बात का आभास नहीं कर सकते कि रामदेव बाबा की क्षमता कितनी अधिक है। उनके कथन और दावे अन्य सामान्य कथित महान लोगों से अलग हैं। वही एक व्यक्ति है जो परिणामोन्मुख आंदोलन का नेतृत्व कर सकते हैं और वह भी ऐसा जिसका सदियों तक प्रभावी हो। इससे भी आगे एक बात कहें तो शायद कुछ लोग अतिश्योक्ति समझें कि अगर बाबा रामदेव इस पथ पर चले तो एक समय अपने अंदर भगवान कृष्ण के अस्तित्व का आभास करने लगेंगे जो कि एक पूर्ण योगी के लिये ही संभव है। ऐसा हम इसलिये कह रहे हैं कि परिणाममूलक अभियान का सीधा मतलब है कि हिंसा रहित एक आधुनिक महाभारत का युद्ध! जब वह सारथी की तरह अपने अर्जुनों-मतलब साथियों-के रथ का संचालन करेंगे तब अनेक तरह से वार भी होंगे। यह एक ऐसा युद्ध होगा जिसे कोई पूर्ण योगी ही जितवा सकता है।
हां, एक अध्यात्मिक लेखक के रूप में हमें यह पता है कि अनेक भारतीय विचाराधारा समर्थक भी बाबा रामदेव को एक योग शिक्षक से अधिक महत्व नहीं देते और इसके पीछे कारण यह कि वह स्वयं योग साधक नहीं है। हम भी बाबा रामदेव को योग शिक्षक ही मानते हैं पर यह भी जानते हैं कि योग माता की कृपा से कोई भी शिक्षक महायोगी और महायोद्धा बन सकता हैं।
जो लोग या योग साधक नित बाबा रामदेव को योग शिक्षा देते हुए देखते हैं हैं वह उनके चेहरे, हावभाव, आंखें तथा कपड़ों पर ही विचार कर सकते हैं पर जो उनके अंदर एक पूर्णयोग विद्यमान है उसका आभास नियमित योग साधक को ही हो सकता है।
अब आते हैं इस बात पर कि आखिर बाबा रामदेव जब भ्रष्टाचार के विरुद्ध हिंसा रहित नया महाभारत रचेंगे तब उन पर आक्रमण किस तरह का होगा? उनका बचाव वह किस तरह करेंगे?
हम बाबा रामदेव से बहुत दूर हैं और किसी प्रत्यक्ष सहयोग के नाम पर अगर कुछ धन देना पड़े तो देंगे। कुछ लिखना पड़ा तो लिख देंगे। भारत को महान भारत बनाने के प्रयासों का सदैव हृदय से समर्थन करेंगे पर उनके साथ मैदान में आने वाले कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को यह बता दें कि उनके विरोधियों के पास अधिक हथियार नहीं है-शक्ति तो नाम की भी नहीं है। कभी न बरसने पर हमेशा गरजने वाले बादल समूह हैं भ्रष्टाचार को सहजता से स्वीकार करने वाले लोग! मंचों पर सच्चाई की बात करते हैं पर कमरों में उनको अपना भ्रष्टाचार केवल अपनी आधिकारिक कमाई दिखती है।
अभी तो प्रचार माध्यम उनके आधार पर अपनी सामग्री बनाने के लिये प्रचार खूब कर रहे हैं पर समय आने पर यही बाबा रामदेव के विरुद्ध विष वमन करने वालों को निष्पक्षता के नाम पर स्थान देंगे।
