महंगाई देश भक्ति को कुचल जायेगी-हिन्दी कविता (mehangai aur deshbhakti-hindi hasya kavita)


भूखे इंसान के पास देश भक्ति कहां से आयेगी,
रोटी की तलाश में भावना कब तक जिंदा रह पायेगी।
पत्थर और लोहे से भरे शहर भले देश दिखलाते रहो
महंगाई वह राक्षसी है जो देशभक्ति को कुचल जायेगी।
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क्रिकेट और फिल्म में
बहलाकर
कब तक देश के भूखों की
भावनाओं को दबाओगे।
असली भारत का दर्द जब बढ़ जायेगा,
तब तुम्हारा रोम रोम भी जल जायेगा,
कब तक पर्दे पर
नकली इंडिया सजाओगे।
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कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior

http://zeedipak.blogspot.com

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यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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