इनमें सबसे पहला आरोप तो पैसा बनाने और योग बेचने का होगा। उनके आश्रम पर अनेक उंगलियां उठेंगी। दूसरा आरापे अपने शिष्यों के शोषण का होगा। चूंकि योगी हैं इसलिये हिन्दू धर्म के कुछ ठेकेदार भी सामने युद्ध लड़ने आयेंगे। पैसा बनाने और योग बेचने के आरोपों का तो बस एक ही जवाब है कि योगी समाज को बनाने और बचाने के लिये माया को भी अस्त्र शस्त्र की तरह उपयोग करते हैं। माया उनकी दासी होती है। समाज उनको अपना भगवान मानता है। जहां तक करों के भुगतान करने या न करने संबंधी विवाद है तो यहां यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि वह तो धर्म की सेवा कर रहे हैं। अस्वस्थ समाज को स्वस्थ बना रहे हैं जो कि अनेक सांसरिक बातों से ऊपर उठकर ही किया जा सकता-मतलब कि योगी को तो केवल चलना है इधर उधर देखना उसका काम नहीं है। लक्ष्मी तो उसकी दासी है, और फिर जो व्यक्ति, समाज या संस्थायें भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है वह किस तरह नैतिकता और आदर्श की दुहाई एक योगी को दे सकती हैं?
आखिरी बात यह है कि सच में ही समाज का कल्याण करना है तो धर्म की आड़ लेना बुरा नहीं है। बुरा तो यह है कि अधर्म की बात धर्म की आड़ लेकर की जाये। चलते चलते एक बात कहें जो किसी योगी के आत्मविश्वास और ज्ञान का प्रमाण है वह यह कि बाबा रामदेव के अनुसार भ्रष्टाचार के विरुद्ध किसी एक मामले पर प्रतीक के रूप में काम करना शुरुआत है न कि लक्ष्य! अगर आप योग साधक नहीं हैं तो इस बात का अनुभव नहीं कर सकते कि योग माता की कृपा से ही कोई ऐसी दिव्य दृष्टि पा सकता है जो कि छोटे प्रयासों से संक्षिप्त अवधि में बृहद लक्ष्य की प्राप्ति की कल्पना न करे।
वैसे बाबा रामदेव को भी यह समझना चाहिए कि अगर कुछ जागरुक और सक्रिय लोग उनका समर्थन करने के लिये आगे आयें हैं तो वह उनका सही उपयोग करें। उनका आना वह योगमाता की कृपा का ही परिणाम है जो सभी योग साधकों को नहीं मिलती। योग से जुड़े भी दो प्रकार के लोग होते हैं-एक तो पूर्ण निष्काम योगी जो समाज के लिये कुछ करने का माद्दा रखते हैं दूसरे योग साधक जो केवल अपनी देह, मन तथा विचारों के विकारों के विसर्जन के अधिक कुछ नहीं करते। ऐसे में हम जैसा एक मामूली नियमित योग साधक केवल उनकी लक्ष्य प्राप्ति के लिये योग माता से अधिक कृपा की कामना ही कर सकता है। देखेंगे आगे आगे क्या होता है? बहरहाल उनके समर्थकों के साथ ही आलोचकों को भी बता दें कि एक योगी के प्रयास सामान्य लोगों से अधिक गंभीर और दूरगामी परिणाम देने वाले होते हैं। समर्थकों से कहेंगे कि वह योग साधना अवश्य शुरु करें और आलोचकों से कहेंगे कि पहले यह बताओ कि क्या तुम योग साधना करते हो। अगर नहीं तो यह अपने आप ही तय करो कि क्या तुम्हें उनकी आलोचना का हक है? भारत का नागरिक और योग साधक होने के नाते हमारी बाबा रामदेव के ंव्यक्तित्व और कृतित्व में हमेशा रुचि रही है और रहेगी।
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कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
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बाबा रामदेव क्या नया महाभारत रच पायेंगे-हिन्दी लेख (baba ramdev aur naya mahabharat-hindi lekh)

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टिप्पणियाँ

  • Rajesh  On नवम्बर 21, 2010 at 23:47

    आपका कहना सही है | केवल बाबा रामदेव ही इस देव असुर संग्राम का नेतृत्व कर सकते है

  • dev singh rawat  On फ़रवरी 6, 2011 at 22:54

    उत्तराखण्ड में हो रहे भ्रश्टाचार पर मूक क्यों है बाबा रामदेव
    देष से भ्रश्टाचार को खत्म करने के अभियान को षुरू करने वाले बाबा रामदेव
    6 जनवरी को संसद के समीप प्रतिष्ठित काउंस्टिटयूशन हाल में स्वामी रामदेव जी से मैने एक सीध प्रश्न किया कि आप देश में भ्रष्टाचार के खिलापफ आवाज उठाने की मुहिम चला रहे है परन्तु जहां आप रहते हैं उस प्रदेश उत्तराखण्ड में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलापफ आप मूक क्यों है? मेरे इस सटीक प्रश्न पर व प्रदेश के मुख्यमंत्राी निशंक को निशाना साध्ते हुए किये गये प्रश्न पर वे अपनी आदत की तरह ताली बजा कर व सर झुका कर हंस गये। यह प्रश्न मेने उनके प्रैस कांप्रेफस के बाद स्वामी रामदेव को प्यारा उत्तराखण्ड समाचार पत्रा देते हुए किया। स्वामी राम देव दिल्ली के इस प्रतिष्ठित काउंस्टिटूयशन हाल में स्वदेशी आध्यात्मिक जागरण संघ यानी कनपफेडरेशन आपफ इंडिजिनस स्पिरिचुअल मूवमेंटस की प्रेस कांप्रेफस करने यहां पर देश के अन्य प्रतिष्ठित ध्र्माेचार्यो के साथ सांय 6 बजे यहां पर पंहुचे हुए थे।
    मेरे साथ उस समय भारतीय भाषाओं के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले पुरोध राजकरणसिंह व देश के अग्रणी राष्ट्रवादी ंिचतक पत्राकार बनारसी सिंह भी थे। राजकरण सिंह जी ने भी स्वामी रामदेव से दो टूक सवाल किया कि भारतीय भाषाओं के खिलापफ सरकार षडयंत्रा रच रही है। अगर देश में भारतीय भाषायें नहीं रहेगी तो देश की संस्कृति कहां से बचेगी। इसके बाद जब सभागार से प्रेस कांपफे्रंस के समापन के बाद स्वामी रामदेव जाने लगे तो रास्ते में पिफर मैने आग्रह किया कि स्वामी जी आप का भ्रष्टाचार का राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत उत्तराखण्ड से क्यों नहीं कर रहे हो। आप वहां पर हो रहे भ्रष्टाचार पर दिल्ली में बैठे भाजपा व कांग्रेस के आकाओ की तरह मूक क्यों हो? राजनेताओं की तो विवशता होती है, उनको अपनी जाति व स्वार्थ को प्राथमिकता देनी होती है। परन्तु बाबा रामदेव जो देश में भ्रष्टाचार के खिलापफ आवाज उठाने की बात कर रहे हैं उनकी मूकता मेरी समझ में नही आती हे। हो सकता हो उनका अपना आश्रम इत्यादि स्थान की कोई कमजोरी हो? या अन्य विवशता यह तो वे जाने? परन्तु मुझे लगता है कि बाबा रामदेव भी उत्तराखण्ड में हो रहे भ्रष्टाचार के आगे मौन हैं?
    बाबा रामदेव का मैने कापफी नाम सुना था, मैं उनको भारतीय संस्कृति का वर्तमान समय में ही नहीं स्वामी विवेकानन्द के बाद सबसे बडा प्रचारक मानता हॅूू। उनके कार्यो व विचारों से पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का पताका न केवल पफहरा रहा है अपितु शताब्दियों से उपेक्षित भारतीय योग विज्ञान को पूरे विश्व में प्रमुख सम्मान मिला। इस कारण न केवल भारतीय योग को महत्वपूर्ण स्थान मिला अपितु हजारों योगियों को योग प्रशिक्षण द्वारा आजीविका का साध्न मिला। वहीं देशी दवाईयों को एक बड़ा बाजार मिला। इससे किसानों व ग्रामीणों को भी रोजगार मिला। स्वामी रामदेव गांध्ी जी के बाद पहले ऐसे नेता है जिन्होंने भारतीय जनमानस को इतने करीब से उद्देलित किया। आज स्वामी रामदेव अन्य ज्ञानी संतों की तरह भिक्षुक या किसी के दान देने पर निर्भर नहीं हैं अपितु उनका संस्थान देश को करोड़ो रूपये आयकर देने वाला है। स्वामी रामदेव पूरे देश में जिस प्रकार से भारतीय स्वाभिमान के बैनर तले देश के आम जनमानस को जागृत कर रहे है उससे देश को नया जीवन मिला।
    भले ही स्वामी रामदेव में कई कमियां हो सकती है परन्तु जो विचार वे देश के आम जनता को दे रहे हैं उससे इस बात का मुझे पूरा भरोसा है कि कभी न कभी भारत विश्व में महाशक्ति बनेगा। भारत विश्व में महाशक्ति तभी बनेगा जब वह अपने आप को पहचानेगा। जिस प्रकार से हनुमान को अपनी विस्मृत शक्तियों का भान नहीं था उसी प्रकार से आम भारतीयों को अपनी शक्ति व देश की गौरवशाली संस्कृति का भान नहीं है। आज देश पश्चिमी सभ्यता की विकृतियों को आत्मसात कर रहा है। जो देश व मानवता के लिए हानिकारक है। ऐसे में स्वामी रामदेव का उदय भारत के लिए ही नहीं विश्व के लिए कल्याणकारी है।
    भले ही स्वामी रामदेव की पार्टी आगामी चुनावों में सत्ता पर काबिज न हो पाये परन्तु यह निश्चित है कि स्वामी रामदेव आज पूरे विश्व के भारतीयों के लिए आदरणीय ही नहीं अपितु दिलों में राज कर रहे हैं। जो काम संघ जैसे विशाल संगठन नहीं कर पायाहो वह काम स्वामी राम देव से करा कर भगवान श्रीकृष्ण ने एक प्रकार का चमत्कार ही कर दिया। राई को पर्वत करे पर्वत राई मान। इसे कहते हैं भगवान या समय का चमत्कार। वह कब किसी को आसमान पर चमका दे व कब किस ताज वाले को बेताज कर दे। समय सबसे बड़ा होता है। परन्तु मुझे गर्व होता है स्वामी रामदेव के भाग्य पर, जो दायित्व भगवान श्रीकृष्ण ने उनको दिया, वह सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता।
    स्वामी रामदेव को चाहिए कि वह बिना किसी भय के निसंकोच हो कर भ्रष्टाचार के खिलापफ व राष्ट्र के नव निर्माण के लिए कार्य करें। सही उद्देश्य की पूर्ति के लिए सही संसाध्नों व व्यक्तियों का साथ होना चाहिए। स्वामी रामदेव पर पूरे देश की आशा लगी हुई हे। उनको चाहिए कि वे अपने बचनों की रक्षा करते हुए उत्तराखण्ड में हो रहे भ्रष्टाचारों के खिलापफ खुले तोर पर प्रहार करे। उत्तराखण्ड की आम जनता का देश की आम जनमानस की तरह ही इन राष्ट्रीय दलों से मोह भंग हो सकता है। मुझे स्वामी रामदेव को एक बात स्पष्ट शब्दों में कहनी है कि यह जनता सब कुछ जानती है? स्वामी रामदेव के भ्रष्टाचार के खिलापफ अभियान पर कांग्रेसी सांसद व केन्द्रीय हरीश रावत के उठाये प्रश्न को भी में यहां पर स्वामी जी के ध्यान के लिए उजागर करना चाहता हॅू कि स्वामी रामदेव भ्रष्टाचार के खिलापफ क्या लडेंगे जब वे एक भ्रष्ट मंत्राी का नाम उजागर करने की हिम्मत तक नहीं रख सकते है? स्वामी जी दुनिया सब जानती है? आप साहस करें, भ्रष्टाचार के खिलापफ सुविध भोगी रूख आदमी के कदमों के साथ उसके संकल्प को ही कमजोर करता है। विश्व मानवता व अन्याय के खिलापफ कुरूक्षेत्रा के रण में उतरा यह सिपाई एक ही कामना श्रीकृष्ण के चरणों में करता है कि आपके राष्ट्र व मानवता को मजबूत करने वाले संकल्प को भगवान श्री कृष्ण साकार करे। शेष श्री कृष्ण हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

  • rakhi sharma  On सितम्बर 6, 2012 at 18:12

    hum ek baat bhul jaate hain ki baba ramdev hon ya anna hazare sab par ugali uthana asaan hai par hum khud koi kadam nahi uthate . aur jo kadam uthate hai wajaye unka saath dene ke hum un par hi arop lagate hain . kuch b ho hamare mudda bhratachar hai na ki anna ya ramdev. us mudde par prakash dale……………….

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